योग और ध्यान ऐसे कर रहे कोरोना संक्रमण का समाधान, कई रोगों का किया जा सकता है काम तमाम

पूरा देश इन दिनों कोरोना की दूसरी लहर के तांडव को झेल रहा है।

पूरा देश इन दिनों कोरोना की दूसरी लहर के तांडव को झेल रहा है। कोई वैक्सीन का सहारा ले रहा है तो कोई मेडिसिन से खुद को स्वस्थ करने की जुगत में लगा है। योग लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है।

Abhishek SharmaSun, 16 May 2021 04:13 PM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। पूरा देश इन दिनों कोरोना की दूसरी लहर के तांडव को झेल रहा है। कोई वैक्सीन का सहारा ले रहा है तो कोई मेडिसिन से खुद को स्वस्थ करने की जुगत में लगा है। इन सब के बीच कोरोना से बचाव के लिए सबसे पुरानी पद्ध‍ति योग लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। योग के आसन रामबाण उपाय हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के साथ ही श्वसन तंत्र भी मजबूत करता है। योगाचार्यो की माने तो कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने का एकमात्र सर्वमान्य हल योगासन ही है।

योगाचार्य पं. बब्बन तिवारी का कहना है कि प्रतिदिन नियमित तौर पर योगासन करने से शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं में वृद्धि होती है। इससे जब हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है तो कोई वायरस या कीटाणु हमें संक्रमित नहीं कर पाता है। हमारे शरीर की रोगों से लड़ने वाली यह प्रणाली उसे स्वमेय खत्म कर देती है। इस तरह सिर्फ हम योग के माध्यम से कोरोना से लड़ाई जीत सकते हैं। बनारस में अब तक सैकड़ो लोग इस विद्या का लाभ लेकर खुद को स्वस्थ कर चुके है।

योगासन, प्राणायाम, प्रेक्षा ध्यान से कैसे बढ़ाएं इम्युनिटी 

योग चित्त वृत्ति निरोध: 

योग अध्यात्म चेतना की आंतरिक अभिव्यक्ति है। मानसिक और शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक, स्वास्थ्य के उपलब्ध होने का एक सरल मार्ग है। योगासन, आसन एवं यौगिक क्रियाएं, शरीर के तंत्र को सक्रिय एवं नियंत्रित करती है, जिससे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य की उपलब्धि होती है, जिसको करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि होती है। योगिक आसनों में स्नाय विक शक्ति के सक्रिय होने से शरीर को नाड़ी शक्ति प्राप्त होती है जिससे शरीर हल्का, ऊर्जावान मन शांत हो जाता है। कोरोना महामारी काल में खुद को स्वस्थ रखने के लिए आसन, प्राणायाम, प्रेक्षा ध्यान, डेली करना बेहद जरुरी है। आसन केवल शारीरिक प्रक्रिया मात्र नहीं है उसमें अध्यात्म निर्माण के बीज छुपे हैं।

महामारी से बचने के लिए कौन से आसन 

सुखासन, सर्वांगासन, भुजंगासन, मत्स्यासन, सिंहासन, ताड़ासन, शवासन, पवन मुक्तासन आदि के साथ ही पांच प्राणायाम और पांच आसनों के जरिये रक्तचाप, तनाव, मुधमेह, हृदयरोग आदि से बचा जा सकता है। कोरोना वायरस के संक्रमण ज्यादातर उन्हीं लोगों के लिए खतरा हैं जो उपरोक्त बीमारियों से ग्रस्त हैं। इन आसन को रोजाना करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी।

ऑक्सीजन को भी बढ़ाता है आसन  

शरीर में मानसिक तनाव कम और ऊर्जा का संचरण होगा। उपयुक्त आसनों के करने से ऑक्सीजन अत्यधिक मात्रा में फेफड़े के अंदर जाएगा फेफड़े के अंदर जो विजातीय तत्व है वह इन आसनों के द्वारा बाहर निकलते हैं। आसनों से मांस पेशियों में खिंचाव होता है जिससे हमारी मांस पेशियां तंदुरुस्त रहती हैं।

इन आसनों से स्वसन क्रिया को संतुलित किया जा सकता है। साथ ही इसे करने से शरीर में रक्त का प्रवाह धमनी शिरा में अच्छी तरह होता है।

कब नहीं करना चाहिए आसन 

जब व्यक्ति को कोई बड़ा बड़ा ऑपरेशन हुआ हो उस स्थिति में चिकित्सक से परामर्श के बाद ही आसन करें। शरीर के काफी अस्वस्थ होने पर चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही आसन करें। कोरोना से प्रभावित होने पर आसन चिकित्सक के परामर्श के बाद करें।

प्राणायाम क्या है 

प्रणाम संजीवनी शक्ति है जिसको करने से स्वास्थ्य तो बनता ही है साथ-साथ चित की निर्मलता भी बढ़ती है इससे आध्यात्मिक शक्ति को जागृत होने का अवसर उपलब्ध होता है। प्राणायाम मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। यह स्वसन क्रिया पर नियंत्रण करता है।

कोरोना काल में कौन से प्राणायाम से लाभ 

चंद्रभेदी प्राणायाम चंद्र स्वर से स्वास ग्रहण करते हैं इसे चंद्रभेदी प्राणायाम कहते हैं। चंद्रभेदी प्राणायाम करते समय चंद्र स्वर से धीरे-धीरे श्वास को ग्रहण करते हैं। नाक से लेकर गले और फेफड़े को पूरी तरह स्वास से भर दे। यथाशक्ति सास को रोकें यानी कुंभक करें उसके बाद सूर्य स्वर से रेचन करें उसके बाद कुछ समय बाह्य कुंभक करें। इसके साथ ही चंद्रभेदी प्राणायाम प्रतिदिन कम से कम 3 बार करें।

चंद्रभेदी प्राणायाम के लाभ 

इससे पित्त विकार नष्ट होता है, रक्त की शुद्धि होती है और शरीर में स्फूर्ति होती है। इससे स्वभाव शांत होता है। शीतकाल में चंद्रभेदी प्राणायाम न करें।

सूर्यभेदी प्राणायाम 

सूर्य स्वर से श्वास को ग्रहण करते हैं उसे सूर्यभेदी प्राणायाम करते हैं। पद्मासन या स्वास्तिक आसन में बैठकर सुख पूर्वक दाहिने हाथ के अंगूठे को दाहिनी नासिका एवं तर्जनी को भृकुटी के मध्य लगाएं मध्यमा से बाईं नासिका को बंद रखें सूर्य स्वर से धीरे-धीरे श्वास को ग्रहण करें नाक से लेकर गले और फेफड़ों को पूरी तरह स्वास से भरे इससे श्वास की अधिक मात्रा अंदर पहुंचेगी यथाशक्ति सुख पूर्वक स्वास को रोके यानी कुंभक करें कुछ समय बाद चंद्र स्वर से धीरे-धीरे छोड़ें उसके बाद श्वास को बाहर से रोके डेली कम से कम तीन बार करें।

सूर्यभेदी प्राणायाम से लाभ 

वात, कफ का समन होता है। पित्‍त बढ़ाता है पाचन शक्ति अच्छी होती है आलस शरीर से दूर होता है। सूर्यभेदी प्राणायाम ग्रीष्म काल में नहीं करना चाहिए। चंद्रभेदी प्राणायाम या सूर्यभेदी प्राणायाम यथाशक्ति अनुसार बिना कुंभक के भी किया जा सकता है। 

अनुलोम विलोम 

अनुलोम- विलोम प्राणायाम में स्वसन क्रिया को चंद्र स्वर और सूर्य स्वर मैं एक दूसरे के अनुलोम विलोम करते हैं। अनुलोम विलोम प्राणायाम का अभ्यास पद्मासन या सिद्धासन स्वास्तिक, आसन या अन्य किसी भी आसन जिस में स्थिरता पूर्वक सुख से बैठ सकें किया जा सकता है।

प्रेक्षा ध्यान 

प्रेक्षा ध्यान पद्मासन, सुखासन, स्वास्तिक आसन किसी एक आसन में बैठकर किया जाता है। शांत भाव से अपने शरीर को देखना आंखें बंद करके मन के भाव की आवृत्ति से शरीर के अंदर बाहर  प्रत्येक अंगों का अनुभव करना उन अंगों में उत्पन्न विजातीय तत्व को मन के निर्देशानुसार बाहर निकालना चित को केंद्रित करते हुए शरीर में सुप्त चैतन्य केंद्रों को प्रेक्षा ध्यान के द्वारा जागृत करना है।

शरीर में 13 होते हैं प्रेक्षा केंद्र 

शक्ति केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, तेजस केंद्र, आनंद केंद्र, ब्रह्मा केंद्र, प्राण केंद्र, अप्रमाद केंद्र,चाछूश केंद्र, दर्शन केंद्र, ज्योति केंद्र, शांति केंद्र, ज्ञान केंद्र इन सभी केंद्रों पर ध्यान करते हुए मन की यात्रा कराएं एवं इन केंद्रों में जो विजातीय तत्व हो उनको बाहर निकालने के लिए चित्त की यात्रा में मन से निर्देशन करें। वहां पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करें। उसके बाद धीरे-धीरे चित् की यात्रा से प्रेक्षा ध्यान करते हुए वापस आए।

प्रेक्षा ध्यान से होने वाले लाभ 

मन की एकाग्रता बढ़ती है। मन शांत होता है शरीर के अंदर से विजातीय तत्व बाहर निकल जाते हैं और शरीर के अंदर आणविक शक्तियों का संचरण होता है जिसके कारण शरीर में सभी कोशिकां सक्रिय होती हैं। इसको करने से धीरे-धीरे निष्क्रिय कोशिका भी सक्रिय होने लगती है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। जो कोरोना से संक्रमित रोगी को पॉजिटिव एनर्जी की ओर ले जाता है। इससे शरीर से आलस्य प्रमाद दूर होता है शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता  बढ़ती है बीपी, शुगर, थायराइड, अनिद्रा के रोगियों के लिए काफी लाभ होता है।

बोले विशेषज्ञ

कोरोना संक्रमण से बचने का एकमात्र हल योगासन ही है। प्रतिदिन नियमित तौर पर योगासन करने से शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं में वृद्धि होती है। इससे जब हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है तो कोई वायरस या कीटाणु हमें संक्रमित नहीं कर पाता है। शरीर की रोगों से लड़ने वाली यह प्रणाली उसे स्वय खत्म कर देती है। इस तरह सिर्फ हम योग के माध्यम से कोरोना से लड़ाई जीत सकते हैं। दूसरी लहार उनके द्वारा बताये गए इस उपचार से अब तक सैकड़ो लोग स्वस्थ हो चुके है। -बब्बन तिवारी, योगाचार्य-दिव्य ज्योतिष एवं योग परामर्श केंद्र।

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