वाराणसी में कोरोना ही नहीं अब टायफायड ने भी बढ़ाई चुनौती, विडाल टेस्ट से मिलती सही रिपोर्ट

कोरोना ही नहीं अब टायफायड ने भी बढ़ाई चुनौती

टायफायड यानी मियादी बुखार साल्मोनेला पैराटाइफी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। दिनों-दिन बुखार बढ़ता ही जाता है। इसमें दवा लेने पर भी बुखार सामान्य नहीं होता है। कोरेाना से मिलता-जुलता लक्षण होने के कारण लोग भी दुविधा में हैं।

Saurabh ChakravartySun, 09 May 2021 04:52 PM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। टायफायड यानी मियादी बुखार साल्मोनेला पैराटाइफी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। दिनों-दिन बुखार बढ़ता ही जाता है। इसमें दवा लेने पर भी बुखार सामान्य नहीं होता है। कोरेाना से मिलता-जुलता लक्षण होने के कारण लोग भी दुविधा में हैं। कुछ लोग तो आरटीपीसीआर और विडाल जांच कराते हुए सही इलाज पा रहे हैं, जबकि ज्यादातर लोग अनावश्यक दवा खाने को मजबूर हैं।

दरअसल, दूषित पानी, भोजन या पेय पदार्थ आंतों में संक्रमण करते हैं, जिसकी वजह से साल्मोनेला पैराटाइफी नामक बैक्टीरिया पनपने हैं, जो टायफायड बुखार का कारण बनते हैं। वरिष्ठ फिजिशियन एवं आइएमए वाराणसी के पूर्व अध्यक्ष डा. पीके तिवारी बताते हैं कि टायफायड में पांचवें या छठवें दिन विडाल टेस्ट कराने पर रिजल्ट पाजिटिव आता है, जबकि इससे पहले परिणाम जानने के लिए स्टूल कल्चर कराया जा सकता है। इसमें शरीर पर लाल चकत्तों के साथ-साथ लिवर व तिल्ली बढ़ जाती है। अमूमन बाजार में रैपिड टेस्ट ही किया जाता है। रैपिड टेस्ट में गुणवत्ता कमजोर होने के चलते फाल्स पाजिटिव अधिक आते हैं।

इसलिए आते हैं फाल्स पाजिटिव

रैपिड टेस्ट में फाल्स पाजिटिव आने का कारण साल्मोनेला पैराटाइफी से मिलते-जुलते बैक्टीरिया का पेट में होना है। फाल्स पाजिटिव की वजह से मरीज को अनावश्यक दवाएं खानी पड़ती हैं। 24 घंटे में किया गया विडाल टेस्ट 70 से 80 फीसद तक मर्ज को डायग्नोस करता है।

आंतों में हो सकता है छेद

टायफायड का सही समय पर इलाज न मिलने से स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की दिक्कतें होती हैं। सबसे सामान्य आंतों में छेद का होना है। वहीं बुखार का मस्तिष्क पर आने से यह मस्तिष्क ज्वर का रूप ले सकता है।

यह हैं प्रमुख लक्षण :

- सिरदर्द

- 104 डिग्री तक बुखार

- शरीर में दर्द

- जी मिचलाना

- दस्त और कब्ज

-पेट दर्द

टायफायड में खान-पान कर रखें ख्याल 

- उबला हुआ, बोतलबंद या रासायनिक रूप से कीटाणुरहित पानी पीयें।

- भोजन को धोने या नल के पानी से अपने दांत ब्रश करने से बचें।

- दूषित पेय पदार्थ, भोजन या पानी पीने से बचें।

 

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