महामारी में फेफड़ों की ढाल बना शंखनाद और श्वासयोग का अभ्यास, वाराणसी में संगीत साधकों को मिला लाभ

कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा मौतें फेफड़े के संक्रमित होने से हुई हैैं। वायरस के फेफड़े तक पहुंचते ही आक्सीजन का स्तर घटना शुरू हो जाता है और मरीज की हालत गंभीर हो जाती है। हालांकि कोरोना संक्रमण के बाद भी उन लोगों के फेफड़े सुरक्षित रहे।

Saurabh ChakravartyTue, 22 Jun 2021 08:30 AM (IST)
नियमित शंखवादन करने पर को फेफड़ों की समस्या नहीं हुई।

वाराणसी, जेएनएन। कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा मौतें फेफड़े के संक्रमित होने से हुई हैैं। वायरस के फेफड़े तक पहुंचते ही आक्सीजन का स्तर घटना शुरू हो जाता है और मरीज की हालत गंभीर हो जाती है। हालांकि कोरोना संक्रमण के बाद भी उन लोगों के फेफड़े सुरक्षित रहे, जो श्वास संबंधी योग और अभ्यास करते हैं। ऐसे तमाम शंख वादक, संगीत साधक और साजिंदे कोरोना की चपेट में आए, मगर संक्रमण उनके फेफड़ों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सका।

नियमित शंखवादन करने वाले भी रहे सुरक्षित

बीएचयू में ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. विनय पांडेय बताते हैं कि कोरोना संक्रमित होने के बाद भी नियमित शंखवादन करने वाले पुरोहितों को फेफड़ों की समस्या नहीं हुई। वह बताते हैं कि शंखध्वनि में धाॢमक व वैज्ञानिक तथ्य निहित हैं। इससे रक्त संचरण ठीक रहता है, आरोग्यता बनी रहती है और अस्थमा बीमारी दूर होती है।

शंखनाद से पूरा परिवार रहा सुरक्षित 

दोनों पहर नियमित शंखनाद करने वाले तीर्थ पुरोहित कर्मकांडी पं. उदित नारायण मिश्र का कहना है कि शंखनाद से फेफड़ा मजबूत रहता है। बचपन में पिता श्रीदेव मिश्र के कथावाचन के दौरान हर अध्याय की समाप्ति पर मैं शंख बजाता था। तभी से आदत पड़ गई। अब पूरा परिवार नियमित रूप से पूजन-अर्चन के दौरान शंखनाद करता है। इसमें लंबी सांस खींचनी और छोडऩी पड़ती है। इससे श्वास नली व फेफड़ों की कसरत हो जाती है। शंखनाद की देन है कि हमारा परिवार महामारी में पूरी तरह सुरक्षित रहा।

बंगीय परिवारों में खास है महिलाओं का शंख बजाना

बंगाली टोला में निवास करने वाली बंग समाज की महिलाएं प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा-अर्चना के बाद शंखनाद करती हैं। कई बंगाली परिवार की महिलाओं को कोरोना हुआ लेकिन नियमित शंखवादन के अभ्यास के कारण किसी की तबीयत ज्यादा गंभीर नहीं हुई। महिला समिति से जुड़ीं शरबाणी धारा, तनुश्री मुखर्जी और पूॢणमा दास के मुताबिक शंख बजाने से न केवल फेफड़े स्वस्थ रहते हैं, नियमित अभ्यास करने वालों के शरीर में आक्सीजन की कमी भी नहीं होती।

ट्रंपेट वादकों में कोरोना से नहीं हुआ कोई बीमार

ट्रंपेट (तुरही) वादक रियाज हाशमी उर्फ बंटी ने बताया कि जिले में लगभग 3000 ट्रंपेट व ब्रास वादक हैं। ये लोग विभिन्न बैंड पार्टियों में कार्यरत हैं। इनमें से 10 फीसद जिले के ही हैं। अभी तक किसी के कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की जानकारी नहीं है।

नियमित व्यायाम करने वाले सामान्य लोगों की तुलना में स्वस्थ भी जल्दी होते हैं

कोरोना संक्रमण उनमें भी हुआ जो फेफड़े का नियमित व्यायाम करते रहे हैं। हां, इतना जरूर है कि नियमित व्यायाम करने वाले सामान्य लोगों की तुलना में स्वस्थ भी जल्दी होते हैं।

-डा. एके सिंह, फेफड़ा रोग विशेषज्ञ, मंडलीय अस्पताल, कबीरचौरा

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