National Service Scheme : मानवता ने की जब पुकार, एनएसएस के स्वयंसेवक हमेशा मिले तैयार

24 सितम्बर 1969 को तत्कालीन शिक्षामंत्री डा. वीकेआरवी राव ने सभी राज्यों को शामिल करते हुए 37 विश्वविद्यालयों में एनएसएस का जो कार्यक्रम आरंभ किया वह वटवृक्ष बनकर आज पूरे देश में लगभग चालीस लाख स्वयंसेवकों के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटा हुआ है।

Saurabh ChakravartyFri, 24 Sep 2021 06:40 AM (IST)
24 सितम्बर, 1969 को तत्कालीन शिक्षामंत्री डा. वीकेआरवी राव ने 37 विश्वविद्यालयों में एनएसएस का जो कार्यक्रम आरंभ किया

वाराणसी, शैलेश अस्थाना। बाढ़ रही हो या महामारी, गांवों सफाई करते, लोगों को स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण के प्रति जागरूक करते, अस्पतालाें में रक्तदान करते अक्सर दिखने वाले छात्र-छात्राओं दया, सहिष्णुता, सेवा, सहायता का भाव भरती है राष्ट्रीय सेवा योजना। 24 सितम्बर, 1969 को तत्कालीन शिक्षामंत्री डा. वीकेआरवी राव ने सभी राज्यों को शामिल करते हुए 37 विश्वविद्यालयों में एनएसएस का जो कार्यक्रम आरंभ किया, वह वटवृक्ष बनकर आज पूरे देश में लगभग चालीस लाख स्वयंसेवकों के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटा हुआ है। अकेले सर्वविद्या की राजधानी काशी में ही देखें तो अन्य स्वयंसेवी संगठनों की तरह ही एनएसएस के सैकड़ाें स्वयंसेवक ने कोरोना काल में ही खुद की चिंता छोड़ समाज की सेवा सहायता में जुटे रहे। कहना समीचीन होगा कि जब भी पीड़ित मानवता ने पुकार लगाई, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक तैयार मिले।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के एनएसएस के कार्यक्रम समन्वयक डा. बाला लखेंद्र बताते हैं कि योजना का शुभारंभ ही देश के युवाओं-नौजवानों में राष्ट्रीयता व राष्ट्र व समाज के प्रति कर्तव्य का भाव-बोध कराने के लिए हुआ था। ताकि युवा पीढ़ी अपनी जिम्मेदारी को समझे और संवेदनशील बनी रहे। वह कहते हैं कि योजना युवाओं में यह भाव भरने में सफल भी है और युवाओं ने समय-समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाई भी है।

बताते हैं कि आज राष्ट्रीय सेवा योजना विश्व भर में राष्ट्रीय विकास, सेवा, शांति, राष्ट्र निर्माण की दिशा में कार्य करने वाले छात्रों के सबसे बड़े रचनात्मक संगठन के रूप में हमारे सामने है। योजना ने अपने गौरवशाली 50 वर्षों में युवा जागरुकता, राष्ट्र निर्माण और विश्व शांति के लिए अनेक कार्यक्रमों के साथ अपनी पहचान बनाई है। बाढ़ की विभीषिका हो या अकाल का दौर, स्वयंसेवकों ने समर्पित भाव से कार्य किया है। भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के समय स्वयंसेवकों ने सेवा के महती कार्य किए हैं। लातूर, महाराष्ट्र का भूकंप , सुनामी आपदा के उपरांत स्वयंसेवकों ने जो कार्य किये वह उदाहरण है।

कोरोना काल में बनाया मास्क बैंक, लोगों को किया जागरूक

डा. बाला लखेंद्र बताते हैं कि कोरोना काल में बीएचयू के ही स्वयंसेवकों की बात करें तो लगभग तेरह हजार मास्क लोगों में वितरित किए। समाज की सहायता से परिसर में मास्क बैंक तैयार किया, इसमें लगभग सात हजार मास्क एकत्र हुए, जो जरूरतमंदों के बीच बांटे गए। कोविड संक्रमण से बचाव के लिए यूनिसेफ के साथ मिलकर 45 से भी ज्यादा प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की गईं। राष्ट्रीय स्तर पर एक आनलाइन प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया, जिसमें 20 हजार से भी ज्यादा स्वयंसेवकों ने भाग लिया। मुस्कुराएगा इंडिया कार्यक्रम के तहत लोगों को मानसिक रूप से मजबूत करने का अभियान जारी है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए बोई हरियाली

डा. लखेंद्र बताते हैं कि पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण के अनेक प्रयास स्वयंसेवकों द्वारा किए गए हैं। अब तक हजारों पौधों का रोपण किया गया है।

1150 किमी की साइकिल यात्रा

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती वर्ष (1869-2019) तथा राष्ट्रीय सेवा योजना की स्वर्ण जयंती (1969-2019) के उपलक्ष्य में एनएसएस बीएचयू ने 23 अगस्त से 07 सितंबर 2019 तक वाराणसी से सेवाग्राम आश्रम, वर्धा, महाराष्ट्र तक तक महात्मा गांधी जीवन दर्शन साइकिल यात्रा का आयोजन किया था। 17 साइकिल यात्रियों ने लगभग 1150 किलोमीटर की साइकिल यात्रा पूरे रास्ते सांप्रदायिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वावलंबन का संदेश दिया। मार्ग में पड़ने वाले ऐतिहासिक स्थलों, विभिन्न स्मारकों और महापुरुषों की प्रतिमाओं की सफाई की। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फिट इंडिया अभियान में हिस्सा भी लिया।

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