वाराणसी में जेम पोर्टल पर विक्रेता अनिवार्य रूप से कराएं अपना पंजीकरण, मिलेंगे तमाम ऑनलाइन लाभ

सामानों की खरीद-फरोख्त के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म जेम ( गवर्नमेंट ई - मार्केट प्लेस ) की व्यवस्था की है। इसके तहत शासकीय एवं उनके अधीनस्थ संस्थाओं में उपयोगार्थ सामग्री व सेवाओं के क्रय के लिए जिले के बायर और सेलर का जेम पोर्टल पर पंजीकरण कराना जरूरी है।

Abhishek SharmaTue, 30 Nov 2021 10:33 AM (IST)
सामानों की खरीद-फरोख्त के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म जेम ( गवर्नमेंट ई - मार्केट प्लेस ) की व्यवस्था की है।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। केंद्र सरकार ने सामानों की खरीद-फरोख्त के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म जेम ( गवर्नमेंट ई - मार्केट प्लेस ) की व्यवस्था की है । इसके तहत शासकीय एवं उनके अधीनस्थ संस्थाओं में उपयोगार्थ सामग्री व सेवाओं के क्रय के लिए जिले के बायर और सेलर का जेम पोर्टल पर पंजीकरण कराना जरूरी है। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति इसको क्रियान्वित करा रही है। जिले के सभी विक्रेता संस्थाओं को चिह्नित कर उनको जेम पर अधिकाधिक पंजीयन कराने की जिम्मेदारी वाणिज्य कर विभाग को सौंपा गया है। विभाग के समस्त खंड के कर निर्धारण अधिकारियों को अपने-अपने अधिक्षेत्र के विक्रेता व्यापारियों को यथापेक्षित परीक्षण कराकर जेम पोर्टल पर पंजीकरण कराने की जिम्मेदारी दी गयी है। ताकि जेम पोर्टल पर गुणवत्तापूर्ण सामग्री एवं सेवाओं की उपलब्धता उचित मूल्य पर सुनिश्चित हो सके। विभागीय सूत्रों की मानें तो जेम पोर्टल पर अधिकांश व्यापारियों का पंजीकरण लगभग पूरा हो चुका है। जिन व्यापारियों ने अभी तक पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया है, इसके लिए उनको प्रेरित किया जा रहा है।

कपड़ा और जूता उद्योग पर बढ़ी जीएसटी : कृषि के बाद कपड़ा उद्योग को भारतीय अर्थव्यवस्था का रीढ़ माना जाता है। अभी तक इस उद्योग पर पांच फीसद जीएसटी कर के रूप में लिया जाता है। केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने इसमें संशोधन करते हुए एक जनवरी 2022 से कपड़ा और जूता उद्योग पर सात फीसद जीएसटी बढ़ाकर 12 फीसद कर दिया है। इसके लिए सरकार ने सूचना जारी कर दिया है। इससे उत्पादक और कारीगर चिंतित हैं। कोरोना महामारी की मार से अभी यह उद्योग उबरा नहीं कि सरकार ने जीएसटी की दर बढ़ाकर उद्योग को एक बार फिर से संकट में डाल दिया है। अभी तक कच्चा माल (धागा) पर 12 फीसद और तैयार माल (साड़ी, दुपट्टा, कपड़े की थान) पर पांच फीसद जीएसटी लगता है। इस प्रक्रिया के तहत उत्पादक और कारीगर को कर का भुगतान नहीं करना पड़ता है। जो भी देय कर होता है वह कच्चे माल की आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) से समायोजित हो जाता है। अब नए नियम के अनुसार कच्चे माल से तैयार माल पर 12 फीसद की दर से कर लगाया जाएगा। जिसमें अब उत्पादक और कारीगर को भी कर जमा करना होना। इससे वह चिंतित हैं। व्यापारियों का कहना है कि कपड़ा उद्योग पूर्णरूप से उधारी पर आधारित है। यह उधारी तीन से 18 माह की होती है। ऐसे में उत्पादक और कारीगर को सात फीसद का अतिरिक्त कर जेब से सरकार को देना होगा। सीए फैजानुल्लाह ने कर की गणित को समझाते हुए बताया कि इसमें उत्पादक और कारीगर को सात फीसद अतिरिक्त कर देना होगा।

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