स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 : वाराणसी में गंदगी से जंग में चुनौती बड़ी, नगर निगम के प्रयास नाकाफी

वाराणसी समय पर और नियमित सफाई अक्‍सर नहीं होने से सड़कों पर कूड़ा बिखरा रहता है।

स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 के परिणाम की उलटी गिनती शुरू हो गई है। अब भी गंदगी से जंग में चुनौती बड़ी है और उसके सापेक्ष प्रयास नाकाफी हैं। वाराणसी नगर निगम की ओर से प्रयास में स्थायित्व की कमी है। परिणाम स्वच्छता सर्वेक्षण में वाराणसी पिछड़ जाता है।

Publish Date:Fri, 22 Jan 2021 08:10 AM (IST) Author: Saurabh Chakravarty

वाराणसी, जेएनएन। स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 के परिणाम की उलटी गिनती शुरू हो गई है। अब भी गंदगी से जंग में चुनौती बड़ी है और उसके सापेक्ष प्रयास नाकाफी हैं। नगर निगम की ओर से प्रयास में स्थायित्व की कमी है। परिणाम, स्वच्छता सर्वेक्षण में वाराणसी पिछड़ जाता है। स्मार्ट सिटी होने के बाद भी कचरा प्रबंधन में अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। अफसरों की निगरानी और कार्य की जवाबदेही न होना अब तक के प्रयास पर गंदगी भारी पड़ रही है।  

अन्य शहरों की अपेक्षा वाराणसी में रोजाना करीब डेढ़ लाख लोग आते हैं। देव दीपावली, दुर्गा पूजा, गंगा स्नान, महाशिवरात्रि पर्व आदि होने पर यह संख्या एक करोड़ के पास पहुंच जाती है। ऐसे में बाहर से आने वाले सैलानियों की संख्या के कारण स्वच्छता मिशन बड़ी चुनौती बन जाती है। एक दर्जन से अधिक परियोजनाओं का निर्माण, मुकम्मल सीवर लाइनें आदि न होना गंदगी से जंग में बड़ी बाधा है।

इस बार 3600 का पूर्णांक

स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 इस बार छह हजार अंकों का होगा। सिटीजन वाइस व सर्टिफिकेशन के 3600 अंक हैं। सर्विस लेवल प्रोग्रेस के 2400 अंक होंगे। सिटीजन वाइस में लोगों की ओर से शहर के बारे में दी जाने वाली फीडबैक के 600, अनुभव के 300, इंगजेमेंट के 450, स्वच्छता एक के 350, इनोवेशन के 100 अंक हैं। सिटीजन फीडबैक के लिए लोगों से आनलाइन आठ सवाल पूछे जा रहे हैं।

जल संरक्षण पर विशेष फोकस

स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार जल संरक्षण पर भी खास ध्यान दिया गया है। स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार जल संरक्षण के लिए भी अंक होंगे। सर्टिफिकेशन के 700 अंकों में एक तिहाई अंक जल संरक्षण के होंगे। इसमें सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और सामुदायिक शौचालय के पानी का री-यूज तथा पार्कों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर क्या-क्या इंतजाम किए गए हैं। जल संरक्षण की दिशा में जितने ज्यादा प्रबंध किए गए होंगे, शहर को उतने ही अच्छे अंक मिलेंगे।

स्वच्छता सर्वेक्षण में बड़ी चुनौती

-पूरे शहर में अब तक घर-घर कचरा उठान नहीं शुरू हुआ।

-अब तक गीला व सूखा कचरा का पृथक्करण न होना।

-आर्गेनिक कचरे का प्रसंस्करण प्लांट बंद होना।

-सड़क किनारे व गलियों में पड़े मलबा का निस्तारण नहीं होना।

-शहर के कचराघर को बंद नहीं किया गया।

-रात में प्रमुख बाजारों में नहीं हो रही सफाई।

-शुद्ध पेयजल आपूर्ति अब भी दूर की कौड़ी।

-लीकेज व अन्य कारणों से 50 फीसद तक पेयजल की होती है बर्बादी।

-कुंड व तालाबों के जीर्णोद्धार की कछुआ चाल।

-पार्कों व बड़ी बिल्डिंग में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का अभाव।

-पुरानी सीवर लाइन में ओवरलोड से ओवरफ्लो के कारण बजबजाते कई इलाके।

-नई सीवर लाइन का जनोपयोगी न होने से नाले में बहती 27 हजार शौचालयों की गंदगी

-25 हजार शौचालय सोख्ता पिट पर आधारित होना।    

-जल संचयन के लिए बने स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम का फेल हो जाना।

-नगरीय सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का आनलाइन निस्तारण।

-सार्वजनिक व सामुदायिक शौचालयों में गंदगी 

स्वच्छता मिशन को लेकर सभी कर्मियों को सचेत किया गया

स्वच्छता मिशन को लेकर सभी कर्मियों को सचेत किया गया है। इसे प्राथमिकता पर रखते हुए नगर को स्वच्छ व सुंदर बनाने की कार्ययोजना नए सिरे से तैयार हो रही है।

-आरएस यादव, नगर स्वास्थ्य अधिकारी

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