विंध्य की पहाड़ियों पर रोमांचक होगा रोप-वे का सफर, दिखेगा विंध्‍य पर्वत का प्राकृतिक सौंदर्य

श्रद्धालु विंध्य की पहाड़ियों पर पूर्वांचल के पहले रोप-वे से देशभर के श्रद्धालु मां विंध्यधाम अष्टभुजा व कालीखोह के साथ ही गंगा की छटा निहारेंगे। रोमांच के शौक़ीनों के लिए विंध्य पर्वत पर बना पूर्वांचल का पहला रोप-वे प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही कौतूहल का विषय बना है।

Abhishek SharmaSun, 01 Aug 2021 04:12 PM (IST)
विंध्य पर्वत पर बना पूर्वांचल का पहला रोप-वे प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही कौतूहल का विषय बना है।

मीरजापुर [सतीश रघुवंशी]। अब श्रद्धालु विंध्य की पहाड़ियों पर पूर्वांचल के पहले रोप-वे से देशभर के श्रद्धालु मां विंध्यधाम, अष्टभुजा व कालीखोह के साथ ही गंगा की छटा निहारेंगे। रोमांच के शौक़ीनों के लिए विंध्य पर्वत पर बना पूर्वांचल का पहला रोप-वे प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही कौतूहल का विषय बना है। मां विंध्यवासिनी की वजह से दुनिया भर में प्रसिद्ध विंध्याचल धाम आने वाले श्रद्धालु अब 260 फीट की ऊंचाई से रोप-वे से रोमांच भरी यात्रा कर सकेंगे। रोप-वे अपनी कई खूबियों के साथ पर्यटकों को लुभाएगा। यहां का प्राकृतिक नजारा इतना सुहाना है कि बड़ी संख्या में दूर-दूर से पर्यटक हर साल आते हैं।

बदलते जमाने में अब पर्यटकों के बीच रोमांचक सफर काफी लोकप्रिय हो रहा है। पर्यटकों को रिझाने व विंध्य की छटा से रूबरू कराने के लिए विंध्य पर्वत पर रोप-वे का निर्माण कराया गया है, जो एक वर्ष से बनकर तैयार है। लंबे इंतजार के बाद एक अगस्त को विंध्य क्षेत्र को सावन की सौगात देने आ रहे गृहमंत्री अमित शाह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रोप-वे का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन के बाद रोप-वे का संचालन शुरू हो जाएगा। इससे श्रद्धालुओं की राह तो आसान होगी ही, साथ ही विंध्य की छटा से रूबरू कराकर रोप-वे पर्यटकों को खूब लुभाएगा। उड़ान भरने को तैयार रोप-वे का उद्घाटन न होने से यह करीब एक वर्ष से बंद पड़ा था। इससे देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं की रोप-वे की सवारी करने की हसरत अधूरी रह गई थी। अब विंध्यधाम आने वाले पर्यटक रोप-वे की सवारी कर विंध्यधाम व गंगा का संगम निहार सकेंगे। रोप-वे की केबिन में बैठ पहाड़ के शिखर से विंध्य पर्वत के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेंगे। वहीं लंगूरों, बंदरों व पक्षियों का कलरव भी महसूस कर सकेंगे।

एक वर्ष से था उद्घाटन का इंतजार : धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने 16.50 करोड़ की लागत से रोप-वे का निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल पर दिल्ली की ग्लोरियस इंपेक्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से कराया है। वर्ष 2014 से रोप-वे का निर्माण कार्य शुरू हुआ, जो फरवरी 2020 तक बनकर तैयार हो गया। तब से ही रोप-वे को उद्घाटन का इंतजार था, जो एक अगस्त को पूरा हो जाएगा।

एक केबिन में चार लोग भर सकेंगे उड़ान, टिकट शुल्क तय : रोप-वे इंचार्ज सौरभ मिश्रा ने बताया कि रोप-वे संचालन की तैयारी पूरी कर ली गई है। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस विभाग से पुलिसकर्मी तैनात हैं। रोप-वे में छह केबिन अष्टभुजा में तो चार केबिन कालीखोह में लगाए गए हैं। अष्टभुजा की लंबाई 297 मीटर व कालीखोह की लंबाई 167 मीटर है। एक केबिन में चार व्यक्ति बैठ सकेंगे। रोप-वे का टिकट शुल्क भी तय कर दिया गया है। अष्टभुजा के लिए 75 रुपये व कालीखोह के लिए 50 रुपये का टिकट खरीदना होगा। एक फेरे में 24 यात्री अष्टभुजा व 16 यात्री कालीखोह जा सकेंगे।

 

मैनुअल तरीके से सुरक्षित निकाले जा सकेंगे पर्यटक : चार सीटर रोप-वे के निर्बाध परिचालन में बिजली का प्रयोग होगा। अगर अपरिहार्य कारणों से रोप-वे रूक गया तो हवा में रुके व लटके केबिन में फंसे पर्यटकों को मैनुअल तरीके से सुरक्षित निकाले जाने की भी व्यवस्था की गई है।

 

 एक नजर

 - रोप-वे की ऊंचाई 260 फीट

 - कुल सीढ़ियां 130 अष्टभुजा व 130 कालीखोह

 - रोप-वे की लंबाई 297 अष्टभुजा व 167 मीटर कालीखोह

 - रोप-वे में ट्राली छह अष्टभुजा व चार कालीखोह

 - एक बार में सवारी 40

 - रोप-वे से सफर सात मिनट

 - टिकट का किराया 50 से 75 रुपये

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