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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में जब तक परीक्षा नहीं, तब तक स्नातक व स्नातकोत्तर में आवेदन का मौका

परीक्षा फार्म की तिथि बार-बार बढ़ाने के दबाव से भी विद्यापीठ प्रशासन मुक्त हो गया

विद्यापीठ प्रशासन मार्च के अंतिम सप्ताह से परीक्षाएं शुरू कराने का निर्णय भी लिया था। कोरोना महामारी ने परीक्षाओं पर ब्रेक लगा दिया। हालांकि परीक्षा फार्म भरे जाने का क्रम जारी है। परीक्षार्थी तब तक 1000 विलंब शुल्क के साथ परीक्षा फार्म भर सकते हैं।

Saurabh ChakravartyWed, 12 May 2021 06:22 PM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। कोरोना महामारी के चलते विश्वविद्यालयों में स्नातक व स्नातकोत्तर की परीक्षाओं की तिथि को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के स्नातक वार्षिक परीक्षा के लिए फार्म भी भरे जा चुके हैं। विद्यापीठ प्रशासन मार्च के अंतिम सप्ताह से परीक्षाएं शुरू कराने का निर्णय भी लिया था। कोरोना महामारी ने परीक्षाओं पर ब्रेक लगा दिया। हालांकि परीक्षा फार्म भरे जाने का क्रम जारी है। जब तक परीक्षाएं शुरू नहीं होती है। परीक्षार्थी तब तक 1000 विलंब शुल्क के साथ परीक्षा फार्म भर सकते हैं।

विश्वविद्यालय के तमाम छात्र अंतिम तिथि तक परीक्षा फार्म नहीं भरते थे। जैसे ही अंतिम तिथि समाप्त हो जाती थी। कोई बीमारी तो कोई अन्य कारणों का हवाला देते हुए परीक्षा फार्म की तिथि बढ़ाने के लिए अनुरोध करता था। छात्रहित में कई बार अंतिम तिथि बढ़ानी पड़ती थी। इसके बावजूद छात्रों के आदत में सुधार नहीं आ रहा था। इसे देखते हुए इस बार विद्यापीठ प्रशासन ने एक हजार रुपये विलंब शुल्क के साथ परीक्षा होने की तिथि तक छात्रों को ऑनलाइन परीक्षा फार्म भरने का मौका दे दिया गया है। अब यदि छात्रों को विलंब शुल्क से बचना है तो अगले सत्र से समय से छात्र परीक्षा फार्म भर देंगे। कहा कि सभी छात्रों के लिए एक समान नियम बनाए जाने से असंतोष भी खत्म हो गया। विद्यापीठ प्रशासन के इस फैसले से वाराणसी ही नहीं चंदौली, भदोही, मीरजापुर व सोनभद्र के सैकड़ों छात्रों को राहत मिलनी तय है। वहीं अब परीक्षा फार्म की तिथि बार-बार बढ़ाने के दबाव से भी विद्यापीठ प्रशासन मुक्त हो गया।

काशी विद्यापीठ व संस्कृत विश्वविद्यालय में सत्यापन लंबित

परिषदीय प्राइमरी स्कूलों में 69000 शिक्षक भर्ती के तहत जनपद में रिक्त 230 शिक्षकों के सापेक्ष 205 अध्यापकाें की नियुक्ति जनवरी में ही हुई थी। फरवरी के प्रथम सप्ताह में 203 शिक्षकों को विद्यालय भी अावंटित कर दिए गए है। ज्वाइन करने के तीन माह बाद अब तक 103 शिक्षकों के अंकपत्रों व प्रमाणपत्रों का सत्यापन नहीं हो सका है। सत्यापन के फेर में इन शिक्षकों का वेतन अब तक फंसा हुआ है। जनपद में 205 शिक्षकों की नियुक्ति एक साथ हुई थी। जबकि 100 अध्यापकों के प्रमाणों पत्रों का सत्यापन करा लिया गया है। किन्हीं कारणवश दो शिक्षकों को अब तक विद्यालय आवंटित नहीं किया जा सकता है। वहीं सत्यापन के अभाव में 103 शिक्षकों के वेतन अटका हुआ है।

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