वाराणसी के गंगा तट पर आकाशदीप जलाकर अमर वीर योद्धाओं को किया गया नमन, गंगा सेवा निधि का आयोजन

दो दशकों से भी ज्यादा समय से राष्ट्र के अमर वीर योद्धाओं की स्मृति में गंगा सेवा निधि द्वारा संपूर्ण कार्तिक मास जलाये जाने वाले आकाशदीप कार्यक्रम का इस वर्श भी होगा शुभारम्भ।आकाशदीप प्रज्ज्वलन उद्घाटन कार्यक्रम गुरुवार सायं 5.15 बजे हुआ।

Saurabh ChakravartyThu, 21 Oct 2021 08:25 PM (IST)
वाराणसी के गंगा तट पर आकाशदीप जलाकर अमर वीर योद्धाओं को किया गया नमन

जागरण संवाददाता, वाराणसी। दो दशकों से भी ज्यादा समय से राष्ट्र के अमर वीर योद्धाओं की स्मृति में गंगा सेवा निधि द्वारा संपूर्ण कार्तिक मास जलाये जाने वाले आकाशदीप कार्यक्रम का इस वर्श भी होगा शुभारम्भ।आकाशदीप प्रज्ज्वलन उद्घाटन कार्यक्रम गुरुवार, सायं 5.15 बजे हुआ। दो दशक काल पूर्व अर्थात 1999 कारगिल युद्ध विजय के उपलक्ष्य में गंगा सेवा निधि द्वारा अमर शहीदों के पुण्य स्मृति में आकाशदीप संकल्प का विस्तारीकरण एवं रूप दिया था। संस्था द्वारा भारत के अमर वीर योद्धाओं की स्मृति में सम्पूर्ण कार्तिक मास आकाश दीप जलाया जाता हैं, गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित आध्यात्मिकता और राष्ट्रवाद को समर्पित भव्य देव-दीपावली महोत्सव के साथ ही आकाशदीप का समापन किया जाता है तथा भारत के अमर वीर योद्धाओं को ‘‘भगीरथ शौर्य सम्मान‘‘ से सम्मानित भी किया जाता है। काशी में सदियों-सदियों से गंगा घाटों पर अपने पूर्वजों की स्मृति में, उनके स्वर्ग लोक की यात्रा के मार्ग को आलोकित करने के लिए आकाश-दीप जलाने की परम्परा रही है। आकाश-दीप से जुड़े कथानकों में ऐसी मान्यता है कि महाभारत युद्ध में प्राण विसर्जित करने वाले वीरों की स्मृति में भीष्म ने कार्तिक मास में दीप मालिकाओं से उन्हें संन्तर्पण दिया था।

ऐसा माना जाता है कि काशी के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पंचतीर्थ घाटों (दशाश्वमेध घाट, पंचगंगा घाट, आदिकेशव घाट, केदार घाट, अस्सी घाट) पंचगंगा घाट जहाँ पाँच पवित्र नदियों का संगम है, सम्पूर्ण कार्तिक मास में बाँस की टोकरियों में पूर्वजों-पितरों के स्वर्ग लोक की यात्रा मार्ग को आलोकित करने के लिए आकाश-दीप जलाया जाना प्रारम्भ हुआ जिसका समापन कार्तिक पूर्णिमा के पर्व पर हजारों दीप जलाकर होता है। 1999 में कारगिल युद्ध ने गंगा सेवा निधि को इस बात के लिए प्रेरित किया कि अतीत से लेकर आज तक के समस्त वीर योद्धाओं की स्मृति में आकाश-दीप जलाकर अपनी भावान्जलि दी जाय और इस भाव ने काशी की सदियों पुरानी आकाश-दीप की परम्परा को राष्ट्रवाद से जोड़ दिया है। मान्यता हैं कार्तिक मास के समान कोई मास नहीं, सतयुग के समान कोई युग नही, वेदों के समान कोई शास्त्र नहीं और गंगा के समान दूसरा कोई तीर्थ नहीं हैं।और गंगा के घाट पर कार्तिक माह में जलता ये आकाशदीप इस बात का परिचायक है की हमारे शहीदों के प्रति हमारे मन में श्रद्धा की रौशनी कितनी उज्वल है देव-दीपावली महोत्सव पर भगीरथ शौर्य सम्मान से सम्मानित कर शहीदों को नमन किया जाता है।आकाश दीप कार्यक्रम का प्रारम्भ दिनांक 21 अक्टूबर, 2021 सायं 5.15 बजे से दशाश्वमेध घाट पर हुआ। आकाश दीप कार्यक्रम का समापन कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर (19 नवम्बर 2021) संस्था द्वारा आयोजित आध्यात्मिकता और राष्ट्रवाद को समर्पित भव्य देव-दीपावली महोत्सव के साथ की जाएगी। कार्यक्रम का प्रारम्भ गणपति वंदना व देशभक्ति गीत से हुआ। गंगा सेवा निधि के संस्थापक स्मृतिषेश पं सत्येन्द्र मिश्र को श्रद्धासुमन अर्पित करके किया गया। इस अवसर पर गंगा सेवा निधि के कोषाध्यक्ष आशीष तिवारी ने अमरवीरों को नमन करते हुए एवं अतिथि वृंद के स्वागत किया।

संस्था द्वारा आज देश के अमर वीर योद्धाओं की स्मृति में शहीद 11Bn NDRF ए.एस.आई. अनिल कुमार गौड़,वाराणसी, 92 BN CRPF अश्वनी कुमार यादव (075022382 CT/GD) जम्मू कश्मीर के कुपवारा जिले में आतंकी हमले में 04 मई 2020 को शहीद हुए 92 BN CRPF धर्म देव कुमार (135028081 CT/GD) नक्सली हमले में बिजापुर जंगल, टेक्लागुरीयम में शहीद हुए , 986 Lt AD Regt, Indian Army । ओम प्रकाश बिन्द (14672278L NK।Auto Tech), 85 Amrd Regt Indian Army राम निवास यादव (15502887Y LD), 9 Corps Sig Rehta, Indian Army हरिद्वार सिंह यादव (1539070 Hav), 14 DOGRA, Indian Army निर्भय नारायण सिंह (4005193N Hav), 71 DOU., Indian Army अभिशेक सिंह यादव (15829266H Sep), 2nd LANCERS , Indian Army अंजनी कुमार सिंह (15479678 M Dfr) एवं संस्था के संस्थापक स्मृतिशेष पं. सत्येन्द्र मिश्र जी के लिए भी आकाशदीप प्रज्ज्वलित किये गये। साथ ही पुलिस स्मृति दिवस की संध्या पर मां गंगा के तट पर डाॅ. नीलकण्ठ तिवारी, माननीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पर्यटन, संस्कृति, धमार्थ करार्य, प्रोटोकाॅल, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ द्वारा पुलिस के शहीद जवानों के स्मृति में आकाशदीप प्रज्जवलन कर उन समस्त पुलिस कर्मीयों को श्रद्धांजलि अर्पित की।आकाशदीप हमारे लिये एक अलौक अंजली निवेदन है क्यों कि हमारा विश्वास है स्मरणीय अतीत विस्मृत हो जाने की स्थिति में वर्तमान संकट ग्रस्त हो जाता है और भविश्य निराधार।

आकाशदीप अतीत के साथ वर्तमान को जोड़ने की एक कड़ी है।इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य रूप सें उपस्थित डाॅ. नीलकण्ठ तिवारी, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पर्यटन, संस्कृति, धमार्थ करार्य, प्रोटोकाॅल, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ का स्वागत सुशांत मिश्र ने किया,कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में उपस्थित एयर कमाडोर अति विषिश्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कर्नल हितेश दुग्गल, सेना मेडल, कार्यवाहक कमाॅडेण्ट, 39 जीटीसी वाराणसी, कमाण्डेन्ट मनोज कुमार शर्मा, 11वीं वाहिनी, एनडीआरएफ., वाराणसी, सेकेण्ड इन कमाण्डेन्ट नीतिन्द्र नाथ, 95 बटालियन, सीआरपीएफ, वाराणसी का स्वागत पंकज अग्रवाल, इन्दूशेखर शर्मा, विवेक शर्मा (महाप्रबंधक, होटल ताज) द्वारा किया गया।

अति विशिष्ट अतिथियों में स्वामी जीतेंद्रनंद सरस्वती माननीय महासचिव अखिल भारतीय संत समिति व गंगा महासभा,श्री अंबरीश सिंह भोला माननीय सदस्य वाराणसी विकास प्राधिकरण, हिन्दू युवा वाहिनी प्रभारी वाराणसी आशुतोष पाण्डेय  सह महाप्रबन्धक, उपक्षेत्र प्रमुख, यूनियन बैंक आफ इंडिया, वाराणसी शामिल हुए।

सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति  पंकज कुमार मिश्रा बनारस घराना ने प्रस्तुति देकर शहीदों को नमन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से पं. इंदुशेखर शर्मा, श्री हनुमान यादव, श्री पंकज अग्रवाल, श्री रविषंकर सिंह, श्री आषीश तिवारी,  अरूण अग्रवाल,  मनीश सोनी, डाॅ वीके सिंह उपस्थित रहे। धन्यवाद प्रकाश संस्था के सचिव श्री सुरजीत कुमार सिंह ने दिया।

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