Varanasi City Weather Update : बादलों के पीछे से मानो उमस की दस्‍तक, गलन का इंजतार बढ़ा

पूर्वांचल का मौसम हवाओं का रुख बदलने की वजह से बदल नहीं पा रहा है।

पूर्वांचल का मौसम हवाओं का रुख बदलने की वजह से बदल नहीं पा रहा है आसमान में बादलों की सक्रियता नहीं है लेकिन पुरवा के जोर की वजह से पछुआ का झोंका असर नहीं कर पा रहा है। इसकी वजह से ठंड का पर्याप्‍त असर नए बरस में नदारद है।

Abhishek sharmaSun, 10 Jan 2021 09:22 AM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। पूर्वांचल का मौसम हवाओं का रुख बदलने की वजह से बदल नहीं पा रहा है, आसमान में बादलों की सक्रियता नहीं है लेकिन पुरवा के जोर की वजह से पछुआ का झोंका असर नहीं कर पा रहा है। इसकी वजह से ठंड का पर्याप्‍त असर नए बरस में नदारद है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार बादलों की सक्रियता की वजह से मौसम का रुख बदला हुआ है। हालांकि, यूरोप से आने वाली बर्फीली हवाएं पहाड़ों पर लगातार बारिश और बर्फबारी करा रही हैं। इसकी वजह से पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश तक ठंड और गलन का असर है। जबकि दूसरी ओर मैदानी इलाकों तक बादलों के बाद गलन भी हवाएं नदारद होने से ठंड और गलन का पर्याप्‍त असर नहीं हो पा रहा है। 

रविवार की सुबह आसमान साफ रहा और हवा ठहरी रही। इसकी वजह से दिन शुरू होने के साथ ही ठंड का असर गुम रहा। आसमान में सूरज की रोशनी बिखरने के साथ ही गुनगुनी धूप का असर शुरू हुआ और वातावरण में मानो उमस असर करने लगा। ठंड का कहीं अता पता नहीं था और लगा मानो ठंड की विदायी हो चुकी है और गुलाबी जाड़े का दौर शुरू हो चुका है। नौ बजे के बाद धूप का असर और बढ़ा तो धूप में गर्म कपड़ा पहन कर निकलने वाले पसीना पसीना भी हुए। मौसम विज्ञानी मान रहे हैं कि मौसम का रुख आने वाले एक दो दिनों तक और रहेगा और पश्चिम से आने वाली ठंडी हवाओं का असर होने के बाद कोहरे और गलन का दौर दोबारा लौट आएगा। 

बीते चौबीस घंटों में अधिकतम तापमान 24.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्‍य से दो डिग्री अधिक रहा, न्‍यूनतम तापमान 15.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्‍य से सात डिग्री अधिक रहा। आर्द्रता इस दौरान अधिकतम 80 फीसद और न्‍यूनतम 61 फीसद दर्ज किया गया। जबकि बीते चौबीस घंटों में अंचलों के कुछ इलाकों में बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। मौसम विज्ञानियों के अनुसार आने वाले दिनों में मौसम का रुख बदलेगा तो कोहरे और गलन का दौर भी दोबारा लौट आएगा जो अभी राजस्‍थान के आसपास बना हुआ है। जबकि इसके बाद दूसरे पखवारे से दोबारा पश्चिमी विक्षोभ का असर होने से बादलों की सक्रियता पूर्वांचल तक हो सकती है। 

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