Sugar Mill संघ के फैसले से हजारों क्विंटल चीनी डंप, चीनी मिलों में उत्पादित चीनी के निर्यात पर रोक

चीनी मिल संघ उत्तर प्रदेश ने सठियांव समेत पूर्वांचल के अन्य चीनी मिलों में उत्पादित चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है। संघ ने मेरठ जिले के रमाला मिल में तैयार चीनी को ही निर्यात करने के लिए अधिकृत किया है।

Abhishek SharmaThu, 09 Sep 2021 06:40 AM (IST)
सवाल उठ रहा है कि बाकी चीनी मिलों में तैयार चीनी कहां बिकेगी।

जागरण संवाददाता, अमिलो (आजमगढ़)। चीनी मिल संघ उत्तर प्रदेश ने सठियांव समेत पूर्वांचल के अन्य चीनी मिलों में उत्पादित चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है। संघ ने मेरठ जिले के रमाला मिल में तैयार चीनी को ही निर्यात करने के लिए अधिकृत किया है। इस फरमान से सठियांव चीनी मिल सहित पूर्वांचल की अन्य चीनी मिलों के समक्ष समस्या खड़ी हो गई है कि आखिर बाकी चीनी मिलों में तैयार चीनी कहां बिकेगी।

इससे पहले भी भारत सरकार के आदेश मुताबिक देश-विदेश में निर्यात करने के लिए पूर्वांचल की मिलों में तैयार चीनी काे निर्धारित किया गया। तब सठियांव में तैयार चीनी देश के अन्य प्रांतों के अलावा बाहर भी निर्यात की जाती थी। यहां की चीनी ईरान को भी निर्यात की जा चुकी है। इससे चीनी मिल में कभी चीनी डंप नहीं होती थी और चीनी का मूल्य भी मिल जाता था। उससे किसानों को गन्ना का बकाया भुगतान करने में आसानी हो जाती थी। अबकी हाल ही में चीनी मिल संघ उत्तर प्रदेश ने पूर्वांचल के सभी चीनी मिल सठियांव, घोसी व सुल्तानपुर की चीनी निर्यात पर रोक लगाते हुए मेरठ के रमाला चीनी मिल को ही अधिकृत कर दिया है।इससे सठियांव चीनी मिल में तैयार की गई दो लाख साठ हजार क्विंटल चीनी डंप पड़ी रह जाएगी। पूर्वांचल की अन्य मिलों का भी यही हाल होगा। चीनी मिल को भारत सरकार से अधिकृत कोटा अनुसार 69 हजार क्विंटल चीनी निर्यात कर दी गई होती, तो गन्ना के बकाए का भुगतान आसान हो जाता। जीएम देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया दो बार पत्राचार के माध्यम से चीनी मिल संघ उत्तर प्रदेश को समस्या से अवगत कराया जा चुका है। 

चीनी मिल सठियांव परिक्षेत्र के गन्ना किसान काफी दिनों से मूल्य बढ़ाए जाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सरकार ने मूल्य वृद्धि भी की, लेकिन उसे ऊंट के मुंह में जीरा ही कहा जा सकता है। कारण कि मात्र पांच रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की बात सरकार ने कही है।किसानों का कहना है कि जिस अनुपात में खेती की लागत और बाकी चीजों की महंगाई बढ़ती जा रही है उसके अनुसार गन्ना मूल्य में भी वृद्धि होनी चाहिए।सरकार महंगाई के सापेक्ष पांच रुपये बढ़ाकर किसानों के साथ छलावा कर रही है। चीनी मिल सठियांव में आसपास के जनपदों के किसान अपना गन्ना आपूर्ति करके रोजी-रोटी व बच्चों की शिक्षा पर खर्च का वहन करते हैं। डीजल, पेट्रोल, खाद व कीटनाशक दवाओं के दाम बढ़कर दोगुना हो गए हैं।

सिकंदरपुर गांव के किसान मैनेजर यादव ने कहा कि सरकार का फैसला ऊंट के मुंह में जीरा है। गन्ना ढुलाई के लिए ट्रैक्टर ट्राली का भाड़ा काफी बढ़ा है। सोनपार गांव के अशोक कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार का फैसला उचित नहीं है। डीह गांव के विजय कुमार ने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुना करने का केवल प्रचार कर रही है। रेट बढ़ाने की बात आई तो केवल पांच रुपये बढ़ाकर शांत हो गई। सलारपुर के रामजीत उर्फ सेबूलाल ने कहा कि किसानों की हितैषी होने का दावा खोखला साबित हो रहा है।चीनी मिल सठियांव के मुख्य गन्ना अधिकारी डा. विनय प्रताप सिंह ने बताया कि अभी कोई शासनादेश ही नहीं आया है। चर्चा है कि पांच रुपये ही बढ़ोत्तरी की जानी है।

 

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