अब बैंक के माध्यम से मिलेगा वेतन, वित्तविहीन विद्यालयाें के शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए शासनादेश जारी

कोविड काल के नाम पर तमाम वित्तविहीन विद्यालय शिक्षकों को वेतन देने में हीलाहवाली कर रहे हैं। जबकि बच्चों के अभिभावकों से नियमित शुल्क भी वसूल रहे हैं। इसको लेकर सूबे के कुछ शिक्षकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी।

Saurabh ChakravartyThu, 16 Sep 2021 04:29 PM (IST)
वित्तविहीन विद्यालयाें के शिक्षकों व कर्मचारियों को अब वेतन बैंक के माध्‍यम से मिलेगा।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। कोविड काल के नाम पर तमाम वित्तविहीन विद्यालय शिक्षकों को वेतन देने में हीलाहवाली कर रहे हैं। जबकि बच्चों के अभिभावकों से नियमित शुल्क भी वसूल रहे हैं। इसको लेकर सूबे के कुछ शिक्षकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए सूबे के सभी स्ववित्तपोषित विद्यालयों से बैंक के माध्यम से शिक्षकों को वेतन देने का निर्देश दिया है। यही नहीं शासन इस संबंध में शासनादेश भी जारी किया है। सूबे के सभी डीआइओएस से इसका कड़ाई से अनुपालन कराने का निर्देश दिया गया है।

इस क्रम में सह जिला विद्यालय निरीक्षक शिवपूजन द्विवेदी ने जनपद के सभी अशासकीय सहायता प्राप्त, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त, यूपी बोर्ड, सीबीएसई, सीआइएससीई व संस्कृत बोर्ड के विद्यालयों के प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों को निर्देश भी जारी किया है। इसमें कहा गया है कि गत 20 मई को जारी शासनादेश सभी को विद्यालयों से शुल्क को विनियमित करने व विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वेतन व पारिश्रमिक का भुगतान का आदेश दिया गया था। यही नहीं छात्रों से शुल्क लेने पर भी रोक नहीं लगाई गई थी।

इस क्रम में विद्यालय छात्रों से फीस ले रहे हैं। वहीं कतिपय निजी संस्थान बच्चों से पूर्ण शुल्क वसूल रहे हैं। इसके बावजूद वह शिक्षकों व अन्य स्टाफ को पूर्ण वेतन का भुगतान नहीं कर रहे हैं। इसे देखते हुए शासन ने विद्यालयों में तैनात शिक्षकों व अन्य स्टाफ के वेतन का भुगतान के संबंध में दो सितंबर काे एक शासनादेश भी जारी किया है। इसमें शिक्षकों व कर्मचारियों को अब बैंक के माध्यम से वेतन देने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत विद्यालयाें को अब प्रतिमाह चेक व सीधे संबंधित शिक्षकों व कर्मचारियों के खाते में वेतन स्थानांतरण करना होगा। सह जिला विद्यालय निरीक्षक ने सभी बोर्डों के विद्यालयों को इसका कड़ाई से अनुपालन करने का निर्देश दिया है। जनपद में करीब यूपी बोर्ड, सीबीएसई, सीआइएससीई व संस्कृत बोर्ड के करीब 500 स्ववित्तपोषित विद्यालयों करीब 5000 शिक्षक व कर्मचारी नियुक्त हैं। शासन के इस फैसले से स्ववित्तपोषित संस्थानों के शिक्षकों व कर्मचारियों को राहत मिलनी तय है।

 

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