वाराणसी विकास प्राधिकरण की फाइलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का कार्य सिर्फ कागजों तक ही

कुंड व तालाब जैसे जल स्रोत को पाटकर बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बन रही हैं जिसमें हमारा कल दबता जा रहा है। वाराणसी विकास प्राधिकरण की फाइलों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा हुआ है और कागजों में ही जल संरक्षण हो रहा है।

Saurabh ChakravartySun, 20 Jun 2021 07:38 PM (IST)
रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा हुआ है और कागजों में ही जल संरक्षण हो रहा है।

वाराणसी, जेएनएन। जिल जिले में गंगा समेत आधा दर्जन नदियां बहती हैं। आध्यात्मिक शहर होने के कारण यहां पर पौराणिक कुंड व प्राचीन झील भी जलस्रोत के लिहाज से समृद्ध होने की गवाही देता है। इसके बाद भी इस जिले का भूगर्भ जल स्तर गिरता ही जा रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि हरहुआ व आराजी लाइन ब्लाक के बाद पिंडरा ब्लाक भी डार्क जोन की ओर बढ़ चला है। यह इसलिए हुआ है कि भू्गर्भ जल दोहन के सापेक्ष हमारा संरक्षण कमजोर है। कुंड व तालाब जैसे जल स्रोत को पाटकर बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बन रही हैं जिसमें हमारा कल दबता जा रहा है। सरकारी नियम भी अनदेखी व धांधली के चलते बेअसर है। हालात ऐसे हैं कि वाराणसी विकास प्राधिकरण की फाइलों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा हुआ है और कागजों में ही जल संरक्षण हो रहा है।

शहर के एक छोर से दूसरे तक में हो रहे निर्माण की बात करें तो साफ नजर में आएगा कि एक हजार से अधिक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बन रही है। हालांकि, इसका सटीक आंकड़ा विकास प्राधिकरण के पास नहीं है लेकिन अब तक 142 मल्टी स्टोरी भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इस हकीकत में भी तमाम आशंका भरी हुई है। शिवपुर पुरानी चुंगी के पास निजी मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स हैं। इसमें अधिकतर बिना रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के हैं। खास यह कि वीडीए से प्रमाणित भवन बताकर बिक्री भी हो गई है। हां, यह जरूर है कि इसमें कई ऐसे मल्टी स्टोरी बिल्डिंग्स हैं जो दूसरों के लिए नजीर भी बनी हैं। महाबीर मंदिर स्थित महाबीर ग्रेंस में बेहतरीन सिस्टम लगाया गया है। ऐसे ही खजूरी में बने शक्ति साइन बिल्डिंग की तारीफ तो बीएचयू आइटी के तकनीकी विशेषज्ञ भी कर चुके हैं। विकास प्राधिकरण का दावा है कि ऐसे करीब 142 मल्टी स्टोरी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। ऐसे ही सूर्या होटल समेत कुछ होटलों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। हालांकि, भूगर्भ जल दोहन के सापेक्ष संरक्षण बेहद कम है। इसको लेकर सभी को चिंता करने की जरूरत है।

वीडीए जमा कराता है एक लाख तक गारंटी मनी

नियमानुसार तीन हजार वर्ग मीटर में बनने वाले भवनों के लिए जब नक्शा स्वीकृति के लिए दस्तावेज दिए जाते हैं तो विकास प्राधिकरण की शर्तों के अनुसार एक लाख रुपये तक गारंटी मनी के तौर पर जमा कराया जाता है। इसके बाद ही आवेदक को नक्शा उपलब्ध होता है। इसके बाद जब पूर्णता प्रमाण पत्र लेना होता है तो वीडीए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जांच कर रिपोर्ट संलग्न करता है तो प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इसके साथ ही गारंटी मनी भी वापस की जाती है।

...तो वीडीए बनवाएगा सिस्टम, लगाएगा जुर्माना भी

यदि वीडीए की शर्तों का उल्लंघन बिल्डर्स करता है ताे प्राधिकरण की आेर से उस बिल्डिंग में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए कवायद की जाएगी। इसके साथ ही संबंधित बिल्डर्स पर शर्त उल्लंघन को लेकर जर्माने की कार्रवाई भी की जाएगी। हां, यह भी है कि पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं लेने वालों का नक्शा निरस्त भी हो सकता है।

ब्लाकों में 2020 का भूजल स्तर

आराजी लाइन 11.29-17.23

पिंडरा 12.40-16.40

हरहुआ 11.40-15.43

काशी विद्यापीठ काशी 10.36-14.15

बड़ागांव 9.22-11.44

चिरईगांव 8.85-12.04

सेवापुरी 8.82-12.84

चोलापुर 6.78-9.62

(नोट : भूगर्भ जल विभाग के ये आंकड़े मीटर में हैं और भूजल के पहले स्तर को दर्शाते हैं।)

 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगवाया है तो विभागीय कार्यवाही की जाएगी

निमयों के अनुसार मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की बाध्यता है। नियम को लेकर सख्ती की जाएगी। जिन भवन स्वामियों ने अब तक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगवाया है तो विभागीय कार्यवाही की जाएगी।

- ईशा दुहन, उपाध्यक्ष वीडीए

 

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