वाराणसी नगर निगम : सदन में हंगामा, तोड़ा माइक व डेस्क, हवा में उड़ा दी गई प्रस्तावों की फाइल

लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार को आहुत हुई नगर निगम सदन की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी दलों के पार्षदों ने सदन की गरिमा तार-तार कर दी। माइक व डेस्क तोड़ दिया। लंच पैकेट भी फेंक दिया। चर्चा के लिए बने प्रस्तावों की फाइलें हवा में उड़ा दी गईं।

Saurabh ChakravartyFri, 24 Sep 2021 08:33 PM (IST)
मैदागिन स्थित टाउन हाल सभागार में चल रहे मिनी सदन बैठक में धरना प्रदर्शन करते पार्षद ।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार को आहुत हुई नगर निगम सदन की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी दलों के पार्षदों ने सदन की गरिमा तार-तार कर दी। माइक व डेस्क तोड़ दिया। लंच पैकेट भी फेंक दिया। चर्चा के लिए बने प्रस्तावों की फाइलें हवा में उड़ा दी गईं। यही नहीं, महापौर मृदुला जायसवाल व नगर निगम के अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। सरकार का एजेंट तक बताया। इतने पर भी रुके। भरी सदन में अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचकर मुर्दाबाद के नारे लगाए।

सदन की गरिमा के साथ खिलवाड़ होता देखकर महापौर की आंखों से आंसू निकल आए। इसके बाद भी सदन को चलाने की मंशा से कार्यवाही उन्होंने नहीं रोकी और चर्चा को आगे बढ़ाया लेकिन विपक्ष चलने नहीं दिया। अंत में महापौर को अनिश्चितकाल के लिए सदन को स्थगित करना पड़ा। दोपहर 12 बजे से शुरू हुई सदन की बैठक में शाम चार बजे तक एक भी प्रस्ताव पर स्वीकृति की मुहर नहीं लग सकी।

हंगामा का मन बनाकर आए थे सदस्य

सदन के प्रारंभ से ही जो हंगामा का माहौल बना वह शाम चार बजे तक थमा नहीं। ऐसा मालूम हुआ कि पहले से ही हंगामा का मन बनाकर सदस्य सदन में आए थे। शुरुआत रविवार को नगर में सफाई व्यवस्था को लेकर हुई। पार्षद भैया लाल मसला उठाया तो महापौर ने प्रस्ताव से इतर चर्चा नहीं करने का आग्रह किया लेकिन वे नहीं माने। इस पर नगर आयुक्त प्रणय सिंह ने जवाब दिया। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. एनपी सिंह के हवाले से जानकारी दी कि मेन पावर व संसाधनों की कमी ने रविवारीय सफाई व्यवस्था को शुरू होने नहीं दे रहा है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया कि वाराणसी संसदीय क्षेत्र अति विशिष्ट है, इसलिए यहां आए दिन वीवीआइपी का आगमन होता है जिसके परिपेक्ष्य में अभियान चलाकर सफाई होती है। इसके बाद भी पार्षद भैया लाल संतुष्ट नहीं हुए और बैनर शरीर में बांधकर सदन के गेट पर बैठ गए। बाद में उप सभापति नरसिंह दास समझाकर उनको सदन में लाए।

तंबाकू बिक्री लाइसेंस पहला प्रस्ताव

सदन में 91(1) के तहत सदन में तंबाकू बिक्री लाइसेंस का पहला प्रस्ताव लाया गया। इसको लेकर स्वस्थ चर्चा हुई। लाइसेंस शुल्क को लेकर कोई आपत्ति नहीं थी लेकिन जुर्माने की राशि अधिक होने पर नाराजगी जाहिर की गई। कांग्रेस पार्षद सीताराम केसरी ने केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार होने का हवाला देते हुए प्रदेश में तंबाकू बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया। इस पर उप सभापति नरसिंह दास ने पड़ोसी राज्य बिहार का हवाला देते हुए कहा कि ऐसा होने से मादक पदार्थों की तस्करी होने लगती है। अंत में अध्यक्ष ने सदस्यों के सुझावों को संकलित कर शासन तक भेजने का भरोसा दिया ताकि वहां से आए निर्देशों के क्रम में आगे की कार्यवाही हो सके।

राजनीति की भेंट चढ़ा शहीद द्वार

दूसरा प्रस्ताव शहीद विशाल पांडेय के नाम से मकबूल आलम रोड पर स्मृति द्वार व गली निर्माण था। यह प्रस्ताव पक्ष व विपक्ष पार्षदों की राजनीति में भेंट चढ़ गया। भाजपा पार्षद राजेश यादव चल्लू ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए जानकार मांगी कि क्या यह प्रस्ताव सही है। कहना था कि ऐसा हो सकता है तो पूर्व विधायक हरिश्चंद्र श्रीवास्तव हरीश जी समेत कई नामचीन हस्तियों के नाम से मोहल्ले में गेट व गली का नामकरण होना चाहिए। भाजपा पार्षद बृजेशचंद्र श्रीवास्तव ने लोकगीत गायक व पद्मश्री हीरालाल यादव का भी प्रस्ताव रखा। इस दरम्यान नगर निगम प्रशासन ने महापौर के माध्यम से स्पष्ट करना चाहा कि शहीद और नामचीन हस्तियों का मसला पृथक है लेकिन प्रशासनिक जवाब को लेकर विपक्षी पार्षद जायज-नाजायज सवालों को लेकर हमलावर हो गए। हंगामा होने लगा तो महापौर ने कुर्सी से खड़ी होकर शांत कराने की कोशिश की। तभी राजेश चल्लू ने महापौर के आगे प्रोसिडिंग की कार्यवाही लिख रहे कर्मियों का डेस्क पलट दिया। इस पर महापौर ने 15 मिनट के लिए सदन स्थगित कर दिया।

पार्षद ने पढ़ाया सर्वोच्चता का पाठ

ठीक 15 मिनट बाद जब सदन प्रारंभ हुआ तो निर्दल पार्षद अजीत सिंह ने महापौर की ओर से लिए गए सदन स्थगन के निर्णय पर गहरी आपत्ति की। नगर निगम अधिनियम का हवाला देते हुए सर्वोच्चता का पाठ पढ़ाया। कहा कि सदन में सदस्यों की सर्वसम्मति सर्वोच्च है। सदन स्थगन का निर्णय अध्यक्ष अपने स्तर से नहीं ले सकता है। यह बात महापौर को नागवार लगी। उन्होंने विनम्रता से जवाब देते हुए चुटकी ली। कहा कि समझ में आ रहा है कि चुनाव सिर पर आ गया है। फिलहाल, हंगामे के बीच शहीद के नाम से द्वार व गली निर्माण का प्रस्ताव विधिक राय लेने के निर्णय में उलझ कर फाइलों में फिर से चला गया।

तीसरा महत्वपूर्ण प्रस्ताव यूजर चार्ज

तीसरा प्रस्ताव जो नगर निगम की ओर से रखा गया वह घर-घर कूड़ा उठान के लिए यूजर चार्ज को लेकर था। प्रस्ताव को नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. एनपी सिंह ने सदन की पटल पर रखा। यूजर चार्ज के स्लैब को पढ़कर सुनाया। प्रस्ताव की प्रति पार्षदों के टेबल तक भेजी। इसको लेकर लंबी चर्चा हुई। स्लैब के दर व यूजर चार्ज की ईमानदारी से वसूली को लेकर सवाल उठे। हर सवालों का जवाब नगर आयुक्त व नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने स्पष्टता के साथ जवाब दिया। इस बीच कांग्रेस पार्षद सीताराम केसरी सफाई व्यवस्था की कमियों को इंगित करते हुए नगर स्वास्थ्य अधिकारी पर सदन की गरिमा से विपरित व्यक्तिगत टिप्पणी की जिसको लेकर कड़ी आपत्ति जताई गई। महापौर ने मध्यस्थता करते हुए व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करने का सदस्यों से आग्रह किया। लाख प्रयास के बाद भी प्रस्ताव पर सर्वसम्मति नहीं बनी। इस मसले पर शासन से निर्देश लेने का निर्णय हुआ।

लंच में ज्यादा बिगड़ी बात

नरसिंह दास ने यूजर चार्ज को जनहित में बताते हुए लंच के लिए महापौर से अनुमति मांगी। चूंकि, व्यक्तिगत टिप्पणी के बाद महापौर ने सदन से बिना चर्चा कराए नहीं उठने का संकल्प लिया था, इसलिए सदन से बाहर नहीं गईं। लंच के लिए सदन स्थगन का टाइम लाइन भी तय नहीं किया। हालांकि, पार्षदों ने सर्वसम्मति से लंच तक चर्चा स्थगित कर दी लेकिन यह बात लेखाधिकारी मनोज त्रिपाठी नहीं समझ सके। उन्होंने चौथा प्रस्ताव बांड का लाया जिसमें छह प्रोजेक्ट लेने की बात शुरू ही की थी तभी हवा में लंच पैकेट उड़ता हुआ दर्शक दीर्घा के पास गिरा। तेज आवाज में कांग्रेस पार्षद सीताराम केसरी गजरते नजर आए। कहा कि यह सदन का अपमान है। जब निर्णय हो गया कि लंच के बाद प्रस्ताव पढ़ा जाएगा जिस पर चर्चा होगी तो अफसर ने अवहेलना क्यों की। उन्होंने अफसरों पर दबंगई करने का आरोप भी मढ़ा। तभी निर्दल पार्षद अजीत सिंह भी उग्र हो गए। टेबल पर लगी माइक को नोंचकर फेंक दिया। सपा पार्षद प्रशांत सिंह पिंकू ने नगर निगम के प्रस्तावों की फाइल को हवा में उड़ा दिया। महापौर बिगड़ा तो महापौर व नगर आयुक्त ने मंत्रणा की जिसके बाद फिर से सदन में चर्चा प्रारंभ हुई।

तब सदन से निकले सभी अफसर

लंच बाद शुरू हुई चर्चा में पार्षद सीताराम केसरी ने लेखाधिकारी मनोज त्रिपाठी को सदन से बाहर जाने के लिए बात रखी। इस पर महापौर ने अधिनियम का हवाला देते हुए सदन में सिर्फ नगर आयुक्त के बैठे रहने की अनुमति देते हुए अन्य अफसरों को बाहर जाने का निर्देश दिया। अफसर भी सहकर्मी मनोज त्रिपाठी की संवेदना के साथ खड़े हो गए और बाहर निकल गए। इस पर भाजपा पार्षदों ने नाराजगी जाहिर की लेकिन महापौर ने जनहित को सर्वोपरि बताते हुए सदन में चर्चा कराने के संकल्प को दोहराया।

दिनेश का दाव, विपक्ष को पटखनी

आधे से अधिक सत्र में चर्चा के दौरान जहां विपक्षी पार्षद भारी पड़ रहे थे तो वहीं, भाजपा पार्षद दिनेश यादव के दाव ने उन्हें जबरदस्त पटखनी दी। नगर निकाय के इस उभरते युवा नेता ने सदन में सत्ता पक्ष की अधिक संख्या को भांप लिया था। खारिज हो रहे प्रस्तावों को स्वीकृति कराने के लिए बहुमत का दाव खेला और वोटिंग का फार्मूला अपनाने का अनुरोध महापौर से किया। विपक्षी पार्षदों को समझते देर नहीं लगी कि उनकी मौजूदगी में भी अब प्रस्ताव पास हो जाएंगे। चुनावी बयार में राजनीतिक लाभ के लिए हो रहे विरोध पर पानी फिर जाएगा। इसके बाद तो हंगामा चरम पर पहुंच गया। महापौर के मंच तक पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। जब हद से बाहर हंगामा बरपा तो महापौर ने चतुराई से अनिश्चितकाल के लिए सदन स्थगित करने की न सिर्फ घोषणा कर दी बल्कि राष्ट्रगान भी शुरू कर दिया।

जब महापौर ने व्यक्त किया आक्रोश

सदन में विपक्षी दलों के व्यवहार से व्यथित महापौर ने राष्ट्रगान के अंत में जबरदस्त आक्रोश व्यक्त किया। जय हो..., जय हो..., कोरस गाते वक्त हाथ हिलाकर विपक्षी पार्षदों को साफ संदेश दिया कि उनकी जनहित के आगे एक नहीं चलने दूंगी। हालांकि, विपक्ष ने महापौर के व्यक्त आक्रोश को राष्ट्रगान का अपमान बताया। इसका वीडियो फुटेज भी बनाया और वायरल कर दिया। पार्षद सुशील गुप्ता उर्फ योगी, श्याम आसरे मौर्य, शिव प्रकाश मौर्या आदि ने विपक्ष के आचरण की आलोचना की। वहीं, कांग्रेस पार्षद सीताराम केसरी ने कहा कि बहुत हो चुका सत्ता की हनक से डराने व धमकाने का काम। अब विपक्ष नहीं सकेगा। खुलकर विरोध करेगा। कहा कि सम्मान लेना है तो सम्मान देना होगा।

विपक्षी दलों के पार्षदों ने विरोध व हंगामा की रणनीति बनाकर आए थे 

विपक्षी दलों के पार्षदों ने विरोध व हंगामा की रणनीति बनाकर आए थे। उनकी मंशा के विपरीत सदन को चलाने की कोशिश हुई और चार घंटे तक चर्चा की गई लेकिन अफसोस विपक्षी दलों के असहयोग से जनहित के एक भी प्रस्ताव पास नहीं हो सके।

मृदुला जायसवाल, महापौर

 

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