आस्ट्रेलिया की नींव मजबूत कर रही काशी की ईंट, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया भी होगा निर्यात

काशी में उत्पादित ईंट में कुछ खासियत है। किफायती होने के साथ हस्तनिर्मित होने के कारण ईंट को विदेशी धरती पर काफी पसंद किया जा रहा है। प्रयाग क्ले प्रोडक्ट्स के निदेशक दिशांत बदलानी बताते हैँ कि कोरोना के चलते स्थानीय बाजार में मांग घटी है।

Abhishek SharmaSat, 14 Aug 2021 06:00 AM (IST)
दिशांत बदलानी बताते हैँ कि कोरोना के चलते स्थानीय बाजार में मांग घटी है।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। प्राचीन काल से काशी अर्थव्यवस्था की धुरी में रही है। दुनिया के तमाम देशों के साथ काशी के व्यापारिक संबंध रहे हैं। इस दिशा में एक बार फिर काशी का डंका विदेशों में बजने लगा है। पहले इंग्लैंड उसके बाद अब आस्ट्रेलिया ने काशी की ईंट को पसंद किया है। संयुक्त अरब अमीरात व इंडोनेशिया से ईंट का कारोबार अंतिम दौर में है।

दरअसल, काशी में उत्पादित ईंट में कुछ खासियत है। किफायती होने के साथ हस्तनिर्मित होने के कारण ईंट को विदेशी धरती पर काफी पसंद किया जा रहा है। प्रयाग क्ले प्रोडक्ट्स के निदेशक दिशांत बदलानी बताते हैँ कि कोरोना के चलते स्थानीय बाजार में मांग घटी है, लेकिन आस्ट्रेलिया व अन्य देशों से मांग बढ़ी है। इंडोनेशिया व संयुक्त अरब अमीरात से बातचीत अंतिम दौर में है। बहरहाल, कोरोना महामारी में उद्योग जगत जहां ढलान की ओर था वहीं काशी की गुणवत्तायुक्त ईंट पर विदेशी खरीदारों ने विश्वास बनाए रखा।

ईंट में कई राज्यों की मिट्टी का उपयोग : प्रयाग क्ले प्रोडक्ट्स में उत्पादित ईंटों के लिए गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश व केरल से मिट्टी मंगाई जाती है। इसे एक निश्चित अनुपात में मिलाकर 55 प्रकार की ईंट तैयार की जाती हैं। ईंट पर विभिन्न रंग उभारने के लिए भी तापमान निर्धारित है। बाहरी रंगों का प्रयोग नहीं किया जाता है। ईंट की साइज व रंग विदेशी खरीदार स्वयं करते हैं। आस्ट्रेलिया जहां 230/110/75 एमएम वहीं यूके 215/102/65 एमएम ईंट की मांग करता है। सभी ईंटों का नामकरण खरीदार देश के अनुकूल किया गया है। नेचुरेल रेड, माट्टे ग्रे, ओल्ड इंग्लिश मेट्रिक ब्रिक यूके में पसंद किया जा रहा है।

रामनगर पोर्ट लाएगा क्रांति : सड़क से जलमार्ग काफी किफायती होने के कारण कारोबारियों की पहली पसंद है। ऐसे में रामनगर पोर्ट से ईंट भेजने की व्यवस्था हुई तो एक अनुमान के मुताबिक ईंट के कारोबार में 30 फीसद तक की बचत होगी। कोलकाता से समुद्री मार्गों के जरिए आस्ट्रेलिया, अमेरिका समेत इंडोनेशिया, अफ्रीकी, खाड़ी व यूरोपीय देशों तक आपूर्ति आसान हो जाएगी। रामनगर के जरिए काशी देश व दुनिया के तमाम देशों से जुड़ जाएगा। अभी कोलकाता तक ट्रक से प्रति टन ईंट भेजने में 2200 रुपए व न्हावाशेवा भेजने में 4500 रुपये पड़ रहा है।

कंटेनर की समस्या से कारोबार प्रभावित : किसी कारोबार को बढ़ाने में तंत्र का बहुत बड़ा योगदान होता है। इसमें कंटेनर की समय से अनुपलब्धता बड़ी समस्या है। अगर मिल भी गए तो भाड़ा ईंट के मूल्य से ज्यादा हो रहा है। वहीं शिपिंग लाइंस का मनमाना रवैया भी कारोबार को प्रभावित कर रहा है। आए दिन कारोबार से जुड़े लोगों को ऐसी समस्याओं से दो चार होना पड़ रहा है।

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