राइट-टू-एजूकेशन : वाराणसी में 142 निजी विद्यालयों की शुल्क प्रतिपूर्ति फंसना तय

निजी विद्यालयों को राइट-टू-एजुकेशन (आरटीई) के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। इसके लिए विद्यालयों को बार-बार निर्देश भी दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद जनपद में 142 निजी विद्यालयों ने अब तक आरटीई के पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है।

Abhishek SharmaSat, 19 Jun 2021 12:03 PM (IST)
निजी विद्यालयों को राइट-टू-एजुकेशन (आरटीई) के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है।

वाराणसी, जेएनएन। प्राथमिक व जूनियर स्तर के निजी विद्यालयों को राइट-टू-एजुकेशन (आरटीई) के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। इसके लिए विद्यालयों को बार-बार निर्देश भी दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद जनपद में 142 निजी विद्यालयों ने अब तक आरटीई के पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। जबकि इन विद्यालयों में आरटीई के तहत बच्चों का मुफ्त में पढ़ रहे हैं। रजिस्ट्रेशन के अभाव में इन विद्यालयों की शुल्क प्रतिपूर्ति फंसनी तय मानी जा रही है।

निश्शुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार-2009 के तहत निजी स्कूलों में प्री-नर्सरी व कक्षा-एक में सीट के सापेक्ष 25 फीसद मुफ्त दाखिला अलाभित समूह व दुर्बल आय वर्ग के बच्चों निर्धारित करने का प्रावधान है। इसके लिए विद्यालयों को राइट-टू-एजुकेशन की वेबसाइट पर पंजीकरण करना होता है। पंजीकरण के अलावा जियो टैग मैपिंग भी अपलोड करना अनिवार्य है। इस संबंध में निजी विद्यालयों को बार-बार निर्देश भी दिया जा रहा है। निर्देश के क्रम में अब तक जनपद में 948 निजी विद्यालय आरटीई के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। खास बात यह है कि आरटीई के पोर्टल पर जियो टैग मैपिंग भी अपलोड करने वाले विद्यालयों की संख्या 1048 है। यानी 100 विद्यालयों ने जियो टैग मैपिंग करने के बाद भी रजिस्ट्रेशन नहीं कराए है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह ने ऐसे विद्यालयों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने इन विद्यालयों को आरटीई के पोर्टल पर यथाशीघ्र पंजीकरण कराने के लिए नोटिस भी दी है। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आरटीई का पाेर्टल एक बार फिर से खोला गया है। ऐसे में निजी विद्यालय 24 जून तक रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। आरटीई के जिला समन्वयक विमल कुमार केशरी ने बताया कि प्री-नर्सरी व कक्षा-एक संचालित करने वाले जनपद में मान्यता प्राप्त करीब 1250 विद्यालय है। इसमें से अब तक 948 विद्यालय ही आरटीई के पोर्टल पर रजिस्ट्रर्ड है। पोर्टल पर पंजीकरण न होने के कारण दुर्बल आय वर्ग के बच्चे इन विद्यालयों में मुफ्त दाखिले की सुविधा से वंचित हो रहे हैं।

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