सारनाथ में विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर व्‍याख्‍यान का आयोजन, प्रकृति संरक्षण पर वक्‍ताओं ने दिया जोर

नीरजा माधव ने कहा कि प्रकृति को नुकसान पहुंचता है तो मनुष्य द्वारा नुकसान पहुंचाया जाता है। हमारे पूर्वज भी प्रकृति की रक्षा करने की बात करते हैं। पॉलिथीन की जरूरत नहीं थी तो उसे क्यों बनाया गया। प्रकृति की जानकारी हमारे धर्म द्वारा हमारे संस्कारों में दी जाती हैं।

Abhishek sharmaTue, 02 Feb 2021 04:43 PM (IST)
नीरजा माधव ने कहा कि प्रकृति को नुकसान पहुंचता है तो मनुष्य द्वारा नुकसान पहुंचाया जाता है।

वाराणसी, जेएनएन। साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि प्रकृति में अनेक रंग होते हैं, प्रकृति से ही हमें सब कुछ मिलता है। प्रकृति को बचाने के लिए मानव को सचेत होना होगा। उक्त बातें मुख्य अतिथि पद से विश्व आर्द्रभूमि दिवस के मौके पर मंगलवार को सृजन सामाजिक विकास न्यास व वन विभाग के संयुक्त तत्वाधान में सारनाथ के वन विभाग के परिसर में आयोजित सभा में कहीं।

नीरजा माधव ने कहा कि प्रकृति को नुकसान पहुंचता है तो मनुष्य द्वारा ही नुकसान पहुंचाया जाता है। हमारे पूर्वज भी प्रकृति की रक्षा करने की बात करते हैं। पॉलिथीन की जरूरत नहीं थी तो उसे क्यों बनाया गया। प्रकृति की जानकारी  हमारे धर्म द्वारा हमारे संस्कारों में दी जाती हैं। हमें प्रकृति को प्रकृति के हवाले कर देना है। हमारी आने वाली नई पीढ़ी पर्यावरण के प्रति सचेत नहीं हुई तो आने वाले समय में भयावक स्थिति होगी।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. जितेंद्र ने कहा कि प्रकृति के हाथ में हर नियंत्रण है। प्रकृति किसको कहां मिलती है या प्रकृति ही जानती है। इस मौके पर प्रोफेसर संजीव कुमार चौरसिया, बी डी पांडे अन्य लोगों ने अपने विचार रखे। संचालन डॉ. बेनी माधव व धन्यवाद ज्ञापन प्रभागीय वन अधिकारी महावीर कौजलवी ने किया। इस मौके पर पर्यावरण मित्र अनिल सिंह को पर्यावरण व जल संरक्षण के लिए डॉ. नीरजा माधव को डीएफओ द्वारा भारत गौरव रत्न प्रदान किया गया।

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