उत्‍तर प्रदेश का पहला आर्टीफिशियल ज्वेलरी क्लस्टर बलिया में, चिह्नित की गई पांच एकड़ जमीन

क्लस्टर स्थापित होने के बाद आर्टीफिशियल ज्वेलरी से जुड़े दूसरे जिलों के कारोबारी बलिया की ओर रुख करेंगे। वे यहां पर कच्चा माल देंगे यहां उसे तैयार किया जाएगा। उद्योग विभाग इसी हफ्ते कारोबार से जुड़े हुए लोगोें की बैठक बुलाने जा रहा है।

Abhishek SharmaWed, 13 Oct 2021 08:00 AM (IST)
संयुक्त आयुक्त उद्योग प्रोजेक्ट को अंतिम रुप दिया जाएगा।

बलिया, जागरण संवाददाता। बलिया की बिंदी ब्रांड है। इसे वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट में शामिल करते हुए राष्ट्रीय फलक पर चमकाने की कोशिश चल रही है। इसके अलावा जिले में ढाई सौ से अधिक छोटे कारोबारी आर्टीफिशियल ज्वेलरी (सोने-चांदी के आभूषण जैसा उत्पाद) के कारोबार से जुड़े हैं, लेकिन उन्हें उचित मंच नहीं मिलने से कारोबार बिखरा पड़ा है। औसतन 10 लाख का वार्षिक कारोबार है। इसके बाद भी उन्हें उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इसमें 10 फीसद लोग ऐसे हैं जो कच्चा माल मुंबई, राजकोट और बनारस से मंगाते हैं, उसे कुछ परिवारों में देकर बनवाते हैं। शहर के मीना बाजार में ही 200 से अधिक कारोबारी हैं।

प्रदेश सरकार अब ऐसे परिवारों को बड़ा मंच देने की तैयारी में है। उद्योग विभाग इस दिशा में कार्य शुरू कर चुका है। जिले में सूबे का पहला आर्टीफिशियल क्लस्टर विकसित करने की योजना है। बिंदी के अलावा आर्टीफिशियल ज्वेलरी का निर्माण होगा, साथ ही उत्पादों की पैकेजिंग व मार्केटिंग की जाएगी। इन कामों के लिए आधुनिक मशीनें भी लगाई जाएंगी। इसका प्रस्ताव बनाया जा रहा है। करीब 15 करोड़ खर्च होंगे, इसके लिए नेशनल हाईवे 31 पर रसड़ा तहसील क्षेत्र के माधोपुर में करीब पांच एकड़ भूखंड चिह्नित किया गया है। इसका खरीदा जाएगा। यहां दो से तीन हजार लोगों के लिए ज्वेलरी क्लस्टर विकसित होगा। परियोजना का पीपीपी मॉडल (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) पर संचालन होगा। प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

दूसरे जिलों के कारोबारी करेंगे भृगुनगरी का रुख : क्लस्टर स्थापित होने के बाद आर्टीफिशियल ज्वेलरी से जुड़े दूसरे जिलों के कारोबारी बलिया की ओर रुख करेंगे। वे यहां पर कच्चा माल देंगे, यहां उसे तैयार किया जाएगा। उद्योग विभाग इसी हफ्ते कारोबार से जुड़े हुए लोगोें की बैठक बुलाने जा रहा है। संयुक्त आयुक्त उद्योग प्रोजेक्ट को अंतिम रुप दिया जाएगा।

सर्वे पूरा, अब प्रस्ताव पर मंथन : जमीन का सर्वे सोमवार को कर लिया गया है। अधिग्रहण रेट तय किया जा रहा है। उद्योग विभाग आंकलन रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है। कारोबार से जुड़े लोगों का फीडबैक भी लिया जा रहा है।

बोले अधिकारी : अभी तक प्रदेश में कहीं भी आर्टीफिशियल ज्वेलरी का क्लस्टर नहीं है। यह बलिया में पहला मौका है जब एक मंच पर दूसरे जिले अथवा प्रांतों के कारोबारी बलिया के छोटे व्यापारियों के साथ काम करेंगे। इससे जिले की ब्रांडिंग होगी। रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। राष्ट्रीय फलक पर उत्पाद को पहचान मिलेगी। प्रस्ताव इसी महीने फाइनल कर शासन को भेजा जाएगा। -  श्रवण कुमार सिंह, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र 

जिले में आर्टीफिशियल ज्वेलरी का कारोबार बड़ा है, लेकिन उचित मंच नहीं होने से व्यापारी परेशान हैं। 250 से अधिक छोटे कारोबारी हैं, इसमें चार कारोबारी थोक वाले हैं। अगर यहां पर क्लस्टर स्थापित होगा तो जाहिर है मुंबई, राजकोट व बनारस के कारोबारियों का जिले से जुड़ाव होगा। यहां के लोगों की आमदनी बढ़ेगी। इस दिशा में सरकार को जरूर कदम उठाने चाहिए। - विजय शंकर वर्मा, थोक कारोबारी, आर्टीफिशियल ज्वेलरी

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