यात्रीगण कृपया ध्‍यान दें, ट्रेन के पायदान पर यात्रा करने पर 5000 रुपये जुर्माना ही नहीं कारावास भी

रेलवे विभाग द्वारा यात्रियों को जागरुक करने का अभियान चलाया जाता है। वहीं बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनों के पायदान पर बैठकर यात्रा कर रेलवे नियमों को मुंह चिढ़ा रहे है। यह हाल तब है जब निरंतर ट्रेनों से गिरकर मौत की खबरें आम हो गई हैं।

Abhishek SharmaSat, 25 Sep 2021 10:40 AM (IST)
रेलवे विभाग द्वारा यात्रियों को जागरुक करने का अभियान चलाया जाता है।

गाजीपुर, जागरण संवाददाता। एक तरफ रेलवे विभाग द्वारा यात्रियों को जागरुक करने का अभियान चलाया जाता है। वहीं बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनों के पायदान पर बैठकर यात्रा कर रेलवे नियमों को मुंह चिढ़ा रहे है। यह हाल तब है जब निरंतर ट्रेनों से गिरकर मौत की खबरें आम हो गई हैं। ऐसे में ट्रेनों में चलने वाले स्कार्ट में यात्रियों को पायदान पर बैठ यात्रा न करने की नसीहत नहीं देता है।

स्थानीय रेलवे स्टेशन आदर्श रेलवे स्टेशन श्रेणी का दर्जा प्राप्त है, लेकिन यहां पर नियमों का अनदेखी आए दिन देखने को मिलता है। दूर से आने वाली ट्रेनों के जनरल और स्लीपर बोगी में यात्री पायदान पर यात्रा करते हुए नजर आते हैं। इन यात्रियों को जीआरपी और आरपीएफ के जवानों का भी भय नहीं होता है। जबकि, बीते दिनों के मामले जांचे जाएं तो ट्रेन से गिरकर डेढ़ दर्जन से अधिक यात्रियों की मौत होने की घटना हो चुकी है। इसके बाद भी यात्रियों द्वारा सतर्कता नहीं बरती जा रही है।

हकीकत यह है कि ट्रेनों में चलने वाला स्कार्ट भी पायदान पर बैठ यात्रा करने वाले यात्रियों की देख अपना मुंह मोड़ लेते हैं। जिससे उनके हौसले और बुलंद हो जाते हैं। इन हालातों में प्रतिदिन रेलवे नियमों का उल्लंघन हो रहा है, लेकिन विभागीय अफसर सबकुछ जानकर अंजान बने बैठे हैं। पूर्व में पायदान पर बैठ यात्रा करने वाले यात्रियों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की गई थी, रेलवे एक्ट के तहत पायदान पर बैठ यात्रा करने वाले यात्रियों से पांच हजार रुपए तक जुर्माना और तीन माह का कारावास भी हो सकता है।

दिव्यांग व महिला कोच पर भी कब्जा : ट्रेनों में दिव्यांग व महिला कोच में भी यात्रियों का कब्जा रहता है। रेलवे के बार बार अभियान चलाने के बाद भी यात्री इन कोचों को नहीं छोड़ रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी महिला यात्रियों को यात्रा के दौरान होती है। महिला कोच में पुरुष यात्रियों का कब्जा रहता है। आरपीएफ द्वारा कई बार अभियान चलाकर पुरुष यात्रियों के ऊपर कारवाई होती रहती है फिर भी पुरुष यात्री महिला कोच को नहीं छोड़ते हैं।

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