बलिया राजकीय बालिका गृह से भागीं बालिकाओं को पुलिस ने दो घंटे में किया बरामद, लापरवाही में छह कर्मी निलंबित

बलिया राजकीय बालिका गृह निधरिया से मंगलवार की आधी रात के बाद करीब दो बजे 12 बालिकाएं भाग गईं। पुलिस की तत्परता से उन्हें दो घंटे में रोडवेज और बलिया रेलवे स्टेशन से बरामद कर लिया गया। सभी बालिकाएं राजकीय बालिका गृह में हैं।

Saurabh ChakravartyWed, 21 Jul 2021 07:53 PM (IST)
राजकीय बालिका गृह निधरिया से मंगलवार की आधी रात के बाद करीब दो बजे 12 बालिकाएं भाग गईं।

बलिया, जागरण संवाददाता। राजकीय बालिका गृह निधरिया से मंगलवार की आधी रात के बाद करीब दो बजे 12 बालिकाएं भाग गईं। पुलिस की तत्परता से उन्हें दो घंटे में रोडवेज और बलिया रेलवे स्टेशन से बरामद कर लिया गया। सभी बालिकाएं राजकीय बालिका गृह में हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी समर बहादुर सरोज ने बताया कि प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए लापरवाही बरतने वाले चार होमगार्ड और दो विभागीय कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है।

राजकीय बालिका गृह में बालिकाओं की सुरक्षा व्यवस्था में दो महिला व दो पुरुष होमगार्ड के साथ दो विभागीय कर्मचारियों की ड्यूटी लगायी गयी थी। रात में अचानक 12 बालिकाओं के भागने के बाद वहां की अधीक्षक ने तत्काल पुलिस अधिकारियों को सूचित किया। पुलिस ने रोडवेज और रेलवे स्टेशन से इन सभी बालिकाओं को बरामद कर राजकीय बालिका गृह पहुंचा दिया।

प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी अदिति सिंह ने घटना की जांच के लिए एसडीएम सदर जुनैद अहमद व जिला प्रोबेशन अधिकारी समर बहादुर सरोज की समिति गठित कर दी है। तत्काल रिपोर्ट देने के निर्देश जारी हुआ है। जांच में ड्यूटी पर तैनात महिला होमगार्ड रमावती देवी व लीला देवी तथा दो पुरुष होमगार्ड हंसराज यादव व छोटेलाल यादव के अलावा दो विभागीय कर्मचारी राजेश व बीरबल यादव प्रथम दृष्टया दोषी मिले हैं। इन सभी को निलंबित कर विभागीय कार्यवाही के लिए निदेशक, महिला कल्याण व जिला कमांडेंट होमगार्ड को पत्र लिखा है।

फांदी छह फीट ऊंची दीवार, वाहन नहीं मिलने से फंसी

राजकीय बालिका गृह निधरिया से मंगलवार की आधी रात के बाद करीब दो बजे 12 भागीं बालिकाओं के दो घंटे में मिल जाने के बाद प्रशासन ने जरूर राहत की सांस ली है। अगर इन्हें रोडवेज व बलिया रेलवे स्टेशन पर जाने का साधन मिल गया होता तो वह दूर निकल गईं होतीं। इन सभी ने पहले से ही भागने की याेजना बनाई थी। इसकी भनक लापरवाह स्टाफ व सुरक्षा कर्मचारियों को नहीं हो सकी। इसलिए इन सभी ने भागने का समय आधी रात के बाद का चुना। वे सभी बालिका गृह की छह फीट ऊंची दीवार फांदने में सफल हो गई। वह सुनसान इलाकों से निकलकर पैदल ही रोडवेज बस स्टेशन व बलिया रेलवे स्टेशन तक पहुंच गईं। इनकी सुरक्षा व्यवस्था में दो महिला व दो पुरुष होमगार्ड के साथ दो विभागीय कर्मचारियों की ड्यूटी लगायी गयी थी। इसके बाद भी इन सभी वहां से निकलना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

कहीं खराब व्यवस्था तो नहीं बना असंतोष का कारण

सवाल यह है कि आखिर यह बालिकाएं वहां से भागने को मजबूर क्यों हुईं। वहां की ढीली ढाली व्यवस्था और खराब गुणवत्ता की खाद्य सामग्री का मिलना बालिकाओं के बीच असंतोष का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। इधर प्रशासनिक अमले के बड़े अफसर कई महीनों से इस निराश्रित बालिकाओं के हाल जानने तक नहीं पहुंचे हैं। पहले आकांक्षा समिति की महिला सदस्य इन निराश्रित बालिकाओं के बीच पहुंचतीं थी।, उनके साथ वह कुछ समय साझा करतीं थीं। बालिकाओं को ठीक गुणवत्ता का भोजन व अन्य मूलभूत सुविधाएं मिलती है या नहीं, यह जानने का प्रयास नहीं हुआ।

 

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