कल-कारखानों में आज पूजे जाएंगे शिल्पकलाधिपति विश्वकर्मा, व्यापार वृद्धि के लिए कामना करेंगे व्यापारी

कल-कारखानों में आज पूजे जाएंगे शिल्पकलाधिपति विश्वकर्मा, व्यापार वृद्धि के लिए कामना करेंगे व्यापारी

शिल्पकलाधिपति और तकनीकी व विज्ञान के जनक भगवान विश्वकर्मा की पूजा 17 सितंबर को कल-कारखानों में की जाती है।

Saurabh ChakravartyWed, 16 Sep 2020 08:48 PM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। शिल्पकलाधिपति और तकनीकी व विज्ञान के जनक भगवान विश्वकर्मा की पूजा 17 सितंबर को कल-कारखानों में की जाती है। 33 कोटि देवताओं में सनातनी धर्म के लोग भगवान विश्वकर्मा को निर्माण एवं सृजन का देवता मानते हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि लंकाधिपति रावण की स्वर्ण की लंका और महाभारत काल में वह तालाब जिसमें पानी दिखे तो वह जमीन और जमीन दिखे तो पानी इस ढंग के तालाब का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। सभी कल-कारखानों और उद्योग के साथ ही लोहा-लक्कड़ का व्यापार करने वाले व्यापारिगण 17 सितंबर को अपने प्रतिष्ठान में भगवान विश्वकर्मा का पंचोपचार विधि से पूजन करते हैं। व्यापारिगण कारखानों के सभी औजारों को रखकर पूजा करते हैं, और एक वर्ष तक अपने व्यापार में लाभ के लिए भगवान विश्वकर्मा से कामना करते हैं।

पूजन विधिः ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार भगवान विश्वकर्मा की पूजा के दिन कल-कारखानों की अच्छी तरह साफ-सफाई करने के बाद कारखाने के सभी औजार और यंत्र का विधि-विधान से पूजा करना चाहिए। भगवान विश्वकर्मा को फल, फूल, मिष्ठान और कच्चा चना चढ़ाएं। इसके बाद शास्त्र में वर्णित भगवान की कथा का श्रवण कारखाने के व्यापारी के साथ ही सभी कर्मचारियों को भी करना चाहिए। भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में वृद्धि होती है। 

दुनिया के पहले इंजीनियर है विश्वकर्मा

शास्त्रों की माने तो विश्वकर्मा वास्तुदेव के पुत्र हैं। जिन्होंने सृष्टि में कई चीजें बनाई हैं। माना जाता है कि पांडवों के इंद्रप्रस्त में मौजूद माया सभा भी भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाई थी। रावण के सोने की लंका को भी बनाने वाले विश्वकर्मा ही थे। इस तरह उन्होंने कई दर्लभ चीजों का निर्माण किया किया। जिससे उन्हें दुनिया का पहला इंजीनियर कहा जाता है।

17 सितंबर को ही होती है विश्वकर्मा पूजा

भगवान विश्वकर्मा की जयंती को लेकर कुछ मान्यताएं हैं। कुछ ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा  का जन्म आश्विन कृष्णपक्ष का प्रतिपदा तिथि को हुआ था। वहीं कुछ लोगों का मनाना है कि भाद्रपद की अंतिम तिथि को भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। वैसे विश्वकर्मा पूजा सूर्य के पारगमन के आधार पर तय किया जाता है। भारत में कोई भी तीज व्रत और त्योहारों का निर्धारण चंद्र कैलेंडर के मुताबिक किया जाता है लेकिन विश्वकर्मा पूजा की तिथि सूर्य को देखकर की जाती है। जिसके चलते हर साल विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को आती है।

   

 

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