बीएचयू में तैयार 50 पीपीएम जिंक वाली गेहूं की प्रजाति देश को समर्पित, 2018 से 50 केंद्रों पर उपज परीक्षण

कृषि विज्ञान संस्थान बीएचयू मेें विकसित गेहूं की प्रजाति मालवीय 838 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 सितंबर को देश के लिए समर्पित कर दिया। इसमें 50 पीपीएम (पाट्र्स प्रति मिलियन) जिंक 40 से 45 पीपीएम आयरन व 11 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया गया है।

Saurabh ChakravartyFri, 15 Oct 2021 04:20 PM (IST)
बीएचयू मेें विकसित गेहूं की प्रजाति मालवीय 838 प्रधानमंत्री ने 28 सितंबर को देश के लिए समर्पित कर दिया।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू मेें विकसित गेहूं की प्रजाति मालवीय 838 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 सितंबर को देश के लिए समर्पित कर दिया। इसमें 50 पीपीएम (पाट्र्स प्रति मिलियन) जिंक, 40 से 45 पीपीएम आयरन व 11 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया गया है। पाट्र्स प्रति मिलियन (पीपीएम) पदार्थों के बहुत पतला सांद्रता व्यक्त करने का एक तरीका है। वर्ष 2014 में विकसित इस प्रजाति पर चार साल तक भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान-करनाल में अध्ययन हुआ। इसके साथ ही वाराणसी, रांची, लुधियाना, हिसार, समस्तीपुर, अयोध्या, कानपुर, मेरठ, नई दिल्ली, जबलपुर, करनाल, इंदौर, मोहन नगर, कुंच बिहार, जोरहट सहित देश के 50 कृषि विश्वविद्यालयों, केंद्रों पर उपज का परीक्षण चला। इसका परिणाम यह आया कि कम पानी में भी इस प्रजाति का प्रति हेक्टेयर उत्पादन सामान्य गेहूं से ज्यादा है।

बांग्लादेश में गेंहू की बीमारी ब्लास्ट को भी रोकने में कारगर

-मालवीय 838 को विकसित करने वाले कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू स्थित प्लांट एंड जेनेटिक्स विभाग के आचार्य व डीन प्रो. वीके मिश्र बताते हैं कि बांग्लादेश में एक बीमारी ब्लास्ट के कारण गेहूं का उत्पादान बहुत कम हो गया है । पड़ोसी देश होने के कारण इस बीमारी के भारत में भी आने की बहुत अाशंका है, क्योंकि यह बीमारी हवा के द्वारा फैलती है। हालांकि एक राहत की बात है कि मालवीय 838 में इस ब्लास्ट बीमारी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यह पूर्ण रूप से रोधी प्रजाति है । ऐसे में बांग्लादेश से सटे भारत के राज्यों में इस प्रजाति को उगाया जाए तो हम इस बीमारी को भारत में आने को रोक सकते हैं।

ज्यादा काटें योजना के तहत हुआ कार्य

-प्रो. मिश्र बताते हैं कि जिंक से ही शरीर में करीब 200 पोषक तत्व बनते हैं। जिंक मानसिक व शारीरिक विकास में भी सहायक होता है। बताया कि जिंक की कमी से बच्चों में डायरिया, हैजा आदि की समस्या बढ़ती है। ऐसे में अगर शरीर में जिंक की कमी है तो यह गेंहू इसकी पूर्ति कर सकता है। प्रो. मिश्र ने हार्वेस्ट प्लस (ज्यादा काटें) योजना के तहत इस प्रजाति पर वर्ष 2014 में काम शुरू किया था। बताया कि इस प्रजाति में 45 से 50 पीपीएम तक जिंक की मात्रा है, जबकि सामान्य गेहूं में जिंक की मात्रा 25 से 30 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) व आयरन की मात्रा 30-35 पीपीएम होती है।

मैक्सिको का लिया गया सहयोग

प्रो. मिश्र ने बताया कि उपज में कोई समझौता नहीं किया गया है। परीक्षण के दौरान किसानों ने इस नई प्रजाति से करीब 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक उपज अर्जित की है। बताया कि अंतरराष्ट्रीय गेहूं एवं मक्का अनुसंधान संस्थान (मैक्सिको) के सहयोग से देश के विभिन्न संस्थानों में जिंक युक्त इस की खोज कर प्रशिक्षण किया गया।

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