काशी विश्‍वनाथ धाम कॉरिडोर परिसर स्थित अक्षयवट हनुमान मंदिर से प्रतिमा को हटाने पर महंत परिवार का विरोध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट निर्माणाधीन काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के परिसर स्थित अक्षयवट हनुमान मंदिर के हिस्से को क्षतिग्रस्त करते हुए मंगलवार की रात प्रतिमा को यथास्थान से हटा दिया गया। बुधवार की सुबह जानकारी होते ही मंदिर के महंत परिवार मौके पर पहुंचकर विरोध जताया।

Saurabh ChakravartyWed, 20 Oct 2021 09:10 PM (IST)
काशी विश्‍वनाथ धाम कॉरिडोर परिसर स्थित अक्षयवट हनुमान मंदिर

जागरण संवाददाता, वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट निर्माणाधीन विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के परिसर स्थित अक्षयवट हनुमान मंदिर के हिस्से को क्षतिग्रस्त करते हुए मंगलवार की रात प्रतिमा को यथास्थान से हटा दिया गया। बुधवार की सुबह जानकारी होते ही मंदिर के महंत परिवार मौके पर पहुंचकर विरोध जताया। महंत परिवार ने पीएसपी कंपनी और मंदिर प्रशासन पर मनमानी करने और लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना था कि श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन पर वादा खिलाफी किया है। उन्‍होंने कहा कि अधिकारियों ने जिस बात को लेकर सुंदरीकरण के लिए लिखित अग्रीमेंट किया था उससे मुकर गए है। उन्होंने सभी विग्रहों को यथास्थान करने का लिखित आश्वासन दिया था पर अब बात मानने को अधिकारी तैयार नहीं है। महंत परिवार ने मांग करते कहा कि अगर हनुमान की प्रतिमा यथास्थान विराजमान नहीं किया गया तो अब महंत परिवार आत्महत्या करने को बाध्य होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी कार्यरत पीएसपी कंपनी के जीएम और श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की होगी।

यह कोई पहली घटना

इससे पूर्व भी पीएसपी कंपनी और मंदिर प्रशासन ने मनमानी करते हुए अक्षयवट वृक्ष को ढहा दिया था, मंदिरों के छत हटाने के दौरान कल्कि भगवान, ललिता गौरी सहित कई शिवलिंग भी खंडित हो गए थे। शाम को एसडीएम वीके सिंह मौके पर पहुचे और महंतो को काफी समझाने का प्रयास किया पर बात बनी नहीं।इस वर्ष 28 अप्रैल को महंत परिवार ने अधिकारियों को अवगत कराया था कि वृक्ष और अंजनी पुत्र के विशाल विग्रह को संरक्षित और सुरक्षित रखते हुए ही कार्य किया जाए। अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि सुरक्षित और संरक्षित किया जाएगा।

यह है मान्यता

अक्षयवट वृक्ष पूरे भारत वर्ष में तीन जगह पर विराजमान है। काशी, गया और प्रयाग। महंत बच्चा पाठक, नील कुमार मिश्रा और रमेश गिरी ने संयुक्त रूप से बताया कि गया में वृक्ष के नीचे पिंडदान करने का, प्रयागराज में सिर मुंडन कराने और काशी में इसी वृक्ष के नीचे डंडी स्वामी को भोजन कराने का महात्म्य है। तीनों स्थानों पर हनुमान जी तीन स्वरूप में विराजमान हैं। गया में बैठे हैं, प्रयागराज में लेटे हैं किले के अंदर और काशी में खड़े हनुमान जी हैं।

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