MLA Vijay Mishra के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की भदोही पुलिस की तैयारी, रिमांड बनने के बाद जांच

विधायक विजय मिश्र की पेशी के बाद विचाराधीन चार मामलों में कोर्ट से रिमांड बन गया है। गोपीगंज पुलिस सामूहिक दुष्कर्म सहित अन्य मामलों में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। इसके साथ ही विवेचक साक्ष्य इकट्ठा करने में जुट गया है।

Saurabh ChakravartyMon, 02 Aug 2021 07:50 AM (IST)
गोपीगंज पुलिस सामूहिक दुष्कर्म सहित अन्य मामलों में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है।

भदोही, जागरण संवाददाता। MLA Vijay Mishra विधायक विजय मिश्र की पेशी के बाद विचाराधीन चार मामलों में कोर्ट से रिमांड बन गया है। गोपीगंज पुलिस सामूहिक दुष्कर्म सहित अन्य मामलों में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। इसके साथ ही विवेचक साक्ष्य इकट्ठा करने में जुट गया है।

कालीन व्यवसायी से रंगदारी मांगने और धमकी देने के मामले में सर्वप्रथम विधायक के खिलाफ औराई में गुंडा एक्ट की कार्रवाई की गई थी। इसके पश्चात कौलापुर निवासी उनके रिश्तेदार कृष्णमोहन तिवारी ने फर्म और भूमि हड़पने के आरोप लगाया था। इस मामले में विधायक के खिलाफ संगीन धारा में मुकदमा दर्ज किया गया। 18 अगस्त 2020 को विधायक को मध्य प्रदेश के आगर जिले में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके पश्चात उनके खिलाफ ताबड़तोड़ छह मुकदमे दर्ज किया गया। दो मामलों में उनके खिलाफ चार्जशीट भी भेजी जा चुकी जबकि चार अन्य मामलों में रिमांड नहीं बनाया जा सका था।

कोरोना संक्रमण के चलते विधायक की पेशी नहीं हो सकी। दो मामलों में तो वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से रिमांड बना दिया गया था जबकि दो मामलों में कोर्ट के सामने पेश होना अनिवार्य था। 30 जुलाई को कड़ी सुरक्षा के बीच विधायक की पेशी कराई गई और कोर्ट ने न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। इसके साथ ही विवेचक अब चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में जुट गया है। मामले में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। नियमानुसार रिमांड बनने के बाद 90 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल कर देनी चाहिए। एसपी रामबदन सिंह ने बताया कि पेशी के बाद मामले की जांच चल रही है। शीघ्र ही चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।

क्रिमिनल हिस्ट्री उपलब्ध नहीं करा सकी है पुलिस

असलहा लाइसेंस के मामले में डीएम कोर्ट ने दो माह पहले ही विधायक विजय मिश्र की क्रिमिनल हिस्ट्री गोपीगंज पुलिस से तलब की है लेकिन वह अभी तक उपलब्ध नहीं करा सकी है। गुंडा एक्ट की कार्रवाई शिथिल है जबकि असलहा लाइसेंस के मामले में अभी तक नोटिस तामिल नहीं हो सकी है। जब तक कोई आपत्ति नहीं आ जाती है तब तक मामले का निस्तारण नहीं किया जा सकता है।

 

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