वाराणसी में कक्षा एक की छात्रा लावण्या को बनाया एक दिन का सीएमओ, मिशन शक्ति अभियान के तहत पहल

मिशन शक्ति-3 अभियान के तहत मेधावी मेघावी बालिकाओं ने शुक्रवार को जिले की व्यवस्था सांकेतिक रूप से संभाली। एक दिन के लिए अफसर बनीं बनी इन बेटियों ने लोगों की समस्याएं सुनीं नी और उनके निराकरण निदान का आश्वासन दिया।

Saurabh ChakravartyFri, 22 Oct 2021 07:27 PM (IST)
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने कक्षा एक की छात्रा लावण्या को एक दिन का सीएमओ बनाया।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। मिशन शक्ति-3 अभियान के तहत मेधावी मेघावी बालिकाओं ने शुक्रवार को जिले की व्यवस्था सांकेतिक रूप से संभाली। एक दिन के लिए अफसर बनीं बनी इन बेटियों ने लोगों की समस्याएं सुनीं और उनके निराकरण निदान का आश्वासन दिया। इसी कड़ी में मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने कक्षा एक की छात्रा लावण्या को एक दिन का सीएमओ बनाया।

महिलाओं और बेटियों के हौसले को बढ़ाने, उन्हें स्वालम्बी बनाने, उनके मान-सम्मान की सुरक्षा के लिए चलाये जा रहे मिशन शक्ति अभियान के तहत इस मेगा इवेंट का आयोजन किया गया था। इसके लिए चिकित्सा, पुलिस, शिक्षा समेत जिले के सभी विभागों को निर्देश जारी किये गये थे कि वह वे अपने-अपने यहां मेधावी मेघावी छात्राओं को एक दिन का सांकेतिक अधिकारी (नायिका) बनायें ये। अपर निदेशक/ मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. वीबी सिंह ने बताया कि महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा एवं स्वावलंबन के लिए मिशन शक्ति फेस-3 के तहत शुक्रवार को सेंट जॉस मडौली में कक्षा एक की छात्रा लावण्या त्रिपाठी (7 वर्ष) को एक दिन के लिए सांकेतिक रूप से मुख्य चिकित्सा अधिकारी बनाया गया । इस दौरान विभाग के सभी अधिकारी वहां मौजूद थे। पदभार संभालने के बाद लावण्या से जब पूछा गया कि उसे कैसा लगा रहा है तो उसने चहकते हुए बोला बहुत सुन्दर। बड़ी होकर वह क्या बनना चाहेगी? इस सवाल के जवाब में लावण्या बोली एक ऐसा अफसर जो देश सेवा में काम आ सके। लावण्या ने कहा वह देश की सेवा करना चाहती है।

गाजीपुर में छात्राओं ने संभाला एक दिन का प्रशासनिक दायित्व

महिला सशक्तीकरण को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा मिशन शक्ति फेज-3 के तहत शुक्रवार को इंटर कालेज की पांच छात्राओं को एक दिन के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी, महिला कल्याण अधिकारी, बाल संरक्षण अधिकारी, सेंटर मैनेजर और प्लेस आफ सेफ्टी अधीक्षक बनाया गया। इस दौरान इन अधिकारियों ने पूरे दिन अपने कर्तव्यों का निर्वाहन किया। एक दिन के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी बनी आयुषी सिंह, इंटर की छात्रा है। इस दौरान आयुषी सिंह ने कई फाइलों का गहन निरीक्षण किया। दहेज के मामलों से संबंधित भी फाइल उनके सामने आई, जिसमें साल 2004 का एक शासनादेश है जिसमें सरकारी कर्मचारी या अधिकारी एक शपथ पत्र विभाग को देगा कि दहेज का लेनदेन नहीं करेगा। इसी दौरान एक वृद्ध भी पेश हुआ जिसे कोर्ट के द्वारा प्रतिमाह प्रोबेशन कार्यालय में हर दिन हाजिरी लगाने के लिए कहा गया है। उनकी बातों को नवागत जिला प्रोबेशन अधिकारी ने सुना। वहीं महिला कल्याण अधिकारी छात्रा अंजू कुशवाहा को बनाया गया। इन्हें भी पद भार ग्रहण कराने के बाद महिला कल्याण अधिकारी नेहा राय के द्वारा विभाग से संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों से मिलकर परिचय प्राप्त किया और विभागीय कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की। बाल संरक्षण अधिकारी बनी काजल सिंह ने अपना पद ग्रहण करते ही एक 15 वर्षीय बालक जो लगातार अपने घर से भाग जा रहा था, आज वह बाल गृह लाया गया था। काउंसलिंग करते हुए काजल ने उसे कुशल अधिकारी की तरह समझाया। इसके अलावा विभाग से जुड़े हुए कर्मचारियों से परिचय प्राप्त करने के पश्चात विभाग की फाइलों का भी अवलोकन किया।

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