डेंगू के खतरों से आप भी रहें सावधान, गर्भवती और गर्भस्थ शिशु की बचाएं जान

डेंगू का संक्रमण गर्भवती के लिए काफी घातक हो सकता है। यह कहना है पं. दीनदयाल राजकीय चिकित्सालय के एमसीएच विंग में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. रश्मि सिंह का। वह बताती हैं कि डेंगू होने पर गर्भवती में रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है

Abhishek SharmaTue, 23 Nov 2021 06:00 AM (IST)
डेंगू का संक्रमण गर्भवती के लिए काफी घातक हो सकता है।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। गर्भावस्था के दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर होती है। गर्भवती के लिए खास तौर पर अंतिम तीन महीने काफी महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान वायरस का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में इन तीन महीनों में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत होती है। डेंगू का संक्रमण गर्भवती के लिए काफी घातक हो सकता है। यह कहना है पं. दीनदयाल राजकीय चिकित्सालय के एमसीएच विंग में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. रश्मि सिंह का। वह बताती हैं कि डेंगू होने पर गर्भवती में रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति उसे गर्भपात तक ले जा सकती है। इतना ही नहीं प्रसव के दौरान भी अधिक रक्तस्राव हो सकता है। जन्म के बाद बच्चे में भी डेंगू का वायरस ट्रांसमिट हो सकता है। इसलिए गर्भवती को डेंगू से बच कर रहना चाहिए।

क्या होता है डेंगू : डेंगू एक तरह का वायरस है जो एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। डेंगू मच्छर दिन में काटता है। इन मच्छरों का प्रकोप बारिश और उसके तुरंत बाद के मौसम में बढ़ता है। साफ और ठहरे हुए पानी में मच्छर अंडे देते हैं। इन्हीं दिनों में डेंगू का कहर भी बढ़ता है। गड्ढे, नाली, कूलर, पुराने टायर, टूटी बोतलें, डिब्बों जैसी जगहों में रुके हुए पानी में ये मच्छर पैदा होते हैं।

ऐसे बरतें सावधानी : घर के अंदर और बाहर उन सभी जगहों को साफ रखें जहां भी पानी जमा होने की आशंका हो। जैसे- पुराने टायर, टूटी बोतल, डिब्बे, कूलर, नालियां।

-सोते समय मच्छर से बचने के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। घर के अंदर मच्छर खिड़की और दरवाजों से आते हैं। उन पर नेट लगाने से डेंगू के कहर से बचा जा सकता है।

-फुल पैंट और फुल स्लीव्स वाले कपड़े पहनें। ताकि मच्छर आपको काट न सकें। पार्क या ऐसी जगह न जाएं, जहां मच्छर होने की आशंका हो।

रोग के लक्षण

तेज बुखार, खांसी, पेट दर्द व बार-बार उलटी होना, सांस लेने में तकलीफ, मुंह, होंठ और जीभ का सूखना, आंखें लाल होना, कमजोरी और चिड़चिड़ापन, हाथ-पैर का ठंडा होना, कई बार त्वचा का रंग भी बदल जाता है और चकत्ते पड़ जाते हैं।

आशंका होने पर क्या करें

डा. रश्मि सिंह कहती हैं कि यदि गर्भवती को डेंगू के लक्षण दिखें तो बिना समय गंवाए डाक्टर को दिखाना चाहिए। देरी होने से महिला व उसके बच्चे की जान को खतरा हो सकता है। डाक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न लें।

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