वाराणसी में महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल का शुभारंभ, पहली संध्या में अनूप मिश्र और अनिरुद्ध वर्मा ने दीं प्रस्तुतियां

27 और 28 नवंबर को सुबह-शाम संगीत सत्रों के साथ ही कबीर आधारित वार्ता सजीव कला प्रदर्शन विशिष्ट ‘कबीरा नौका-विहार’ स्थानीय बनारसी व्यंजन का स्वाद गंगाघाट-भ्रमण के साथ ही विश्वप्रसिद्ध अलौकिक गंगा-आरती का आनंद महोत्सव का आकर्षण बना रहेगा।

Saurabh ChakravartyFri, 26 Nov 2021 10:22 PM (IST)
गुलेरिया घाट पर आयोजित महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल के अवसर पर गायन प्रस्तुत करते पंडित अनूप मिश्र।

जागरण संवाददाता, वाराणसी : महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल का पांचवां संस्करण पूरे एक वर्ष के अंतराल के बाद शुक्रवार को गुलेरिया घाट पर भव्य संगीत समारोह के साथ शुरू हुआ। कबीर की वाणी को चहुंओर प्रसारित करती संगीत, साहित्य और कला की बेजोड़ प्रस्तुतियां सारे बाहरी कोलाहल से बहुत दूर, सबके हृदय को गहन आत्मिक शांति और स्थिरता की अनुभूति करा रही थी।

कहत कबीर... के साथ आरंभ हुई प्रस्तुति

'महिंद्रा कबीर उत्सव' की पहली संध्या गुलेरिया घाट पर बनारस की परंपरानुसार दिव्य गंगा आरती के साथ आरंभ हुई। प्रद्युम्न, पीयूष और साक्षी ने मुख्य मंच से गंगा आरती गायन किया। पांच बटुकों ने पूजन-अर्चन के साथ आरती को संपन्न किया। कबीर के इस उत्सव की आध्यात्मिक यात्रा पंडित अनूप मिश्रा के शास्त्रीय गायन, तत्पश्चात अनिरुद्ध वर्मा और उनके समूह की प्रस्तुति ‘कहत कबीर...’ के साथ आरंभ हुई। इन लुभावनी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उल्लेखनीय है कि ‘टीमवर्क आर्ट्स’ और ‘महिंद्रा ग्रुप’ ने दुनिया भर में होने वाले अनेक लोकप्रिय उत्सवों की पहल की है।

स्व. पंडित राजन मिश्रा को किया याद

पंडित अनूप मिश्रा ने फेस्टिवल के शुरू करने पर आयोजकों का आभार व्यक्त किया। कहा कि देश और विशेष रूप से कलाकार समुदाय के लिए इस कठिन समय में महिंद्रा कबीरा ने विभिन्न कलाकारों के लिए आत्मविश्वास और आशा जगाई है जो अनुकरणीय है। उन्होंने अपने चाचा और बनारस घराने के ख्यातिलब्ध शास्त्रीय गायक पद्मभूषण स्व. पंडित राजन मिश्रा को भी याद किया, जिन्होंने कबीर-उत्सव के पिछले संस्करण में प्रस्तुति दी थी।

अनिरुद्ध वर्मा ने दी अनूठी प्रस्तुति

अनिरुद्ध वर्मा ने कबीर के प्रति श्रद्धा और प्रेम की गहरी भावना प्रस्तुति ‘कहत कबीत'''' के माध्यम से व्यक्त की। अनिरुद्ध वर्मा एवं समूह ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में निबद्ध ‘नैहरवा’, ‘घट-घट में पंछी बोलता’, ‘कौन ठगवा’, ‘राम निरंजन आया रे’ और ‘उड जाएगा हंस अकेला’ की अनूठी प्रस्तुति दी।

महिंद्रा ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट हेड - कल्चरल आउटरीच, जय शाह ने उद्घाटन शाम को अपने विचार साझा करते हुए कहा कि महिंद्रा ग्रुप इस वर्ष फिर से बहुत लोकप्रिय महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल को वापस लाने के लिए उत्साहित है। जो लोग इसबार यहां नहीं आ सके वे भी आनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग के तहत फेस्टिवल को देख सकेंगे। टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक संजय के. राय ने कहा कि वाराणसी का यह अनंत शहर इस शानदार उत्सव में आप सभी का स्वागत करता है। सस्टेनेबिलिटी पार्टनर स्क्रैपशाला के साथ महिंद्रा कबीरा उत्सव ने अपने पिछले सभी उत्सवों और उनके विभिन्न संस्करणों में भी व्यापक अपशिष्ट प्रबंधन को लागू किया है ताकि 90 फीसद से अधिक कचरे का निस्तारण सही तरीके से किया जा सके।

दो दिन होंगे कार्यक्रम

27 और 28 नवंबर को सुबह-शाम संगीत सत्रों के साथ ही कबीर आधारित वार्ता, सजीव कला प्रदर्शन, विशिष्ट ‘कबीरा नौका-विहार’, स्थानीय बनारसी व्यंजन का स्वाद, गंगाघाट-भ्रमण के साथ ही विश्वप्रसिद्ध अलौकिक गंगा-आरती का आनंद महोत्सव का आकर्षण रहेगा।

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