पेयजल योजनाएं बेपानी, स्रोतों से बुझ रही प्यास

अल्मोुड़ा जिले के द्वाराहाट व जैंती क्षेत्र में बरसात से पेयजल योजनाओं को काफी नुकसान हुआ है। जगह-जगह पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे कई गांवों में जलापूर्ति ठप है। लोग दूरदराज के प्राकृतिक जल स्रोतों पर जाकर प्यास बुझाने का इंतजाम कर रहे हैं। भ्

JagranMon, 14 Jun 2021 06:27 PM (IST)
पेयजल योजनाएं बेपानी, स्रोतों से बुझ रही प्यास

जागरण टीम, द्वाराहाट/जैंती : जिले के दूर गांवों में अतिवृष्टि ने चुनौतियां बढ़ा दी हैं। भूस्खलन व मलबे की चपेट में आकर पेयजल योजनाएं ध्वस्त होने से पाइन लाइनें बेपानी हो गई हैं। प्राकृतिक जलस्रोत इस संकट में सहारा बन रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार क्षतिग्रस्त योजनाओं की मरम्मत के लिए आपदा मद से बजट मांगा जा रहा है।

प्री मानसून की भारी वर्षा ने द्वाराहाट विकासखंड के सुदूर क्षेत्रों की दुश्वारियां बढ़ा दी हैं। मेल्टा व सती नौगाव को जलापूर्ति करने वाली योजनाएं जगह जगह ध्वस्त हो गई हैं। दोनों गांवों में करीब ढाई हजार की आबादी प्रभावित है। महिलाएं भरी दोपहरी दूर स्रोतों से सिर पर पानी ढो रही हैं। योजनाओं की हालत देख साफ लग रहा कि परेशानी जल्द दूर होने वाली नहीं। सोमवार को विभागीय कर्मचारियों ने स्थलीय निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त योजना का जायजा लिया। वहीं धनखलगाव पेयजल योजना टूटने से लगभग 150 परिवारों को पानी मिला बंद हो गया है। यहां तकनीकी टीम मरम्मत कार्य में जुटी है। उधर मल्यालगाव की योजना के ध्वस्त होने से करीब एक हजार ग्रामीण समीपवर्ती मल्याल नदी व अन्य स्त्रोतों से प्यास बुझा रहे हैं। हालाकि मुझोली, दैना व नैणी गांवों की योजनाएं ठीक कर लिए जाने से बड़ी राहत मिली है।

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जैंती में सात योजनाएं ठप

जैंती (अल्मोड़ा) तहसील क्षेत्र के सुदूर क्षेत्रों में जलापूर्ति ठप है। कालाडुंगरा, बसगांव, मझाऊं, बाराकोट, पुभाऊं, थामथोली व लोहना समूह पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। इससे करीब 12 गांवों में पांच हजार की आबादी को नल से पानी मिलना बंद हो गया है। फिलहाल, लोग प्राकृतिक स्रोतों से प्यास बुझा रहे हैं।

अतिवृष्टि से मलबे में दबने से द्वाराहाट क्षेत्र में पेयजल योजनाओं को काफी क्षति पहुंची है। तकनीकी कर्मचारी मरम्मत कार्य में लगाए गए हैं। कुछ योजनाएं ठीक हो गई हैं। दोसाद गधेरे से मेल्टा व सतीनौगाव के लिए बनी योजना बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है। इसे दैवीय आपदा मद में शामिल कर मरम्मत कराई जाएगी।

- एसएस रौतेला, कनिष्ठ अभियंता, जल संस्थान

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