महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने प्राइवेट परीक्षा की सुविधा समाप्त कर दी, स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों को मिलेगा लाभ

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने प्राइवेट परीक्षा की सुविधा समाप्त कर दी है।

राजभवन के निर्देश पर विद्यापीठ प्रशासन ने वर्तमान सत्र से ही प्राइवेट परीक्षा की सुविधा समाप्त की है। नए छात्र संबद्ध कालेजों से भी व्यक्तिगत परीक्षा फार्म नहीं भर सकते हैं। पूर्वांचल के विभिन्न जिलों ने हर साल बड़ी संख्या में व्यक्तिगत परीक्षा फार्म भरने थे।

Saurabh ChakravartyFri, 07 May 2021 08:05 PM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने प्राइवेट परीक्षा की सुविधा समाप्त कर दी है। नए छात्र अब व्यक्तिगत परीक्षा फार्म नहीं भर सकते हैं। हालांकि पहले से पंजीकृत परीक्षार्थियों को अब भी प्राइवेट परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं। स्नातक वार्षिक परीक्षा के लिए विलंब शुल्क के साथ आवेदन करने का अब भी मौका है।

राजभवन के निर्देश पर विद्यापीठ प्रशासन ने वर्तमान सत्र से ही प्राइवेट परीक्षा की सुविधा समाप्त की है। नए छात्र संबद्ध कालेजों से भी व्यक्तिगत परीक्षा फार्म नहीं भर सकते हैं। पूर्वांचल के विभिन्न जिलों ने हर साल बड़ी संख्या में व्यक्तिगत परीक्षा फार्म भरने थे। अब उन्हें संस्थागत अध्ययन करना होगा। नौकरी पेशा वाले लोगों को अध्ययन करने के लिए अब उत्तर प्रदेश राजर्षि मुक्त विश्वविद्यालय (प्रयागराज) या इग्नू ही विकल्प बचा हुआ है। दूसरी ओर प्राइवेट परीक्षा की सुविधा समाप्त होने से स्ववित्तपोषित कालेज खुश है। स्ववित्तपोषित कालेजों के प्रबंधकों का कहना है कि तमाम छात्र प्राइवेट परीक्षा फार्म भर देते थे। इसके कारण स्नातक की सीटें नहीं भर पाती थी। अब जिन छात्राें को पढ़ना होगा। वह बकायदा दाखिला लेंगे। इसका लाभ स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों को मिलना है। वहीं दाखिला लेकर पढ़ाई करने से छात्रों का ज्ञान भी बढ़ेगा। बहरहाल कुलसचिव डा. एसएल मौर्य ने बताया कि इस बार व्यक्तिगत परीक्षा फार्म अावेदन करने की सुविधा सिर्फ पहले से पंजीकृत छात्रों को ही दिया गया है। तीन साल में व्यक्तिगत परीक्षा की सुविधा पूरी तरह से समाप्त कर दी जाएगी।

संस्कृत विवि में अब भी व्यक्तिगत परीक्षा की सुविधा

दूसरी ओर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में अब भी व्यक्तिगत परीक्षा देने की सुविधा है। हालांकि संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री (स्नातक) करने के लिए इंटर संस्कृत से होना अनिवार्य है। वहीं आचार्य (स्नातकोत्तर) के लिए शास्त्री की डिग्री अनिवार्य है।

 

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