शारदीय नवरात्र 2021: वाराणसी में महामाया के वंदन संग भारत की सन्नारियों को भी अक्षत-चंदन

वाराणसी के सामने घाट के अनुसुइया आश्रम स्थित सर्वधर्म मंदिर में देवी जगदंबा के महामाया स्वरूप का नित्य वंदन-अभिनंदन हो रहा है। साथ ही भारत की समरस परंपरा को मान देते हुए उन सन्नारियों को भी अक्षत-चंदन अर्पित किया जा रहा है।

Saurabh ChakravartyTue, 12 Oct 2021 08:30 AM (IST)
शारदीय नवरात्र में अनुसुइया आश्रम के देवायतन में सर्वधर्म परंपरा से जुड़ी शक्तिस्वरूपाओं का भी प्रात: स्मरण

वाराणसी, कुमार अजय। शारदीय नवरात्र काल में भगवान शिव की नगरी का कण-कण शक्ति आराधन के ओज-तेज से प्रदीप्त है। नगर के टोले-मुहल्ले घर से बाहर तक चंडी पाठ के अमोघ मंत्रों से गूंज रहे हैैं। गुग्गुल व लोबान की धूम सुगंध चप्पे-चप्पे को पावन-मनभावन बना रही है। हर दिशा ढाक के डंकों व सांचे दरबार के जयकारों से थर्रा रही है। नगर के पांच सार्वजनिक पंडालों में देवी के विविध स्वरूपों की अभ्यर्थना का क्रम पहले दिन से ही जारी है।

अकाल बोधन परंपरा के अनुसार तीन दिवसीय दुर्गोत्सव आयोजित करने वाले पूजा मंडपों में भी सोमवार शाम तक देवी की मृण्मय प्रतिमाएं चिन्मय स्वरूप में पूजित होंगी। उत्सव में विविधता के रंग भरने के जतन में किसी संस्था की ओर से देवी को आरोग्य रूपिणी स्वरूप में पूजा जाएगा, तो किसी ने जगदंबा के शस्य श्यामला स्वरूप को सजाया है। किसी ने देवी की करुणामयी प्रकृति को नर्स की छवि के रूप में उतारा है।

इसी शृंखला में अपनी प्रयोगधर्मी सोच को विस्तार देते हुए सामने घाट के अनुसुइया आश्रम स्थित सर्वधर्म मंदिर में देवी जगदंबा के महामाया स्वरूप का नित्य वंदन-अभिनंदन हो रहा है। साथ ही, भारत की समरस परंपरा को मान देते हुए उन सन्नारियों को भी अक्षत-चंदन अर्पित किया जा रहा है जिन्होंने अपनी मनस्विता, तपस्विता व तेजस्विता से सनातन दर्शन परंपरा के औदार्य को मुकाम दिया है। अपनी सोच को वसुधैव कुटुंबकम के विचार से संयोजित करते हुए एक नई दृष्टि को नया आयाम दिया है।

शक्ति आराधन को पूरी तरह समर्पित आश्रम के देवालय की एक पूरी दीर्घा के मुख्य आसन पर माता पार्वती महामाया के रूप में नित्य पूजित हैैं। साथ की वेदिकाओं पर विराज रहीं मां शीतला, देवी विंध्यवासिनी, मां शारदा व मां सरस्वती के साथ कन्याकुमारी पंचदेवियों के रूप में पूजित हैैं। देवियां भक्तों की भक्ति को भाव के रूप में ग्रहण कर उन पर कृपा वर्षा वार रही हैैं। विशेष उल्लेख यह कि इन देवियों के साथ दीर्घा में स्थापित श्रीकृष्ण प्रिया राधिका, सती अनुसुइया, भक्त मीराबाई, माता कौशल्या, भक्त विदुरानी, सती राजमती, सती बेहुला देवी, तपस्विनी अहिल्या, मनस्विनी रत्नावली, श्रीकृष्णवरणीय कुब्जा, सती मानवती, देवी शुतावली, भरतमाता शकुंतला, संत राबिया, ध्रुवमाता सुनिधि, माता मरियम, सिस्टर निवेदिता, भक्त करमाबाई, भक्त शबरी, सती मदालसा, गणिका जीवंती, महारानी लक्ष्मीबाई, तारामती, कुंती, श्रीकृष्ण सखी द्रोपदी, तपस्विनी गौरीबाई, रानी दमयंती, महारानी दुर्गावती, सती सावित्री के साथ मदर टेरेसा भी प्रात:स्मरणीय पुण्य श्लोकाओं के रूप में नवरात्र का वंदन-चंदन स्वीकार रही हैैं।

हां... देवता विराजते हैं यहां

आश्रम के संरक्षक बाबा रंगनाथ यत्र नार्यस्तु पूज्यंते को उद्धïृत कर बताते हैं कि यह उदार विचार ही इस प्रयास का हेतु बना। मन ने कहा कि यदि नारियों के पूजन से ही कहीं देवता रमते हैंतो कम से कम हर मंदिर में नारी शक्ति के प्रतीकों का स्थापन क्यों न हो। वैसे भी शक्ति के संयोजन बगैर शिव भी तो आखिर शव ही हैं।

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