World Ethnic Day : राग जौनपुरी को संजो रही पंडित राम अचरज मिश्र की पांचवीं पीढ़ी

शास्त्रीय संगीत की दुनिया में छोटा ख्याल के रूप में प्रतिष्ठित राग जौनपुरी की ईजाद 15वीं सदी में महान संगीतज्ञ सुल्तान हुसैन शाह शर्की ने किया था। इसके बाद जौनपुर के पंडित राम अचरज मिश्र ने इसे शोहरत दिलाई।

Saurabh ChakravartySat, 19 Jun 2021 08:30 AM (IST)
जौनपुर के रासमंडल स्थित घर पर परिवार संग संगीत का अभ्यास करते सूर्य प्रताप बल्ला गुरु (बीच मे ) ।

जौनपुर, [आनंद स्वरूप चतुर्वेदी]। शास्त्रीय संगीत की दुनिया में छोटा ख्याल के रूप में प्रतिष्ठित राग जौनपुरी की ईजाद 15वीं सदी में महान संगीतज्ञ सुल्तान हुसैन शाह शर्की ने किया था। इसके बाद जौनपुर के पंडित राम अचरज मिश्र ने इसे शोहरत दिलाई। आज मिश्र परिवार की पांचवीं पीढ़ी इसे संजोए हुए आगे बढ़ा रही है।

19वीं सदी में अयोध्या के राजा ददुआ साहब के दरबार में गायक व सर्वश्रेष्ठ सारंगी वादक रहे पंडित राम अचरज मिश्र के परिवार के सदस्य संगीत व गायन में निपुण हैं। इनकी पांचवीं पीढ़ी शिराजे हिंद की पहचान राग जौनपुरी को संजोने में जुटी है। नगर के मोहल्ला रासमंडल में रह रहे परिवार के कई सदस्यों को जनपद व प्रदेश स्तर पर पुरस्कृत भी किया जा चुका है।

पं. मिश्र के पौत्र तिलकधारी महाविद्यालय में संगीत विभाग के अध्यक्ष रहे पं. रामप्रताप मिश्र सहज ने इस राग को ख्याति दिलाई। उन्होंने छोटे-बड़े सभी रागों में गाई जाने वाली लगभग 400 से अधिक बंदिशों की स्वरबद्ध एवं लयबद्ध रचना की, जो सहज रागावली नामक पुस्तक में लिपिबद्ध है। इस राग के गाने का सही समय दिन का दूसरा पहर माना गया है।

इस तरह छेड़ा जाता है राग जौनपुरी का तराना 

रोको ना मोरी श्याम डगरिया रोको ना... सा रे म प ध नि सा...। इसी राग में गाया गया कर्णप्रिय फिल्मी गीत 'मेरी याद में तू ना आंसू बहाना.., 'परदेसियों से ना अंखियां मिलाना... और 'जिएं तो जिएं कैसे, बिन आपके... राग जौनपुरी के उदाहरण हैं। मिश्र परिवार की चौथी पीढ़ी के संगीतकार सूर्य प्रकाश मिश्र बल्ला गुरु ने बताया कि आसावरी थाट से उपजे इस छोटे ख्याल राग जौनपुरी की जाति षाडव संपूर्ण है। इसमें म प ध म प ग रे म प की संगत बार-बार दिखाई जाती है।

...और राम प्रताप मिश्र ने लूटी महफिल 

राग जौनपुरी को वर्तमान में संगीत की दुनिया में पं. राम प्रताप मिश्र ने परवान चढ़ाया था। उन्होंने अंतिम बार शाही किले में लगभग 10 वर्ष पूर्व आयोजित 'जौनपुर विरासत कार्यक्रम में इसकी प्रस्तुति कर महफिल लूटी थी। तबले पर संगत सुपुत्र सूर्य प्रकाश मिश्र बल्ला गुरु ने की थी।

देशभर में संगीत की शिक्षा दे रहे परिवार के सदस्य 

पं. मिश्र के परिवार की पांच पीढिय़ां देशभर में संगीत की लहर बहा रही हैं। पंडित रामप्रताप मिश्र की शिष्य परंपरा में इनके पुत्र अंजनी कुमार मिश्र, पवन कुमार मिश्र संगीत का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। तीसरे पुत्र पंडित सत्य प्रकाश मिश्र सहज मेरठ तो सबसे छोटे पुत्र पंडित सूर्य प्रकाश मिश्र बल्ला गुरु जाने-माने तबला वादक व गायक हैं। परिवार की पांचवीं पीढ़ी में पंडित अभिषेक मिश्र सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ में संगीत के शिक्षक हैं तो प्रवीण कुमार कोयंबटूर में संगीत शिक्षक हैं। दीपक मिश्र गायन व युवराज वादन में योगदान दे रहे हैं, जबकि विवेक मिश्र, ज्ञान प्रकाश मिश्र, पुष्कर, वेद प्रकाश मिश्र संगीत के गुर सीख रहे हैं।

युवा कलाकार इससे जुड़ें और इसे आगे बढ़ाएं 

सूर्य प्रकाश मिश्र बल्ला गुरु ने बताया कि राग जौनपुरी हमारे जौनपुर की थाती है। इसे पूर्वजों ने हम तक पहुंचाया है जिसे हम युवा पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं। यह इसलिए भी आवश्यक है कि आज सबका रुझान एक ही परिपाटी वाले पाश्र्व गायन की ओर होता जा रहा है जिससे इन रागों को खतरा है। हमारा प्रयास है कि युवा कलाकार इससे जुड़ें और इसे आगे बढ़ाएं। ताकि यह जीवंत रहे। जब भी हमें आयोजनों में अवसर मिलता है इस राग पर आधारित गायन करते हैं और सुनने वालों को इसके इतिहास और विशेषता से अवगत कराते हैं।

खुसरो के काल ख्याल की अगली कड़ी है हुसैन ख्याल 

शर्की शासकों ने जौनपुर को अपने राज्य की राजधानी बनाई थी। शर्की साम्राज्य के अंतिम सुल्तान सुल्तान हुसेन शाह शर्की साहित्य और संगीत प्रेमी थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक राग दर्पण में संगीत के साथ नायकों का उल्लेख किया। ख्याल और ठुमरी में अंतर यह है कि ख्याल में विप्रलंब श्रंृगार होता है, जबकि ठुमरी में सहयोग श्रंृगार। हुसैन ख्याल, खुसरो के काल ख्याल की अगली कड़ी मानी जाती है। इसी को देखते हुए उन्होंने राग जौनपुरी का इजाद किया।

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