महंगी हुई धान की किसानी, खेती की लागत करीब 35 से 40 फीसद बढ़ गई

डीजल बिजली खाद बीज और कीटनाशकों के दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि ने धान की खेती करने वाले किसानों की हालत खराब कर दी है। इन सभी चीजों के दामों में हुई बढ़ोत्तरी से खेती की लागत करीब 35 से 40 फीसद बढ़ गई है।

Saurabh ChakravartyWed, 28 Jul 2021 08:10 AM (IST)
खेती की लागत करीब 35 से 40 फीसद बढ़ गई है।

वाराणसी, सौरभ पांडेय। डीजल, बिजली, खाद, बीज और कीटनाशकों के दाम में हुई बेतहाशा वृद्धि ने धान की खेती करने वाले किसानों की हालत खराब कर दी है। इन सभी चीजों के दामों में हुई बढ़ोत्तरी से खेती की लागत करीब 35 से 40 फीसद बढ़ गई है। किसान बता रहे हैं कि जुलाई बीतने को है महंगाई के कारण इस बार लगभग 20 फीसद किसान धान की बोआई नहीं किए हैं। लागत के हिसाब से फसल का दाम नहीं मिलने के कारण किसानों को खेती अब घाटे का सौदा लग रहा है। महंगाई के हिसाब से किसानों के लिए कोई राहत योजना भी सरकार की ओर से नहीं लाई गई है।

इंद्रदेव पर टिकी है किसानों की उम्मीद

सथवां गांव के किसान आनंद पांडेय बताते हैं कि परंपरागत खेती को छोड़कर अब किसान वाणिज्यिक खेती पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। कारण की उसमें लागत कम और मुनाफा ज्यादा है। रही बात धान की खेती के लिए तो कम से कम तीन बार खेत की जोताई करनी पड़ती है। समय-समय खेत की भराई करनी पड़ती है। आषाढ़ महीने में हुई वर्षा और उसके बाद हो रही तेज धूप धान की खेती के लिए नुकसानदायक है। अब मंगलवार को बारिश तो हुई, लेकिन किसानों को अब भी इंद्रदेव का ही सहारा है। यदि आगे भी जमकर बरसात नहीं हुई तो पंप से सिंचाई करना होगा। इसके बाद भी फसल अच्छी नहीं हुई तब लागत निकालना मुश्किल हो जाएगा।

एक वर्ष में बढ़ गया 15 सौ रुपये प्रतिबीघा लागत

किसान बता रहे हैं कि महंगाई के कारण इस समय एक बीघा धान के फसल की लागत चार से पांच हजार रुपये तक आ रही है। जबकि गत वर्ष यह लागत ढाई से तीन हजार थी।

कीमतें कुछ इस तरह चढी

73 रुपये प्रति लीटर था गत वर्ष डीजल जुलाई में

91 रुपये प्रति लीटर है डीजल वर्तमान में

800 रुपये खेत जोताई की मजदूरी थी गत वर्ष

1200 रुपये खेत जोताई की मजदूरी हो गई है इस वर्ष

50 फीसद बढ़ गई खेत जोताई की मजदूरी एक वर्ष में

600 रुपये था गत वर्ष सिंचाई का किराया

780 रुपये हो गया है अब सिंचाई का किराया

30 फीसद एक वर्ष में बढ़ गया सिंचाई का किराया

500 रुपये था गत वर्ष बोआई की मजदूरी

600 रुपये हो गई है अब बोआई की मजदूरी

20 फीसद की हुई बढ़ोत्तरी बोआई की मजदूरी में एक वर्ष में

200 रुपये कटाई की भी मजदूरी बढ़ने का किसानों को है अनुमान

60 रुपये थी मजदूरी कीटनाशक दवाओं के स्प्रे की गत वर्ष

80 रुपये मजदूरी हो गई है कीटनाशक दवाओं के स्प्रे की इस वर्ष

32 फीसद बढ़ गई है एक वर्ष में कीटनाशक स्प्रे की मजदूरी

15 फीसद बढ़ गईं एक वर्ष में पेस्टीसाइड और हर्बीसाइड की कीमतें

कीमतें बढ़ने से खेती की लागत बढ़ी

निश्चित रूप से ईंधन, खाद, बिजली, सिंचाईं और मजदूरी की कीमतें बढ़ने से खेती की लागत बढ़ी है। फिलहाल किसानों को इससे राहत देने के लिए कोई योजना सरकार के द्वारा नहीं लाई गई है।

एके सिंह, उप कृषि निदेशक

 

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