वाराणसी में श्रीसंकट मोचन संगीत समारोह : बजरंगी दरबार में कलाकारों ने बहाया संगीत का सुरधार

संगीत के महाकुंभ श्रीसंकट मोचन संगीत समारोह की सातवीं और अंतिम निशा में कलाकारों ने सुरधार बहाया।

संगीत के महाकुंभ श्रीसंकट मोचन संगीत समारोह की सातवीं और अंतिम निशा में कलाकारों ने बजरंगी के दरबार में आभासी मंच से संगीत का सुरधार बहाया। इस सांगीतिक अनुष्ठान में शुक्रवार को पहली हाजिरी बंगलुरू से जुड़ी श्रीविद्या ने कुचिपुड़ी नृत्य से लगाई।

Saurabh ChakravartySat, 08 May 2021 12:12 AM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। संगीत के महाकुंभ श्रीसंकट मोचन संगीत समारोह की सातवीं और अंतिम निशा में कलाकारों ने बजरंगी के दरबार में आभासी मंच से संगीत का सुरधार बहाया। इस सांगीतिक अनुष्ठान में शुक्रवार को पहली हाजिरी बंगलुरू से जुड़ी श्रीविद्या ने कुचिपुड़ी नृत्य से लगाई। उन्होंने मंदोदरी प्रसंग से अपनी प्रस्तुति आरम्भ की। उसके बाद उन्होंने आचार्य कृष्ण राय देव द्वारा रचित मंडूक शब्दम की प्रस्तुति देकर आभासी मंच से जुड़े दर्शकों को अभिभूत कर दिया। दूसरी प्रस्तुति बेंगलुरु के किराना घराने के कलाकार पं. नागराज हवलदार और उनके पुत्र ओंकार हवलदार ने स्वरांजलि की दी। उन्होंने राग गोरख कल्याण में विलंबित एकताल एवं मध्य लय तीनताल के रचना की प्रस्तुति दी। उसके बाद उन्होंने राग भैरवी धुन पर ' जय हो करुणानिधे ' गाकर सुनाया। जिससे आभासी मंच पर विराजमान श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। तीसरी प्रस्तुति

मुंबई से जुड़े पद्मविभूषण पं. हरिप्रसाद चौरसिया के शिष्य विवेक सोनार ने वंशी वादन से दिया। उन्होंने रागहंस ध्वनि में अद्धा ताल की प्रस्तुति दी। उनके साथ पं. मुकुंदराज देव ने तबले पर संगत किया।

चौथी प्रस्तुति में सात समंदर पार से जुड़े मेवाती घराने के वरिष्ठ गायक कलाकार पं. सुमन घोष ने राग कौशी कान्हड़ में विलंबित एकताल एवं द्रुत लय में तीनताल की बंदिश सुनाई। पांचवी प्रस्तुति

में कोलकाता से जुड़े विश्वविख्यात संतूर वादक पं.  तरुण भट्टाचार्य ने संतूर वादन से हनुमत चरणों मे हाजिरी लगाई। उन्होंने राग जनसम्मोहिनी में आलाप, जोड़ एवं झाला की प्रस्तुति दी। उनके साथ तबला पर पं.शुभंकर बनर्जी ने संगत किया। छठवीं प्रस्तुति में दिल्ली से जुड़े पं. हरीश तिवारी ने अपने गायन से श्रोताओं को खूब झूमाया। अंतिम प्रस्तुति शिवमणि ने चेन्नई से दी। उनकी प्रस्तुति पर संगीत रसिक श्रद्धालु झूम उठे। अपने घर के बरामदे में लगाए सेट पर ड्रम के साथ ही सजाए गए परंपरागत वाद्य यंत्र तबला और मिट्टी का घड़ा आदि पर उन्होंने चिर परिचित ध्वनियों ने विभिन्न तालों के माध्यम से श्रोताओं को जोड़ा। इसके साथ ही फेसबुक पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ लग गई। उनके साथ प्रसिद्ध मंडोलिन वादक यू राजेश भी जुड़े और दोनों ने संगत किया।

सितार वादक प्रतीक चौधरी को दी गयी श्रद्धांजलि

श्रीसंकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने विख्यात सितार वादक कलाकार प्रतीक चौधरी के देहांत पर दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह अतिविलंबित चलने का समय है। अधीर ना हो। प्रभु का स्मरण करें। शायद उनको अभी भी ज्ञात नहीं है कि उनके लोगों पर कितनी बड़ी विपदा आई है। इस वृहद कार्यक्रम में अब तक साढ़े नौ लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं।

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