होली पर वाराणसी के लोग नहीं चख सके पराग डेयरी के खोवा की गुझिया, अभी भी खोवा बनाने की मशीन का इंतजार

वाराणसी के रामनगर में पराग डेयरी फैक्‍टरी।

होली का दिन हो और गुझिया का स्वाद न मिलेऐसा कभी नहीं होता। लेकिन इस बार लोग पराग डेयरी के खोवा की गुझिया नहीं चख सके। अभी भी डेयरी को खोवा बनाने की मशीन का इंतजार है। जबकि दूध से पाउडर बनाने की योजना अंतिम रूप में ही थी।

Saurabh ChakravartyTue, 30 Mar 2021 04:36 PM (IST)

वाराणसी [संजय यादव]। होली का दिन हो और गुझिया का स्वाद न मिले,ऐसा कभी नहीं होता। लेकिन इस बार लोग पराग डेयरी के खोवा की गुझिया नहीं चख सके। अभी भी डेयरी को खोवा बनाने की मशीन का इंतजार है। जबकि दूध से पाउडर बनाने की योजना अंतिम रूप में ही थी कि किसी कारणवश शासन स्तर से रोक लग गई। इस वजह से डेयरी में मशीन आने के बावजूद लगाया नहीं जा सका। संयंत्र लगने से पाउडर बनाने के लिए दूध को कानपुर नहीं भेजा जाएगा।इससे ट्रांसपोर्ट का खर्च बचेगा और आय में वृद्धि होगी। हालांकि भविष्य में दूध की मांग को पूरा करने के लिए पराग ने 40 मिट्रीक टन मिल्क पाउडर का स्टाक बना रखा है।

डेयरी में लगभग 20 हजार लीटर दूध दुग्ध समितियों से, आठ हजार लीटर दूध आसपास के जनपदों से आता है। 15 हजार लीटर दूध को शहरी क्षेत्रों में बेचा जाता है। नाबार्ड वित्तीय सहयोग से दुग्धशाला परिसर में 4.0 लाख लीटर क्षमता की नवीन ग्रीन फील्ड डेयरी की स्थापना हुई है। नवीन प्लांट में पाउडर प्लांट की स्वीकृत नहीं मिल सकी। प्लांट लगने से कई सुविधाएं बढ़ जाएगी। पूर्वांचल के आसपास के पराग से भी दूध से पाउडर बनाने के लिए दूध यहां पहुंचेगा। आसपास के जनपदों का भी दूध यही आने लगेगा।

पिछले साल की तुलना मे ज्यादा बिक्री का है अनुमान

इस बार होली पर्व पर पराग की बिक्री पिछले साल हुई  बिक्री से ज्यादा की मांग होने से पराग के अधिकारी काफी उत्साहित है। पराग के अधिकारियों ने बताया किअभी तक विभिन्न क्षेत्रों से आया मांग पिछले साल की तुलना में ज्यादा है।इस बार होली पर्व पर तीस हजार लीटर दूध, 250 लीटर मट्ठा, 100 लीटर लस्सी, 250 किलोग्राम दही, 250 लीटर छाछ और 300 किलो पनीर आदि की आपूर्ति की मांग है।विगत वर्ष 27 हजार लीटर दूध, 200 लीटर मट्ठा, 75 लीटर लस्सी, 210 किलो दही, 200 लीटर छाछ, 250 किलो पनीर की आपूर्ति हुई थी।

खोवा मशीन की भी पराग में आवश्यकता है

पाउडर प्लांट के लग जाने से कई तरह से मुनाफे होंगे। खोवा मशीन की भी पराग में आवश्यकता है। वैसे हर व्यवस्था से शासन को अवगत करा दिया गया है। शीघ्र ही काम होने की उम्मीद है।

- डा. एके शर्मा, जीएम, पराग डेयरी रामनगर

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