सोनभद्र में केंद्रीय मंत्री हरदीप के मदद की दीप ने बच्चों के जीवन में भर दिया उजाला

जाके पैर न फटी बिवाई वो क्या जाने पीर पराई। लेकिन कोरोना संक्रमण के इस दौर में मानवता को एक साथ आने को मजबूर किया है। कोरोना संक्रमण में जनपद के 53 बच्चों (40 बच्चे मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत पात्र) बच्चों को अनाथ कर दिया।

Abhishek SharmaSun, 25 Jul 2021 11:19 AM (IST)
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने जनपद का 17 जुलाई को सोनभद्र का दौरा किया था।

जागरण संवाददाता, सोनभद्र। जाके पैर न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई। लेकिन कोरोना संक्रमण के इस दौर में मानवता को एक साथ आने को मजबूर किया है। कोरोना संक्रमण में जनपद के 53 बच्चों (40 बच्चे मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत पात्र) बच्चों को अनाथ कर दिया। दो मासूम ताे ऐसे हैं जिनके स्वजन अब दुनिया में नहीं है। इनकी पीर को समझते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने जनपद का 17 जुलाई को दौरा किया था और आमजन के साथ जनप्रतनिधियों से भी इन बच्चों का व्यक्तिगत मदद करने की अपील किया था। लेकिन दुर्भाग्य ऐसा कि केंद्रीय मंत्री के मदद की अपील के बाद भी जनपद के जनप्रतिनिधियों ने इसमें अपेक्षित कोई पहल नहीं की। हां, भविष्य में मदद करने का आश्वासन जरूर दिया।

इस दौरान कुछ स्वयं सेवी संगठनों ने आगे बढ़कर ऐसे बच्चों की मदद की है। जिला स्तरीय अधिकारियों ने भी कुछ मदद की है। लेकिन वर्तमान समय में ऐसे बच्चों को वित्तीय मदद के साथ-साथ मानसीक समर्थन की जरूरत है।

47 बच्चों को दिया था पांच-पांच हजार रुपये : केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने 17 जुलाई को भाजपा कार्यालय पहुंचकर वहां पर कोरोना से अनाथ हुए 47 बच्चों काे व्यक्तिगत रूप से पांच-पांच हजार रुपये व राशन किट मुहैया कराया था। उन्होंने इसके अलावा भविष्य में जनपद आने पर उनकी देखभाल करने व यथासंभव व्यक्तिगत मदद का आश्वासन दिया था। इस दौरान उन्होंने मौके पर उपस्थित जनप्रतनिधियों से सरकारी के अलावा व्यक्तिगत मदद करने को कहा था।

अनाथ बच्चों को एक वर्ष की शिक्षा निश्शुल्क : रेणुकूट स्थित ग्रीनलैंड स्कूल ने कोविड से अनाथ हुए बच्चों को एक वर्ष तक मुफ्त शिक्षा मुहैया कराने का निर्णय लिया है। विद्यालय के प्रबंधक राजीव सिन्हा ने बताया कि कोविड महामारी के दौर में तमाम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। ऐसे बच्चे शिक्षा से वंचित होकर घर में बैठने पर मजबूर हैं। ग्रीनलैंड स्कूल ऐसे बच्चों को सहारा बनकर उनकी वर्तमान सत्र की शिक्षा मुफ्त में पूर्ण करवाएगा। इसके लिए आवश्यक नहीं कि लाभार्थी विद्यार्थी विद्यालय का ही छात्र रहा हो, वह किसी भी विद्यालय अथवा आसपास के नगर के किसी विद्यालय का छात्र हो उसे भी विद्यालय संपूर्ण सहयोग करेगा ताकि उसकी शिक्षा अवरुद्ध न हो सके।

पठन-पाठन की सामग्री कराएं उपलब्ध

कोरोना संक्रमण से अनाथ हुए बच्चों को पढ़ाई के दौरान किताब-कापी व अन्य जरूरी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी लेता हूं। जहां तक संभव होगा उनकी मदद की जाएगी। -कुलदीप पटेल, सांसद पकौड़ी लाल कोल के प्रतिनिधि।

एक भाई के तौर पर खड़ा हूं

- कोराेना से अनाथ हुए बच्चों के लिए एक बड़े भाई का जो भी दायित्व होता है उसके लिए मैं तैयार हूं। निश्चित रूप से मैने कुछ व्यक्तिगत मदद कि है, लेकिन उसे सार्वजनिक करना नहीं चाहता। लेकिन इन बच्चों को यह आश्वासन देता हूं कि उन्हें जब भी मेरी जरूरत हो वह बिना किसी संकोच के मेरे पास आएं।- भूपेश चौबे, सदर विधायक ।

 

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