आज सामाजिक एकता का हो रहा है लोप, यह लोकतंत्र को चुनौती : प्रो. दीपक मलिक

बीएचयू के प्रो. दीपक मलिक ने कहा कि आज सामाजिक एकता का लोप हो रहा है। एकता के पाठ पढ़ाए नहीं जाते। यह लोकतंत्र को चुनौती है। कोविड के चलते बहुत सारी प्रक्रियाएं धीमी हो गईं। भले ही बहुत सारी कोशिशें की गई।

Saurabh ChakravartyThu, 25 Nov 2021 10:51 PM (IST)
नव साधना तरना, वाराणसी में एक दिवसीय सम्मेलन में राष्ट्रीय एकता, शांति और न्याय में बोलते वक्ता।

जागरण संवाददाता, वाराणसी : बीएचयू के प्रो. दीपक मलिक ने कहा कि आज सामाजिक एकता का लोप हो रहा है। एकता के पाठ पढ़ाए नहीं जाते। यह लोकतंत्र को चुनौती है। कोविड के चलते बहुत सारी प्रक्रियाएं धीमी हो गईं। भले ही बहुत सारी कोशिशें की गई। वे गुरुवार को बतौर मुख्य अतिथि तरना स्थित नव साधना प्रेक्षागृह में राइज एंड एक्ट के तहत एक दिवसीय राष्ट्रीय एकता, शांति व न्याय विषयक सम्मेलन में बोले।

सामाजिक सौहार्द पर चर्चा में चित्रा सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि सामान्य जीवन जी रहे स्त्री व पुरुष का जीवन सामाजिक होता है। गंगा का उद्धरण देते हुए कहा कि जिस तरह गंगा धाराओं को एक कर आगे बढ़ती है वही प्यार, नवीनता और सृजन है। सामाजिक कार्यकर्ता लेनिन रघुवंशी ने कहा कि जातिवाद, वंशवाद, धर्म को लेकर होने वाली नफरत की लड़ाई बिकने वाली लड़ाई है, इसे हमें समझना होगा। पत्रकार एके लारी ने मीडिया को लोकतंत्र का प्रहरी बताते हुए कहा कि खबरों के मामले में न्याय करने की जिम्मेदारी मीडिया पर बढ़ जाती है।

आयोजन के दूसरे सत्र में शायर नजीर बनारसी की जयंती पर डा. कासिम अंसारी ने मिर्जा गालिब की परंपरा का शायर बताया। तृतीय सत्र में अध्यापक, पत्रकार, विद्यार्थी, वकील, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी बात कही। सत्र की अध्यक्षता रंजू सिंह ने की। गोष्ठी में खालिद, डा. कासिम अंसारी, सीबी तिवारी, अंकिता वर्मा, रामकिशोर चौहान, हृदयानंद शर्मा आदि थे। आभार कार्यक्रम संयोजक डा. मोहम्मद आरिफ, संचालन लाल प्रकाश राही और धन्यवाद सुधीर जायसवाल ने किया।

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