कोरोना में कच्चा आम फायदेमंद संबंधी मेल पर वाराणसी पुलिस ने दी सफाई, पूर्व आइपीएस अधिकारी ने किए थे सवाल

बनारस के एसपी का दावा है कि कोरोना के इलाज में छिलका सहित कच्चा आम बहुत लाभप्रद है।

कोरोना महामारी के बीच इससे बचने के तमाम उपाय वायरल हो रहे हैं। इसी तरह का एक उपाय जिले के एसपी के नाम से वायरल हुआ है। इस उपाय को पूर्व आइपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने भी ट्वीट करते हुए स्थानीय पुलिस पर सवाल खड़ा किया।

Saurabh ChakravartyWed, 12 May 2021 06:10 AM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। कोरोना महामारी के बीच इससे बचने के तमाम उपाय वायरल हो रहे हैं। इसी तरह का एक उपाय जिले के एसपी के नाम से वायरल हुआ है। इस उपाय को पूर्व आइपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने भी ट्वीट करते हुए स्थानीय पुलिस पर सवाल खड़ा किया। अमिताभ ठाकुर ने दावा किया कि बनारस के एसपी द्वारा कोरोना की दवाई बताई गई है। इसमें उन्होंने कहा है कि छिलका सहित कच्चा आम बहुत लाभप्रद है। अमिताभ ठाकुर का ट्वीट वायरल हुआ तो पुलिस भी सामने आ गई। अमिताभ ठाकुर के दावे और वायरल पत्र पर वाराणसी पुलिस ने भी सफाई दी है।

दरअसल, अमिताभ ठाकुर ने अपने ट्विटर एकाउंट पर यह लिखा कि बनारस के एसपी का दावा है कि कोरोना के इलाज में छिलका सहित कच्चा आम बहुत लाभप्रद है। इसके बाद उन्होंने लिखा ईश्वर जाने कितना सही कितना गलत, यह अवश्य है कि कोरोना ने हम सभी को डॉक्टर बना दिया है। इस पोस्ट के साथ ही उन्होंने एक पत्र भी चस्पा किया था।

पता चला कि जिले की पुलिस के ई-मेल अकाउंट पर vinkay india नाम से चार मई को एक मेल आया था। इसमें प्रार्थना पत्र देने वाले ने वाराणसी पुलिस अधिकारियों के लिए यह संदेश दिया है कि कोरोना काल में छिलका सहित कच्चा आम बहुत लाभप्रद है। ई-मेल पर प्राप्त हर प्रार्थना पत्रों की तरह इस पत्र को भी पुलिस टीम द्वारा प्रिंट निकाला गया और एसपी को इसे भेजा गया ताकि प्रार्थना पत्र को गंभीरता कायम रहे।

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि vinkay.india @ gmail.com से hello2dna @ gmail.com को मेल किया गया और उसी मेल को sspvns-up @ nic.in को भी किया गया था। जिले में नियुक्त किसी भी एसपी ने यह दावा नहीं किया है कि कच्चा आम छिलके समेत खाने से कोरोना का इलाज हो सकता है। यह दावा दिल्ली के एक व्यक्ति जिनका नाम वीके सिंह और मोबाइल नम्बर 9560757331 का है।

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि हम ई-मेल पर आए सभी प्रार्थना पत्रों को देखते हैं ताकि जनता का विश्वास बना रहे। बिना पढ़े हमें कैसे मालूम पड़ेगा कि पीडि़त व्यक्ति या प्रार्थना देने वाले ने क्या लिखा है। वो अपनी परेशानी बता रहा है या हमें संदेश दे रहा है। उन्होंने बताया कि इस प्रार्थना पत्र को भी हमने पढ़ा, लेकिन अब तो ये भेजने वाले कि समझ की बात है कि वो हमें क्या भेजता है। पुलिस टीम या एसपी बनारस द्वारा ऐसा कोई भी दावा नहीं किया गया है।

 

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