बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में पेंक्रियाज क्लिनिक शुरू, लिवर संबंधी उपचार की भी जल्‍द शुरुआत

Pancreas clinic Start In BHU चिकित्सा विज्ञान संस्थान काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के गैस्ट्रोएंट्रोलाजी विभाग की ओर से शुक्रवार को सर सुंदरलाल अस्पताल में पेंक्रियाज क्लिनिक शुरू की गई। इसका शुभारंभ विभाग के अध्यक्ष प्रो. वीके दीक्षित ने किया।

Abhishek SharmaFri, 17 Sep 2021 05:01 PM (IST)
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के गैस्ट्रोएंट्रोलाजी विभाग की ओर से शुक्रवार को सर सुंदरलाल अस्पताल में पेंक्रियाज क्लिनिक शुरू की गई।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के गैस्ट्रोएंट्रोलाजी विभाग की ओर से शुक्रवार को सर सुंदरलाल अस्पताल में पेंक्रियाज क्लिनिक शुरू की गई। इसका शुभारंभ विभाग के अध्यक्ष प्रो. वीके दीक्षित ने किया।

प्रो. दीक्षित ने बताया कि यह क्लिनिक प्रत्येक शुक्रवार को सर सुन्दरलाल चिकित्सालय स्थित ओपीडी कक्ष क्रमांक 305 में सुबह 11.00 बजे से अपरान्ह दो बजे तक संचालित होगी। इस क्लिनिक का संचालन विभाग के असिस्टेन्ट प्रोफेसर डा. अनुराग तिवारी द्वारा किया जाएगा। इस क्लिनिक के जरिए मरीजों के पेन्क्रियाज ग्रन्थि से सम्बन्धित बीमारियों का इलाज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की क्लिनिक को संचालित करने का निर्णय इसलिए लिया गया ताकि पेन्क्रियाज से सम्बन्धित मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श दिलाकर रोग को सुचारु रुप से उपचार एक ही स्थान पर किया जा सके।

इसके पूर्व गैस्ट्रोएंट्रोलाजी विभाग के असोसिएट प्रोफेसर डा. देवेश प्रकाश यादव के मार्ग दर्शन में गत एक वर्ष से प्रत्येक बृहस्पतिवार को चिकित्सालय के कक्ष क्रमांक 302 में सुबह 11.00 से दो बजे तक इन्फ्लामेट्री बावेल डिजीज (आईबीडी) क्लिनिक संचालित की जाती है। इसके जरिए गुदाद्वार से रक्त निकलने सम्बन्धी जान लेवा रोग का उपचार किया जाता है। विभाग द्वारा शीघ्र ही यकृत (लिवर) सम्बन्धी गंभीर रोगों के उपचार से सम्बन्धित स्पेशल क्लिनिक भी डा. विनोद यादव की विशेषज्ञता में संचालित किया जाना प्रस्तावित है। आज प्रातः सम्पन्न पेन्क्रियाज क्लिनिक के उदघाटन अवसर पर प्रो. वी.के. दीक्षित, प्रो. एस.के. शुक्ला, डा. देवेश प्रकाश यादव, डा. विनोद यादव तथा डा. अनुराग तिवारी आदि मौजूद थे।

चिकित्सा अधीक्षक, सर सुन्दरलाल चिकित्सालय, द्वारा अधिसूचित किया गया है कि स्पेशल वार्ड बी, ऊपरी ब्लॉक, (प्रथम तल) जिसे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के उन स्वास्थ्यकर्मियों के लिए रखा गया था, जिन्हें कोविड 19 के कारण आइसोलेशन की आवश्यकता थी, तत्काल प्रभाव से सभी मरीजों के लिए चालू कर दिया गया है। आधिकारिक अधिसूचना संलग्न की जा रही है। प्रो. बीआर मित्तल ने कहा कि फिजियोथेरेपी हड्डी रोग हो या नर्व रोग के साथ ही खेल के दौरान लगने वाली चोटों से निजात दिलाता है। इसमें करियर बनाने की संभावना आगे आने वाले भविष्य काफी अच्छी रहेगी। अस्थि रोग और सर्जरी के उपरांत मरीज को फिजियोथेरेपी ही उसे वापस बेहतर बना सकती है और उसे अपने कदमों पर चला सकती है। वहीं लिगामेंट इंजुरी, फ्रैक्चर आदि की सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी की भूमिका सबसे अहम हाे जाती है।

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