सोनभद्र में एसीसी के सीमेंट प्लांट से राख का बढ़ेगा उपयोग, ढाई हजार टन से ज्यादा होगी राख की खपत

सोनभद्र जिले में सीमेंट की कंपनी एसीसी लिमिटेड द्वारा चोपन ब्लाक में नया प्लांट लगाने से राख भंडारण की समस्या झेल रहे ओबरा तापीय परियोजना को भारी राहत मिलेगी। फिलहाल प्लांट स्थापना के लिए भूमि की उपलब्धता बनाने में जिला प्रशासन ने सक्रियता बढ़ाई है।

Abhishek SharmaTue, 07 Sep 2021 09:33 PM (IST)
नया प्लांट लगाने से राख भंडारण की समस्या झेल रहे ओबरा तापीय परियोजना को भारी राहत मिलेगी।

सोनभद्र, जागरण संवाददाता। सीमेंट कंपनी एसीसी लिमिटेड द्वारा चोपन ब्लाक में नया प्लांट लगाने से राख भंडारण की समस्या झेल रहे ओबरा तापीय परियोजना को भारी राहत मिलेगी। फिलहाल प्लांट स्थापना के लिए भूमि की उपलब्धता बनाने में जिला प्रशासन ने सक्रियता बढ़ाई है। राख की उपलब्धता को देखते हुए जहां एसीसी लिमिटेड ओबरा परियोजना के ही आसपास में प्लांट लगाने के लिए पिछले तीन वर्षों से जमीन खोज रही थी।

चोपन ब्लाक के सलईबनवा एवं मीरजापुर के मड़िहान में कई जमीनों का सर्वे किया जा रहा था। एसीसी द्वारा 4.4 मिलियन टन क्षमता का सीमेंट प्लांट स्थापित करने की योजना है। इस प्रस्तावित सीमेंट प्लांट को ओबरा तापीय परियोजना से पहले चरण में प्रतिदिन ढाई हजार टन उत्सर्जित राख की आपूर्ति होनी है, जिसको लेकर एसीसी और ओबरा तापीय परियोजना के बीच अनुबंध हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी की जानी है। एसीसी द्वारा अभिरुचि की अभिव्यक्ति के माध्यम से दिए गये प्रस्ताव पर निर्णय लेने हेतु सक्षम निविदा को अधिकृत करते हुए ओबरा तापीय परियोजना एवं एसीसी के मध्य उत्सर्जित राख के विक्रय हेतु अनुबंध हस्ताक्षरित किए जाने की अनुमति पिछले वर्ष ही दी गयी थी।

लेकिन, पिछले एक वर्ष के दौरान कोरोना काल ने सीमेंट प्लांट स्थापना के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया में बाधा खड़ी की थी। बहरहाल, अब जिला प्रशासन ने प्लांट स्थापना के लिए जमीन का चयन करने के लिए भौतिक सत्यापन शुरू कर दिया है। तापीय परियोजनाओं के आसपास बढ़ रहे राख के ढेर ने कई समस्याएं बढ़ाई है। राख का अपेक्षित उपयोग नहीं बढ़ पाने के कारण केंद्रीय पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के कई कड़े मानक तापीय परियोजनाओं के लिए तय किए हैं।

कम दूरी पर प्लांट स्थापना से होगी सहूलियत : एसीसी प्लांट के ओबरा परियोजना से कम दूरी पर स्थापित होने पर इसे राख आपूर्ति में उत्पादन निगम को काफी सहूलियत होगी। पर्यावरण मंत्रालय के नए मानकों के हिसाब से किसी भी कोयला आधारित बिजली घर को स्वयं परिवहन खर्च कर उपभोक्ता को राख पहुंचानी है। नये मानकों ने बिजली घरों के सामने बड़ी आर्थिक समस्या पैदा कर दी है। वर्तमान में ईधन खर्च को देखते हुए फ्लाई ऐश का उपयोग बढ़ाना काफी मुश्किल हो गया है। इसलिए ओबरा परियोजना प्रशासन नजदीकी राख उपभोक्ता की खोजबीन कर रहा था। राख उपयोग बढ़ाने के लिए उत्पादन निगम का राष्ट्रीय राजमार्ग अथॉरिटी के साथ अनुबंध भी परिवहन खर्च के कारण अधर में लटका हुआ है। पहले बिजली घरों और सड़क निर्माण संस्था को आधा आधा परिवहन खर्च देना था। नए मानकों के अनुसार 300 किलोमीटर के दायरे में राष्ट्रीय राजमार्ग सहित अन्य योजनाओं की सड़कों के निर्माण में राख परिवहन का खर्च बिजली घरों को देना है। 

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