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अब महाविद्यालयों के 302 शिक्षकों की तैयार हो रही कुंडली, नियुक्ति की जांच शुरू

वाराणसी, जेएनएन। शासन के निर्देश पर विश्वविद्यालयों-महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की भी जांच शुरू हो गई है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध 302 शिक्षक रडार हैं। इसमें चार राजकीय महाविद्यालयों के 52 अध्यापक व आठ अनुदानित महाविद्यालयों के 250 शिक्षक शामिल हैं। जांच समिति इनकी कुंडली तैयार करने में जुटी है।

सचिव क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी और समिति के सदस्य डा. ज्ञान प्रकाश वर्मा महात्मा गांधी विद्यापीठ व इससे संबद्ध कालेजों तथा संस्कृत विश्वविद्यालय में नियुक्त शिक्षकों का विवरण एकत्र करने में जुटे हुए हैं। तीन दिन बंद रहने के कारण उन्होंने विद्यापीठ से शिक्षकों का विवरण नहीं मांगा है। हालांकि विश्वविद्यालय से संबद्ध 12 राजकीय और अशासकीय महाविद्यालयों से निर्धारित प्रारूप पर शिक्षकों का विवरण देने को कहा गया है। इसमें शिक्षकों की नियुक्ति, चयन प्रक्रिया, शैक्षिक योग्यता सहित अन्य तमाम बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी हैं। इस क्रम में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रारूप में शिक्षकों का विवरण देने को कहा गया है।

तीन अलग-अलग समिति गठित

विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के अध्यापकों के अभिलेखों की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग ने सूबे के समस्त जिलों में अलग-अलग समिति गठित की है। इस क्रम में जिले में एडीएम (सिटी) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एक मुख्य समिति गठित की गई है। इसमें पुलिस अधीक्षक (क्राइम) सदस्य बनाए गए हैं। वहीं क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी समिति के सदस्य सचिव हैं। इसके अलावा दो उप समिति भी गठित की गई है।

दो उप समिति भी बनाई गईं

एसीएम (द्वितीय) की अध्यक्षता में गठित उप समिति विश्वविद्यालयों व राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों का अभिलेख जांच कर रही है। इस समिति में राजकीय महाविद्यालय के वरिष्ठ प्रवक्ता अनंत व्रत पांडेय व राधेश्याम वर्मा सदस्य बनाए गए हैं। अनुदानित महाविद्यालयों के अध्यापकों की जांच के लिए राजकीय महाविद्यालय (पलहीपट्टी) की प्राचार्य डा. अनीता मिठ्ठू की अध्यक्षता में उप समिति गठित है। समिति में एसडीएम (पिंडरा) व राजकीय महाविद्यालय (जक्खिनी) के प्रवक्ता उमाशंकर गुप्ता सदस्य हैं।

विद्यापीठ में खंगाले जा रहे रिकार्ड

जांच समिति ने अभी विद्यापीठ से शिक्षकों का विवरण नहीं मांगा है। इसके बावजूद विद्यापीठ स्वयं संज्ञान में लेते हुए शिक्षकों का विवरण तैयार करने में जुटा है। शिक्षकों के रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं ताकि जरूरत पडऩे पर जांच समिति को तत्काल विवरण उपलब्ध कराया जा सके।

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