योग भगाए रोग : कोरोना वायरस संक्रमण में योग का काफी महत्‍व, कोरोना को हराने में मददगार

आहार प्रतिबंध शरीर के संतुलन को लाने में मदद करते हैं।

आहार प्रतिबंध शरीर के संतुलन को लाने में मदद करते हैं। पनीर दही ताजा फल जूस कच्ची सब्जियों और अंकुरित अनाज यह एक पौष्टिक आहार है जो शरीर के लिए आवश्यक जरूरी पोषक तत्वों की भरपाई कर शरीर को स्वस्थ एवं निरोग बनाये रखने में सहायक है।

Abhishek SharmaMon, 17 May 2021 02:06 PM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। कोरोना मुक्त काशी योग अभियान ऑनलाइन फेसबुक पब्लिक ग्रुप की लोकप्रियता धीरे धीरे अब पूरे भारत में लोगों को योग करने के लिए जागरूक कर रहा है। योग करने के लिए पूरे भारत से दिल्ली, सोनीपत, हरियाणा, पुणे, जमशेदपुर, कानपुर, लखनऊ, गोरखपुर, सीतापुर, इटावा, फतेहपुर, गाजीपुर बलिया के परिवार जुड़कर ऑनलाइन योग कर रहें हैं। अब पूरा भारत तीसरी लहर की तैयारी दवाई, कड़ाई एवं वैक्सीन लेने के साथ योग करके कोरोना को हराने में जुट गया है।

योग हर पहर दूर करेगा कोरोना की हर लहर

- आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। यदि आपके अंदर आलस्य है तो आपके अंदर नकारात्मक ऊर्जा शरीर को रोगग्रस्त करने लगेगी इसलिए वर्तमान कोरोना संक्रमण के दूसरे लहर में सुबह दोपहर शाम योग अवश्य करें। जिससे शरीर मे सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह के साथ शरीर स्फूर्तिवान बना रहेगा और मन प्रसन्न एवं अंदर से रोग से लड़ने वाले एंटीजन सक्रिय रहेंगे जिससे किसी वायरस का संक्रमण न के बराबर रहेगा।

योग मोर-नेचुरली क्योर

- योग एक प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली है जो प्राचीन काल से हमारे ऋषि मुनि गंभीर रोगों से बचने के लिए उपयोग में लाते रहें हैं। यह हमारे शरीर की नैसर्गिक प्रणाली को नुकसान पहुंचाये बिना शरीर को फिर से जीवंत और शुद्ध करने में मदद करता है। योग और ध्यान के रूप में और प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाने पर शरीर में उत्पन्न विकारों को नेचुरली क्योर स्वतः होता रहता है। इसके साथ ज्यादा से ज्यादा उपयोगी योग क्रिया अपनाने से हर प्रकार की व्याधियों से छुटकारा मिल जाता है।

नैसर्गिक उपचार के तहत निर्धारित आहार प्रतिबंध शरीर के संतुलन को लाने में मदद करते हैं। पनीर, दही, ताजा फल, जूस, कच्ची सब्जियों और अंकुरित अनाज यह एक पौष्टिक आहार है जो शरीर के लिए आवश्यक जरूरी पोषक तत्वों की भरपाई कर शरीर को स्वस्थ एवं निरोग बनाये रखने में सहायक है। कोरोना की दूसरी लहर में कोरोना संक्रमित को ज्यादा से ज्यादा विटामिन एवं मिनरल्स इन्ही सभी चीजों से मिल रहा है।

योग से दूरी दवा की मजबूरी

- अगर जिंदा रहना है तो प्रकृति के नियम को अपनाना होगा। पहले सभी लोग प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठकर स्वच्छ वातावरण में योग एवं कसरत के माध्यम से अपने को गतिशील रखते थे जिससे उनके अंदर सांस को रोकने की क्षमता एवम फेफड़ों में शुद्ध ऑक्सीजन का प्रवाह होता था जिससे रोग से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती थी। लेकिन वर्तमान एक दशक से नई पीढ़ी अब देर रात तक जागना और एयरकंडीशनर में सोना और सुबह देर तक सोना एक लाइफ स्टाइल बन गयी है। जिससे लोग अब योग एवं अन्य कामों को करने से दूरी बनायी जिससे उनके अंदर रोग से लड़ने की क्षमता कम होती जा रही है और जब किसी वायरस का अटैक हो रहा तो शरीर  तुरंत संक्रमण का शिकार होकर दवाइयों पर निर्भर होता जा रहा है। अब तो यही कहा जा सकता है कि लाखों की दवा खाएंगे लेकिन योग नहीं करेंगे।

कोरोना से बचाव में महाप्राण ध्वनि कपालभाति एवं भस्त्रिका बेहद लाभदायक

-एक सप्ताह तक चलने वाले कोरोना मुक्त काशी योग अभियान के दूसरे दिन सोमवार को दिव्य योग परामर्श केंद्र वाराणसी के योगाचार्य पंडित बब्बन तिवारी ने सोमवार को प्रातः 7 बजे से 8 बजे तक कोरोना मुक्त काशी योग अभियान फेसबुक पब्लिक ग्रुप पर लाइव पर महामृत्युंजय मंत्र की ध्वनि  एवं ओम  की ध्वनि से वातावरण गुंजित कर दिया। योगाचार्य ने बताया कि ओम से ही ब्रह्मांड की संरचना हुई है ओम का उच्चारण प्रतिदिन प्रातः काल 10 मिनट किया जाए तो शरीर की सारी मांसपेशियों के ब्लॉकेज खुल जाते हैं मानसिक रूप से व्यक्ति स्वस्थ होने लगता है ज्ञान बुद्धि का उदय होता है मन में एकाग्रता बढ़ती है शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि होती है।

महाप्राण ध्वनि कराते हुए उन्होंने कहा कि महाप्राण  ध्वनि  श्वसन की क्रिया को संतुलित करती है फेफड़े के अंदर विजातीय तत्व को बाहर निकालती है फेफड़े में नई ऊर्जा का संचार होता है वहीं भ्रामरी गला नाक मुंह आंख मस्तिष्क के अंदर विकारों को नष्ट करती है अपने भंवरे की गुंजन की ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा का समन होता है और सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि होती है योगाचार्य ने कहा कि कपालभाति करने से शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है वही भस्त्रिका करने से फेफड़े के अंदर मजबूती आती है ऑक्सीजन का संचार पूर्ण रूप से होता है फेफड़े में जो भी विजातीय तत्व है बाहर निकल जाते हैं नई ऊर्जा का एक संचार होता है। अनुलोम विलोम करने से शरीर में जो भी ब्लॉकेज है सब खुल जाते हैं श्वसन क्रिया संतुलित रहती है l भस्त्रिका करने से फेफड़े के अंदर मजबूती आती है ऑक्सीजन का संचार पूरे शरीर में रोग से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होती है। भुजंगासन करने से फेफड़े मजबूत होते हैं शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि होती है। पवनमुक्तासन करने से शरीर के अंदर जो भी नकारात्मक उर्जा  बाहर निकल जाती है शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि होती है फेफड़ा मजबूत होता है हृदय को बल मिलता है l

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