वाराणसी में मालवीय पुल के नीचे सुंदरीकरण की बाधा दूर, कमिश्नर ने रेलवे अफसरों से वार्ता कर दिया आदेश

कमिश्नर व स्मार्ट सिटी कंपनी के अध्यक्ष दीपक अग्रवाल ने मंगलवार को खिड़किया घाट का स्थलीय निरिक्षण किया। इस दौरान नगर आयुक्त व स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ गौरांग राठी भी मौजूद थे। खिड़किया घाट पुनर्विकास किया जा रहा है।

Saurabh ChakravartyTue, 15 Jun 2021 10:14 PM (IST)
वाराणसी के खिड़किया घाट का निरीक्षण करते मंडलायुक्त तथा अन्य अधिकारीगण

वाराणसी, जेएनएन। कमिश्नर व स्मार्ट सिटी कंपनी के अध्यक्ष दीपक अग्रवाल ने मंगलवार को खिड़किया घाट का स्थलीय निरिक्षण किया। इस दौरान नगर आयुक्त व स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ गौरांग राठी भी मौजूद थे। खिड़किया घाट पुनर्विकास किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए कार्यदायी संस्था व संबंधित विभागों से चर्चा की गई। घाट पर गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) द्वारा निर्माणाधीन सीएनजी गैस स्टेशन का निरिक्षण किया गया। समीप स्थित मालवीय पुल के संबंध में रेलवे के अधिकारियों से वार्ता हुई। इसके बाद कमिश्नर ने मालवीय पुल के नीचे के हिस्से में परियोजना अंतर्गत कार्य कराने के लिए निर्देशित किया। घाट के उचित रखरखाव के लिए योजना बनाने के लिए कहा। साथ ही जनसुविधा के आशय से घाट पर कीओस्क फूड स्टाल, प्रसाधन का उचित संख्या में निर्माण के लिए आदेशित किया। स्मार्ट सिटी योजना के तहत खिड़किया घाट का पुनर्विकास एक नवीन पर्यटन स्थल के रूप कराया जा रहा है। खिड़किया घाट के पुनर्विकास में कराए जा रहे कार्यों की विशेषताओं में सीएनजी नावों के लिए फिलिंग स्टेशन, वाहन पार्किंग, पर्यटन सुविधा केंद्र, टिकट बूथ, कैफेटेरिया, बच्चों के लिए प्ले जोन, एम्फीथियेटरए ओपन थिएटर, पब्लिक प्रोमिनार्ड वॉल आर्ट व म्यूरलए, सेल्फी पॉइंट, योग व मेडिटेशन स्पेस आदि पूरा हो गया है।

स्मार्ट सिटी के तहत वाराणसी शहर का चयन होने के बाद से लागू है जीरो होर्डिंग पालिसी 

नगर की सुंदरता में बेतरतीब लगे विज्ञापन दाग साबित हो रहे हैं। इसमें जहां निजी कंपनियां व राजनीतिक दलों से जुड़े लोग जिम्मेदार हैं तो वहीं, नगर निगम प्रशासन भी पीछे नहीं है। जिस अंधरापुल के समानांतर गुजरे फ्लाइओवर को सुंदर बनाने के लिए दक्ष कलाकारों से पेंटिंग कराकर खूबसूरत चित्रकारी कराई गई थी उसी पर एक कंपनी का विज्ञापन लगा दिया गया है। खास यह कि इस बोर्ड पर स्मार्ट सिटी कंपनी का भी नाम लिखा है। आश्चर्य यह है कि इसकी जानकारी विज्ञापन प्रभारी पीके द्विवेदी को तब तक नहीं थी जब तक इस संदर्भ में उनसे बात नहीं हुई। किसके आदेश से यह विज्ञापन लगाया गया, इसकी जानकारी वे नहीं दे सके। दागनुमा विज्ञापन का प्रदर्शन को लेकर अंधरापुल का प्रकरण एक नजीर मात्र है। शहर में कई ऐसे स्थान हैं जहां पर अवैध रूप से होर्डिंग व पोस्टर लगाए गए हैं।

कई ऐसे ऐतिहासिक मंदिर हैं जिनकी सुंदरता इन विज्ञापनों ने छिप जाती है। बता दें कि जब से वाराणसी को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल किया गया है तब से जीरो होर्डिंग पालिसी लागू हो गई है। इसके तहत मनमाने तरीके से बेरतीब विज्ञापनों का प्रदर्शन नहीं किया जा सकता। तय है कि विज्ञापन वही लगाए जाएंगे जिसकी अनुमति नगर निगम की ओर से दी जाएगी। इस दौरान इसका ख्याल रखा जाएगा कि जहां विज्ञापन लगाया जा रहा है वहां की खुबसूरती के साथ ही उसकी ऐतिहासिकता व भव्यता प्रभावित न हो। अब अंधरापुल पर प्रदर्शित विज्ञापन की बात करें तो इसके लिए यदि स्मार्ट सिटी ने अनुमति दी भी है तो ऐसे प्रदर्शन नहीं किया जाए? सकता जिससे खूबसूरती बढ़ाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर स्मार्ट सिटी योजना में कराई गई पेंटिंग ढक जाए।

 

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