इस बार सावन में आईआरसीटीसी कराएगा श्रीकाशी विश्वनाथ का दर्शन- पूजन, 28 जुलाई से मिलेगा टिकट

सावन मास में घर बैठे श्री काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन और भोग आरती का टिकट बुक करने की सुविधा मिलेगी। भारतीय रेलवे खान-पान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने शिव भक्तों के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के साथ मिलकर इस नई सेवा की शुरुआत की है।

Saurabh ChakravartyFri, 23 Jul 2021 11:25 PM (IST)
सावन मास में घर बैठे विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन और भोग आरती का टिकट बुक करने की सुविधा मिलेगी।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। सावन मास में घर बैठे श्री काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन और भोग आरती का टिकट बुक करने की सुविधा मिलेगी। भारतीय रेलवे खान-पान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने शिव भक्तों के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के साथ मिलकर इस नई सेवा की शुरुआत की है। जिससे दर्शन करने जाने वाले भक्तों को कोई असुविधा न हो। सावन में आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर 28 जुलाई से बाबा विश्वनाथ के दर्शन के टिकट हासिल किए जा सकते हैं।

सावन के सोमवार का विशेष महत्व होता है, भक्त बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने जाते हैं। इस बार सावन में चार सोमवार 26 जुलाई, दो, नौ व 16 अगस्त को पड़ रहे है। सुगम दर्शन, मंगला आरती, दोपहर की भोग आरती, सप्त ऋषि आरती, श्रंगार/भोग आरती, एक शास्त्री से रुद्राभिषेक इत्यादि पूजन अनुष्ठान के टिकट आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर बुक किए जा सकते हैं। आईआरसीटीसी के अनुसार देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन को सावन माह में जाते हैं। उनको पहले से ही विशेष दर्शन के लिए टिकट मिल सके, इसलिए ट्रस्ट और आईआरसीटीसी के सहयोग से इस नई सुविधा की शुरुआत की गई है।

सावन में अपनाएं ब्रह्मचर्य के नियमशिव की उपासना के लिए शास्त्रों में कुछ विधि-विधान बताए गए हैं। जिसका पालन यदि सनातनी करें तो शिव निश्चित ही प्रसन्न होंगे।

- सावन में पूरे महीने भर पत्ती वाली सब्जियां नहीं खानी चाहिए।

- शिवभक्तों को सात्विक भोजन करना चाहिए। मांसाहार और नशे से दूर रहना चाहिए।

- चिकित्सकों के मुताबिक इस महीने में मसालेदार और तले भुने पदार्थों के सेवन से परहेज करना चाहिए। - स्कंदपुराण के अनुसार सावन महीने में एक ही समय भोजन करना चाहिए।

- पानी में बिल्वपत्र या आंवला डालकर स्नान करना चाहिए। इससे पापों का क्षय होता है।

- भगवान विष्णु का वास जल में होता है। इसलिए इस महीने में तीर्थ के जल से स्नान का विशेष महत्व है।

- संत समाज को वस्त्र, दूध, दही, पंचामृत, अन्न, फल का दान करना चाहिए।

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