महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध आयुर्वेद कालेजों में बगैर मान्यता परीक्षा कराने का दबाव

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध छह आयुर्वेद कालेज हैं। इसमें से तीन आयुर्वेद कालेजों को सीसीआइएम से मान्यता नहीं है। इसे देखते हुए विद्यापीठ प्रशासन बीएएमएस-2018-19 बैच की तीन कालेजों की परीक्षाएं अब तक नहीं कराया है।

Abhishek SharmaMon, 26 Jul 2021 06:01 AM (IST)
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध छह आयुर्वेद कालेज हैं।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध छह आयुर्वेद कालेज हैं। इसमें से तीन आयुर्वेद कालेजों को सीसीआइएम से मान्यता नहीं है। इसे देखते हुए विद्यापीठ प्रशासन बीएएमएस-2018-19 बैच की तीन कालेजों की परीक्षाएं अब तक नहीं कराया है। वहीं बीएएमएस 2015-16 बैच के चतुर्थ व्यावसायिक पाठ्यक्रम की परीक्षा कराने की तैयारी में जुटा हुआ है। इसकी भनक लगते ही मान्यता न होने वाले आयुर्वेद कालेज भी विद्यापीठ प्रशासन पर परीक्षा कराने का दबाव बनाना शुरू कर दिए हैं। इसके लिए विद्यापीठ प्रशासन के पास सिफारिश आ रही हैं। विद्यापीठ प्रशासन असमजस्य में पड़ा हुआ है।

यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले भी डा. विजय आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज (कैथी), संतुष्टि आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज (चुनार) व अपेक्स आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज (चुनार) बीएएमएस के छात्रों की परीक्षाएं कराने का विद्यापीठ प्रशासन ने कई बार अनुरोध कर चुके हैं। यही नहीं करीब डेढ़ साल पहले इन तीनों कालेजों की परीक्षाओं के संबंध में तत्कालीन कुलपति व तत्कालीन कुलसचिव राजभवन भी तलब किए गए थे। हालांकि विद्यापीठ प्रशासन द्वारा तीनाें कालेजों के मान्यता की स्थिति स्पष्ट करने के बाद राजभवन भी मौन हो गया। इसे देखते हुए तीनों कालेजों ने न्यायालय की शरण ली। इसके बावजूद तीनों कालेजों को अब तक कोई राहत नहीं मिली। तीनों कालेजों के करीब 300 छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

इससे क्षुब्ध होकर संतुष्टि आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज के छात्र पांच दिनों से सुंदरपुर स्थित संतुष्टि हास्पिटल के सामने बेमियादी धरने पर बैठे हुए हैं। पैसा वापस करने के लिए छात्रों के बढ़ते दबाव को देखते हुए परीक्षा कराने के लिए कालेज ने एक बार फिर विद्यापीठ प्रशासन ने अनुनय-विनय करने में जुटा हुआ है ताकि छात्रों का आंदोलन खत्म हो सके। वहीं विद्यापीठ के अध्यापकों का कहना है कि दबाव में यदि मान्यता के बगैर तीनों कालेजों के बीएएमएस के छात्रों की परीक्षा करा भी ली गई तो डिग्री वैध नहीं होगी। यही नहीं डिग्री जारी करने के बाद छात्रों के आंदोलन का रूख विद्यापीठ की ओर हो जाएगा। अध्यापकों ने मान्यता के बगैर परीक्षा करना छात्रों के छलावा बताया है। बहरहाल विद्यापीठ प्रशासन इस संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया है।

 

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