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गुजरात के लिए श्रमिक फिर से होने लगे रवाना, अहमदाबाद और सूरत की ट्रेनें 30 जुलाई तक पैक

गुजरात के लिए श्रमिक फिर से होने लगे रवाना, अहमदाबाद और सूरत की ट्रेनें 30 जुलाई तक पैक
Publish Date:Sat, 04 Jul 2020 09:40 AM (IST) Author: Saurabh Chakravarty

वाराणसी, जेएनएन। घर लौटने के बाद जरूरत के हिसाब से रोजगार के कम अवसर ने एक बार फिर प्रवासियों को अपने पुराने कर्मभूमि को बढऩे के लिए प्रेरित कर दिया है। खासकर गुजरात में काम करने के लिए घर आए श्रमिकों का पलट प्रवाह शुरू हो गया है। अहमदाबाद, सूरज जैसे महानगरों में जाने वाली ट्रेनें फुल हो गई हैं। ताप्तीगंगा एक्सप्रेस तो 30 जुलाई तक पैक हो गई है। 

जीवन बचाने की जंग में हर किसी के आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हो गई है। घर में सुकून तो है लेकिन कोई सहारा नहीं मिला। कुछ दिन पहले घर लौटे प्रवासी कमाने का जरिया तलाशने फिर से महानगरों की तरफ रुख करने लगे हैं। कैंट स्टेशन से गुजरने वाली अहमदाबाद और सूरत जाने वाली ट्रेनों में सबसे ज्यादा दबाव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर कुछ दिनों पहले लॉकडाउन के चलते महानगरों में फंसे कामगारों की घर वापसी हुई थी। इस दौरान मुंबई, दिल्ली, सूरत, अहमदाबाद सहित महानगरों से श्रमिक स्पेशल ट्रेन के जरिए वापस लाया गया था।

समस्तीपुर (बिहार) के मो. शकील ने बताया कि 24 अप्रैल को घर आया था। यहां भी कोरोना वायरस का भय बना हुआ है। सूरत स्थित फैक्टरी में भोजन के साथ पैसा भी मिलता था। मालिक ने बढ़े हुए मानदेय पर वापस बुलाया है। बरौनी (बिहार) के मुन्नी लाल ने बताया कि गुजरात में फैक्टरी खुल रही है। वहां जल्दी ही सब पहले जैसा हो जाएगा। घर पर बैठे रहने से कुछ नहीं मिलेगा। ग्राम पंचायत और सरकार की तरफ से श्रमिकों के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पश्चिम बंगाल के रमेश चंद्र ने बताया कि अम्बाला में साइट चल रही है। वहां मजदूरों को पहले से ज्यादा सहूलियत मिल रही है। पहले 15 हजार रुपये मिलता था। अब वहां मजदूरों को 18 हजार रुपये देने की पेशकश की जा रही है।

मुंबई जाने वाली ट्रेनें भी खाली नहीं

गुजरात की ट्रेनों में सबसे ज्यादा दबाव है। आलम ये है कि छपरा से चलकर सूरत जाने वाली ताप्तीगंगा स्पेशल ट्रेन 30 जुलाई तक पूरी तरह से पैक है। वहीं, कैंट स्टेशन से बनकर चलने वाली साबरमती स्पेशल ट्रेन में 8 जुलाई तक कंफर्म बर्थ मिलने की संभावना नहीं दिख रही। हालांकि इसका असर मुंबई रूट की कामायनी एक्सप्रेस और महानगरी एक्सप्रेस पर भी दिख रहा है।

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