सोनभद्र का लाल टमाटर वन डिस्ट्रिक्‍ट वन प्रोडक्‍ट में शामिल, बांग्‍लादेश की मंडियों तक है पहचान

ओडीओपी में टमाटर को प्रस्तावित किया गया था जिसे अब हरी झंडी दे दी गई है।

सोनभद्र के किसानों को टमाटर की खेती से हो रहे नुकसान को देखते हुए जिला प्रशासन की तरफ से एक जिला एक उत्पाद यानी ओडीओपी में टमाटर को प्रस्तावित किया गया था जिसे अब हरी झंडी दे दी गई है।

Publish Date:Sat, 23 Jan 2021 11:57 AM (IST) Author: Abhishek sharma

सोनभद्र, जेएनएन। जिले के सोनांचल के लाल टमाटर की पहचान बांग्लादेश की मंडियों तक रही है। हालांकि, एक दशक से उत्पादन ज्यादा होने के सापेक्ष खपत कम होती जा रही है। ऐसी स्थिति में किसानों को नुकसान को देखते हुए जिला प्रशासन की तरफ से एक जिला एक उत्पाद यानी ओडीओपी में टमाटर को प्रस्तावित किया गया था जिसे अब हरी झंडी दे दी गई है। प्रस्ताव पर अमल होने के बाद अब फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगने का रास्‍ता भी साफ हो गया है। इससे किसानों की उपज को सही मूल्य मिलेगा और कृषि आधारित कारोबार को गति मिलेगी।

लगभग छह माह तक मामला फाइलों में लटका हुआ था। अब नए साल में ओडीओपी का तोहफा मिलने के साथ ही किसानों की उपज को बेहतर बाजार मिलने की आस जगी है। सोनभद्र के करीब सात हजार हेक्टेयर में टमाटर की खेती काफी समय से होती रही है। इसे खाद्य एवं प्रसंस्करण के तहत एक जिला एक उत्पाद में शामिल करने की कवायद कोरोना काल से ही चल रही थी। लेकिन बीते साल के अंत तक उसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका था।

इस बाबत जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने बीते माह ही सूचित किया था कि ओडीओपी में टमाटर का चयन करके यहां प्रस्ताव भेजा गया था। उसपर उच्चस्तर से काम भी लगातार हो रहा था। बताया कि आवंटन के बाद फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए 30 से 40 फीसद तक अनुदान मिलना संभव हो सकेगा।  

उद्योगों को मिलेगी सहूलियत

विदेश के मंडियों तक पहुंचने वाला टमाटर को एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल कर लिया गया है। चार-पांच दिनों में इसके लिए शासन की तरफ से लक्ष्य भी आवंटित होगा। दस लाख से एक करोड़ रुपये तक का उद्योग लगाया जा सकता है। इसमें दस फीसद किसान को लगाना बाकी धन बैंक से ऋण मिलेगा। इकाई स्थापित होने के बाद टोमैटो सास, प्यूरी और केचअप आदि बनाए जाएंगे। 

सोनांचल में छह हजार हेक्टेयर में टमाटर की खेती की जाती है। इससे करीब साढ़े तीन हजार किसान जुड़े हुए हैं। करमा क्षेत्र टमाटर की खेती के लिए विख्यात हैं। करमा के टमाटर बांग्लादेश व नेपाल के मंडियों तक पहुंचा हैं। कई बार ऐसा होता है कि टमाटर का रेट गिरने पर किसानों को काफी नुकसान होने लगता है, लेकिन उद्योग लग जाने से टमाटर के सास, प्यूरी और केचअप बनाने का काम शुरू हो जाएगा। इससे किसानों को अच्छी आमदनी होगी। आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत इस बार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से हर जिले के एक उत्पाद का चयन किया जाना था। पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में टमाटर को ओडीओपी में शामिल करने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। शासन की तरफ से करीब एक सप्ताह पहले इसक ओडीओपी में शामिल करने के लिए मंजूरी मिल गई है। इसके लिए कितनी इकाई लगाई जानी है इसका लक्ष्य चार पांच दिनों में आवंटित हो जाएगा। टमाटर की ब्रांडिंग आदि पर कितना अनुदान मिलेगा इसको लक्ष्य निर्धारित कर दिया जाएगा।  इकाई लगाने के लिए किसानों को 90 फीसद बैंक से ऋण व 10 फीसद धनराशि अपनी लगानी होगी।   

इकाई स्थापित होने से मिलेगा रोजगार

टमाटर का उद्योग लगाने से स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिल सकेगा। इकाई लगने से टोमैटो सास, प्यूरी और केचअप आदि बनाए जाएंगे। इसके लिए लोगों की जरूरत होगी। मजदूरों व युवाओं को रोजगार मिलने से उनको बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। 

बोले अधिकारी

टमाटर को ओडीओपी में शामिल कर लिया गया है। चार पांच दिनों में इकाई स्थापित करने व अनुदान का लक्ष्य मिल जाएगा। इसके बाद किसानों से आवेदन आदि मंगाए जाएंगे। - सुनील शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी।

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