शारदीय नवरात्र : भक्ति के उल्लास में सरोबार नजर आया विंध्यधाम, त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने भक्त

मीरजापुर, विंध्याचल के न्यू वीआइपी मार्ग पर मां के दर्शन के लिए कतारबद्ध दर्शनार्थी।

शारदीय नवरात्र के छठवें दिन गुरुवार को विंध्यवासिनी धाम भक्ति के उल्लास में सरोबार नजर आया तो वहीं गंगा घाटों पर आस्था के अद्भुत रंग दिखाई दिए। देश के विभिन्न प्रांतों से आए श्रद्धालुओं ने मां विंध्यवासिनी के कात्यायनी स्वरूप का दर्शन-पूजन किया।

Publish Date:Thu, 22 Oct 2020 06:09 PM (IST) Author: Saurabh Chakravarty

मीरजापुर, जेएनएन। शारदीय नवरात्र के छठवें दिन गुरुवार को विंध्यवासिनी धाम भक्ति के उल्लास में सरोबार नजर आया तो वहीं गंगा घाटों पर आस्था के अद्भुत रंग दिखाई दिए। देश के विभिन्न प्रांतों से आए श्रद्धालुओं ने मां विंध्यवासिनी के कात्यायनी स्वरूप का दर्शन-पूजन किया। वहीं कालीखोह व अष्टभुजा माता का दर्शन कर त्रिकोण परिक्रमा की।

मंगला आरती के बाद से मंदिर पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मां विंध्यवासिनी के जयकारे से वातावरण गुंजायमान होता रहा। मां का तरह-तरह के पुष्पों व आभूषणों से शृंगार किया गया था। मंदिर पहुंचने के बाद किसी ने गर्भगृह में जाकर तो किसी ने झांकी से मां का दर्शन कर मंगल कामना की। मंदिर की छत पर जहां पाठ चल रहा है, वहीं विंध्य क्षेत्र के जगह-जगह बैठकर लोग साधना कर रहे हैं। मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्तों ने अष्टभुजा पहाड़ पर त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने। सुरक्षा-व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस और पीएसी के जवान मुस्तैद रहे। श्रीविंध्य पंडा समाज के पदाधिकारी भी भक्तों की सेवा में तल्लीन रहे।

गंगा तट पर अभी से दिखने लगा अलौकिक छटा का अद्भुत नजारा

देवों की दीपावली यानी देवदीपावली मनाने के लिए विंध्य क्षेत्र अभी से तैयार है। विंध्यधाम के गंगा तट पर अलौकिक छटा का अद्भुत नजारा अभी से दिखने लगा है। अब सभी को इंतजार है कार्तिक पूर्णिमा की शाम सूर्य के डूबने और चांद के निकलने का। घाटों पर दीपों की ऐसी रोशनी जगमगाती है, मानों पृथ्वी पर स्वर्ग उतर आया हो। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवताओं की विनती पर भगवान शिव ने तीनों लोक में आतंक का पर्याय बने त्रिपुरासुर का वध किया था। भगवान शिव के इस कृत्य से उपकृत देवताओं ने स्वर्ग लोक में दीपोत्सव मनाया था। तब से कार्तिक पूर्णिमा को देवदीवाली मनाने की प्रथा लोक चलन में आई। पूर्णिमा पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है।

अष्टभुजा पहाड़ी पर श्रद्धालु से अधिक दिखे बंदर

विंध्याचल के अष्टभुजा पहाड़ी पर नवरात्र के छठवें दिन भक्तों से अधिक बंदर देखने को मिले। जहां इक्का-दुक्का भक्त दिखे तो कुछ खाने-पीने के इरादे से उसके पीछे कई बंदर लग जाते थे। वहीं दुकानदार भी श्रद्धालुओं की भीड़ कम होने की वजह से जिस श्रद्धालु को देखते उसे बुलाने लग जाते थे।

 

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