भदोही के कालीन निर्यातकों को झटका, गोदाम से निकले तो बंदरगाहों पर जाकर डंप हो करोड़ों के माल

कंटेनर की किल्लत के कारण कालीन उद्योग पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। करोड़ों के कालीन निर्यातकों के गोदामों व बंदरगाहों पर डंप हैं। हाल यह है कि चार से पांच गुना अधिक किराया देने के बाद भी कंटेनर मिलना मुश्किल हो गया है।

Saurabh ChakravartySun, 18 Jul 2021 06:10 PM (IST)
कंटेनर की किल्लत के कारण कालीन उद्योग पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

भदोही, जागरण संवाददाता। कंटेनर की किल्लत के कारण कालीन उद्योग पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। करोड़ों के कालीन निर्यातकों के गोदामों व बंदरगाहों पर डंप हैं। हाल यह है कि चार से पांच गुना अधिक किराया देने के बाद भी कंटेनर मिलना मुश्किल हो गया है। प्रमुख कालीन निर्यातकों के गोदाम में एक से तीन करोड़ के तैयार कालीन रखे गए हैं। निर्यातकों को चिंता इस बात की है कि अधिक विलंब होने पर आर्डर रद भी हो सकते हैं जो निर्यातकों के साथ-साथ उद्योग के लिए घातक होगा।

निर्यातकों का कहना है कि 90 फीसद कंटेनर का निर्माण चीन में होता है। दो साल दोनों देशों के बीच बिगड़े संबंधों के बाद चीन से कंटेनर आना बंद हो गया है। देश में कंटेनर का निर्माण ही नहीं होता। ऐसे में निर्यात पर संकट उत्पन्न हो गया है। विदेशों को माल भेजने वाली शीपिंग कंपनियों द्वारा किराया बढ़ा दिया गया है। जो उद्यमियों के लिए परेशानी का कारण बना है। हाल यह है कि दो साल पहले तक यूरोप के लिए 900 डालर में कंटेनर मिल जाता था लेकिन इन दिनों चार हजार डालर देने पर भी कंटेनर नहीं मिल रहा है। 50 से अधिक निर्यातकों के माल बंदरगाहों पर डंप है। इसके लिए किराया अलग से देना पड़ रहा है।

समस्या तो दो साल से बनी हुई है लेकिन इन दिनों हालात बेहद खराब हो गए

समस्या तो दो साल से बनी हुई है लेकिन इन दिनों हालात बेहद खराब हो गए हैं। बेल्जियम के लिए भेजा गया तीन कंटेनर कालीन एक माह से बंदरगाह पर पड़ा है। शिपिंग कंपनी द्वारा आज भेजेंगे कल भेजेंगे कहकर टाला जा रहा है जबकि आयातक जल्द से जल्द माल भेजने का दबाव बना रहे हैं।

- संजय गुप्ता, निर्यातक ।

विश्वव्यापी प्रतिस्पर्धा के बीच कंटेनर संकट कालीन उद्योग के लिए शुभ संकेत नहीं

विश्वव्यापी प्रतिस्पर्धा के बीच कंटेनर संकट कालीन उद्योग के लिए शुभ संकेत नहीं है। अमेरिका व यूरोप के ग्राहक समय के पाबंद होते हैं। उनको निर्धारित समय पर माल नहीं मिला तो वह दूसरे देशों से भी माल मंगा सकते हैं। जो भारतीय कालीन उद्योग के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

- शाश्वत पांडेय, निर्यातक।

 

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