top menutop menutop menu

संक्रमितों के इलाज में न बरती जाए लापरवाही, मंत्री सुरेश खन्ना ने एल-टू चिकित्सालय बनाने के दिए निर्देश

संक्रमितों के इलाज में न बरती जाए लापरवाही, मंत्री सुरेश खन्ना ने एल-टू चिकित्सालय बनाने के दिए निर्देश
Publish Date:Wed, 12 Aug 2020 08:30 AM (IST) Author: Saurabh Chakravarty

मीरजापुर, जेएनएन। वित्त, संसदीय एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करने के बाद मंडलीय चिकित्सालय के ट्रामा सेंटर स्थित एल-2 आइसोलेशन वार्ड का निरीक्षण किया। वहां की व्यवस्था और मरीजों जो दी जा रही सुविधाओं के बारे में सीएमओ डा. ओपी तिवारी से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि संक्रमितों के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाए और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए। स्वास्थ्य मंत्री ने परिसर में खाली पड़े 145 बेड के नए भवन में 100 बेड का एल-टू का चिकित्सालय बनाने का डीएम एवं सीएमओ को निर्देश दिए।

मंडलीय चिकित्सालय में पहुंचे चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने ट्रामा सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान नए भवन में अभी तक एल-टू के तहत मात्र 40 बेड का चिकित्सालय होने की जानकारी दी गई। इस पर उन्होंने नए भवन में 100 बेड का और चिकित्सालय बनाने का निर्देश दिया। कहा कि जनपद में एल-टू का 300 बेड का चिकित्सालय होना चाहिए जबकि एल-वन का 700 बेड का आइसोलेशन वार्ड होना जरूरी है ताकि मरीज अधिक बढऩे पर उन्हें भर्ती करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। इस दौरान सीएमओ ने मंत्री को बताया कि 145 बेड के नए भवन में बिजली व पानी की सुविधा नहीं है और न ही उतने बेड हैं जिससे यहां पर सौ बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया जाए। मैन पावर का न होना भी बड़ी समस्या है। इसके बाद भी मंत्री ने व्यवस्था करने का निर्देश दिया। साथ ही इसमें किसी प्रकार की कोताही न बरतने की हिदायत दी। साथ ही इसे लेकर उन्होंने त्वरित कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। इस दौरान मंडलायुक्त प्रीति शुक्ला, डीएम सुशील कुमार पटेल, एसआइसी डा. एके सिन्हा, सीएमओ डा. ओपी तिवारी, एसीएमओ डा. नीलेश श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक डा. धर्मवीर सिंह आदि मौजूद रहे।

40 बेड का पहले से है एल-टू का चिकित्सालय

मंडलीय चिकित्सलय के परिसर स्थित ट्रामा सेंटर में 40 बेड एल-टू का चिकित्सालय बनाया गया है। यहां पर एल-वन में भर्ती मरीजों की हालत बिगडऩे पर भर्ती किया जाता है। अधिक स्थिति खराब होने पर उन्हें बीएचयू या प्रयागराज भेजा जाता है। एल-थ्री के तहत चिकित्सालय बनाने की सुविधा यहां पर नहीं है। अगर 100 बेड का और चिकित्सालय बन गया तो कुल 140 बेड का चिकित्सालय हो जाएगा।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.