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Kashi Vidyapeeth प्रवासी मजदूरों पर प्रोजेक्ट तैयार करने में जुटा, केंद्र व राज्य सरकारों को देंगे रिपोर्ट

वाराणसी, जेएनएन। कोरोना महामारी के चलते दूसरे राज्यों में रह रहे मजदूर वापस यूपी आने के लिए बाध्य हो रहे हैं। बड़ी संख्या में घरों की ओर कूच करने वाले प्रवासी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रवासी आयोग गठित करने का निर्णय लिया है। वहीं दूसरी ओर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने प्रवासी मजदूरों पर शोध कराने का निर्णय लिया है। समाज कार्य विभाग के छात्रों को इस वर्ष प्रवासी मजदूरों पर प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

एमएसडब्ल्यूू के छात्रों को प्रवासी मजदूरों और उनके परिवार की समस्याओं पर अध्ययन कर लघु शोध तैयार करेंगे। विद्यालयों के लघु शोध के निष्कर्षों को विद्यापीठ केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय, श्रम मंत्रालय भी प्रेषित करेगा ताकि प्रवासी मजदूरों की समस्याओं का समाधान स्थायी रूप से हो सके। छात्र कल्याण संकाय के अध्यक्ष व सोशल वर्क के एसोसिएट प्रोफेसर डा. बंशीधर पांडेय ने बताया कि फिलहाल विद्यापीठ वाराणसी जिले के आस-पास के गांवों में देश के विभिन्न हिस्सों से वापस आ रहे प्रवासी मजदूरों तथा उनके परिवारजनों को कोरोना से संबंधी सभी सूचनाओं के साथ-साथ संकट के कारण उत्पन्न भय, उन्माद, चिंता, तनाव आदि अन्य मानसिक समस्याओं के उचित समाधान हेतु उचित परामर्श देने का काम शुरू कर दिया है।

15 सदस्यीय परामर्श समिति

पूरे लॉकडाउन के दौरान छात्र कल्याण संकाय की पहल पर काशी विद्यापीठ में अध्यापनरत शिक्षकों की एक 15 सदस्यीय परामर्श समिति का गठन किया। इसमें प्रो. राम प्रकाश द्विवेदी, डा. बंशीधर पाण्डेय, प्रो. आरपी. सिंह, प्रो. वंदना सिन्हा, डा. रमन पंत, डा. संतोष गुप्ता, डा. राहुल गुप्ता, डा. रश्मि सिंह, डा. दुर्गेश कुमार उपाध्याय, डा. मुकेश कुमार पंथ, डा. अमरेन्द्र सिंह, डा. रजनीश कुमार तिवारी, डा. विनोद सिंह, डा. संतोष सिंह व सोनाली सिंह शमिल हैं।

केंद्र व राज्य सरकारों को देंगे रिपोर्ट

परामर्श समिति के सदस्यों के नेतृत्व में समाज कार्य के विद्यार्थी मोबाइल फोन के माध्यम से प्रवासी मजदूरों से संपर्क कर रहे हैं। एक प्रवासी मजदूर से दूसरे श्रमिकों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। अब दायरा बढ़ाकर गांव में रह रहे प्रवासी मजदूरों पर केंद्रीय किया गया है। वहीं विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सुझावों को संकलित कर विश्वविद्यालय प्रशासन इसे राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों को प्रेषित करने का निर्णय लिया है।

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